मुख्यमंत्री ने संस्कृत संस्थानम् के पुरस्कारों की धनराशि बढ़ाई

मुख्यमंत्री ने संस्कृत संस्थानम् के पुरस्कारों की धनराशि बढ़ाई
  • संस्कृत को कम्प्यूटर के संचालन से जोड़ने के लिए कार्य किया जाएगा: मुख्यमंत्री
  • मुख्यमंत्री ने की संस्कृत संस्थानम् में एक हॉल का निर्माण कराने की घोषणा
 

विद्वानों को सम्मानित करते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
विद्वानों को सम्मानित करते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उ0प्र0 संस्कृत संस्थानम् के पुरस्कारों की धनराशि को अगले वर्ष से दोगुना किए जाने की घोषणा की है। उन्होंने संस्कृत संस्थानम् में एक हॉल का निर्माण कराए जाने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि आगामी वर्ष से सम्मानित किए जाने वाले संस्कृत के विद्वानों को पुरस्कार ग्रहण करने हेतु आवागमन पर व्यय धनराशि भी प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री आज लखनऊ में अपने सरकारी आवास 5, कालिदास मार्ग पर आयोजित एक कार्यक्रम में संस्कृत संस्थानम् के वर्ष 2008 के पुरस्कारों का वितरण करने के पश्चात अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने प्रो0 एस0 रामानुजताताचार्य को विश्व भारती पुरस्कार से सम्मानित किया। पुरस्कार के तहत प्रो0 रामानुजताताचार्य को अंगवस्त्र, ताम्रपत्र तथा 2 लाख 51 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने संस्कृत के अन्य विद्वानों को भी सम्मानित किया।
अपने सम्बोधन में श्री यादव ने कहा कि हम सभी का यह प्रयास होना चाहिए कि संस्कृत जैसी प्राचीन भाषा का सम्मान किस प्रकार बढ़े। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने संस्कृत व हिन्दी के पुरस्कारों का वितरण बन्द कर दिया था। समाजवादी सरकार ने हिन्दी संस्थान तथा संस्कृत संस्थानम् द्वारा विद्वानों को प्रदान किए जाने वाले पुरस्कारों को बहाल कर दिया। उन्हांेने कहा कि संस्कृत को कम्प्यूटर के लिए सर्वाधिक उपयुक्त भाषा भी माना गया है। इसके दृष्टिगत संस्कृत को कम्प्यूटर के संचालन से जोड़ने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृत वेदों की भाषा है। इसे देव भाषा भी कहते हैं। ज्यादातर प्राचीन ग्रन्थ संस्कृत भाषा में ही लिखे गए। उन्होंने कहा कि भारत जैसी विविधताएं दुनिया के किसी भी अन्य देश में नहीं हैं। यहां पर अनेक धर्म, भाषाएं तथा संस्कृतियां मौजूद हैं। हम सबको अपने देश की भाषा और संस्कृति के सम्मान और प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए काम करना होगा।
अपने सम्बोधन में संस्कृत संस्थानम् के अध्यक्ष शंकर सुहैल ने संस्थान के विकास के लिए अपने संकल्प की जानकारी दी। उ0प्र0 हिन्दी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृत भारत की ज्यादातर भाषाओं की जननी, प्रेरणास्रोत तथा ऊर्जा स्रोत है। संस्कृत हमारी संस्कृति तथा पूरब की पहचान है। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति को अपने ऊपर हावी न होने देना समाजवादी सोच का हिस्सा है।
प्रमुख सचिव भाषा डा. ललित वर्मा ने अपने सम्बोधन में संस्थान की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति को समग्र रूप से समझने के लिए संस्कृत का ज्ञान आवश्यक है। उन्होंने संस्कृत के पुरस्कारों का वितरण पुनः शुरू कराने के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
कार्यक्रम में प्रो0 रामानुजताताचार्य तथा प्रो0 शिव जी उपाध्याय ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर व्यावसायिक शिक्षा मंत्री ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी, स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन, कारागार मंत्री राजेन्द्र चौधरी, बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोन्विद चौधरी, पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह, व्यावसायिक शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र सिंह यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, उपाध्यक्ष राज्य योजना आयोग नवीन चन्द्र बाजपेयी, मुख्य सचिव जावेद उस्मानी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
संस्कृत विद्वानों के पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में प्रो0 शिव जी उपाध्याय को महर्षि वाल्मीकि पुरस्कार (राशि 01 लाख रुपये), डा. प्रेमा अवस्थी, प्रो0 महावीर अग्रवाल, डा. शिव बालक द्विवेदी तथा प्रो0 विजय देव शंकर पंड्या को विशिष्ट पुरस्कार (पुरस्कार राशि 51 हजार रुपये प्रत्येक), गोविन्द कुमार शर्मा, अनिल ज्ञवाली, प्रेम नारायण त्रिपाठी, नारायण दत्त मिश्र, अश्विनी त्रिपाठी, चन्दन कुमार मिश्र, त्रयम्बक नाथ तिवारी, चन्द्रशेखर द्रविड तथा आशीष मिश्र को वेद पण्डित पुरस्कार (पुरस्कार राशि 25 हजार रुपये प्रत्येक) प्रदान किया गया। इसके अलावा नामित पुरस्कार के अन्तर्गत डा. गायत्री प्रसाद पाण्डेय को बाणभट्ट पुरस्कार, डा. सुधाकर मिश्र को शंकर पुरस्कार, प्रो0 कमलेश झा को सायण पुरस्कार तथा प्रो0 रूप किशोर शास्त्री को पाणिनी पुरस्कार (पुरस्कार राशि 25 हजार रुपये प्रत्येक) प्रदान किया गया। इसी क्रम में प्रो0 सदानन्द शुक्ल, डा. गायत्री शुक्ला तथा डा. चन्द्रकान्ता राय को विशेष पुरस्कार ( पुरस्कार राशि 11 हजार रुपये प्रत्येक) से सम्मानित किया गया, साथ ही डा. धनीन्द्र कुमार झा, डा. त्रिवेणी प्रसाद शुक्ल तथा डा. अमिय चन्द्र शास्त्री सुधेन्दु को विविध पुरस्कार (साहित्य पुरस्कार) ( पुरस्कार राशि 5 हजार रुपये प्रत्येक) प्रदान किया गया। डा. राका जैन को 5 हजार रुपये की धनराशि का सायण पुरस्कार दिया गया। समस्त सम्मानित विद्वानों को अंगवस्त्र एवं ताम्रपत्र भी प्रदान किए गए।

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