मुसनमानों को चाहिए जीवन सुरक्षा बिल: आजम खां

मुसनमानों को चाहिए जीवन सुरक्षा बिल: आजम खां
  • मौलाना अबुल कलाम आज़ाद एजूकेशन फाउण्डेशन अल्पसंख्यकों के साथ बहुत बड़ा धोखा: आज़म

 

  •  नियम-शर्तों को शिथिल किया जाये या फिर स्कीम समाप्त कर दी जाये: आजम

 

वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ सपा नेता आजम खां
वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ सपा नेता आजम खां
केन्द्र सरकार द्वारा शत-प्रतिशत वित्त पोषित मौलाना अबुल कलाम आज़ाद एजूकेशन फाउण्डेशन को अल्पसंख्यकों और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद जैसी बड़ी शख्सियत के नाम के साथ एक बहुत बड़ा धोखा बताते हुये प्रदेश के नगर विकास एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आज़म खाँ ने आज लखनऊ में अपने बयान में कहा कि इस फाउण्डेशन द्वारा अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक विकास के लिये जो भी अनुदान व छात्रवृत्ति दी जाती है, वह वितरित नहीं हो पाती है और दी गयी धनराशि का लगभग 90 प्रतिशत वापस चला जाता है। उन्होंने कहा कि इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इस फाउण्डेशन के तहत संचालित योजनाओं के नियम व शर्तें साज़िशन ऐसी बनायी गयी हैं, ताकि अधिकांश अल्पसंख्यक तालीमी संस्थायें व छात्र-छात्रायें इनका फ़ायदा न उठा सकें।
आज़म खाँ ने कहा कि फाउण्डेशन की ये योजनायें केन्द्र सरकार द्वारा पिछले पांच-छः दशकों में अल्पसंख्यकों के लिये चलाई गयी ‘ज़बानी जमा-खर्च’ जैसी योजनाओं की ही एक कड़ी है। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई संस्था या फाउण्डेशन जिसके जरिये अल्पसख्यकों को सिर्फ खोखला फ़ायदा पहुंचाने की बात कही जाये, उनसे अल्पसंख्यकों को कोई वास्तविक फ़ायदा पहुंचाना तो दूर की बात है, उल्टे ऐसी योजनाओं से उनका अहित ही होता है, क्योंकि इन योजनाओं को फ़ासिस्ट ताक़तें अल्पसंख्यकों पर जु़ल्म-ओ-सितम करने के लिये एक हथियार की तरह इस्तेमाल करती हैं।
आज़म खाँ ने कहा कि सच्चर कमीशन तो बनाया जाता है, लेकिन उसकी पहली सिफ़ारिश कि मुसलमानों को नौकरी में आरक्षण दिया जाय, को नहीं माना जाता है। खाद्य सुरक्षा बिल तो पास कराया जाता है, लेकिन जीवन सुरक्षा बिल नहीं। उन्होंने कहा कि गुजरात व अन्य प्रदेशों में जब अल्पसंख्यकों पर जुल्म, सितम व बर्बरता होती है, तो अल्पसंख्यकों के ये नाम-निहाद हमदर्द अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिये वहां पहुंच जाते हैं।
आज़म खाँ ने अपने बयान में यह मांग की है कि फाउण्डेशन द्वारा अल्पसंख्यकों के लिये संचालित अनुदान व छात्रवृत्ति योजनाओं के नियमों व शर्तों को शिथिल किया जाये, ताकि इनके तहत मिलने वाली धनराशि का शत-प्रतिशत वितरण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अगर शर्तों को शिथिल नहीं किया जा सकता है, तो फिर इन योजनाओं को समाप्त कर देना चाहिये।

Leave a Reply