भागीरथी के तट पर बसा तंबुओं का शहर

भागीरथी के तट पर बसा तंबुओं का शहर
बैल गाड़ियों से मेला ककोडा जाते लोग।

– कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर रहेगा लाखों लोगों का तीन दिनी प्रवास।

भागीरथी के तट पर तंबुओं का शहर बस चुका है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाले मेला ककोडा में

भागीरथी के तट पर बसा तंबुओं का शहर

परिवार सहित लाखों लोग गंगा किनारे तीन दिनी प्रवास के लिए पहुँच गए हैं, जहां परिवार सहित बच्चे, बड़े और महिलायें धर्म-कर्म और जमकर मौज-मस्ती करेंगे।

रूहेलखंड के कुंभ के नाम से चर्चित मेला ककोडा कादरचौक थाना क्षेत्र में भागीरथी के किनारे कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर प्रति वर्ष जिला पंचायत आयोजित करती है। जनपद बदायूं के साथ आसपास के जनपदों से लाखों लोग तीन दिन का प्रवास करने के लिए गंगा किनारे प्रति वर्ष पहुँचते हैं। मेले में विभिन्न सरकारी विभाग अपने अस्थाई कार्यालय खोल कर किसानों को आवश्यक जानकारी देते हैं एवं विशाल बाजार में महिलायें जमकर खरीददारी करती हैं। जिला पंचायत विभिन्न प्रतियोगिताओं का भी आयोजन कराता है, जिसमें घुड़दौड़ देखने के लिए भारी संख्या में लोग जमा होते हैं।

 

जुए के लिए कुख्यात

मेला ककोडा जुआ खेलने के लिए कुख्यात है। हालांकि पुलिस प्रति वर्ष जुआ न होने देने का दावा करती है, पर पुलिस को लाखों रूपये की अवैध कमाई होती है, जिससे जुए पर रोक नहीं लग पाती। दूर-दूर से जुआरी भी आते हैं, जिनके बीच करोड़ों का जुआ खेला जाता है।

 

पुलिस के लिए चुनौती

गंगा किनारे कटरी में मेला लगने के कारण पुलिस के लिए चुनौती ही रहता है। बसपा सरकार से पांच वर्ष पहले मेले से बारह अपहरण हुए थे, इस बार सत्ता परिवर्तन के बाद पुलिस की जिम्मेदारी बढ़ गई है।

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