भट्टा पारसौल के किसानों का साथ देने वाली सपा का अत्याचार

भट्टा पारसौल के किसानों का साथ देने वाली सपा का अत्याचार
  • बरेली में लाठी और रायफल के दम पर छीनी जा रही है किसानों से जमीन
बसपा सरकार में किसानों पर अत्यचार ढहाने को तैयार पुलिस का फ़ाइल फोटो
बसपा सरकार में किसानों पर अत्यचार ढहाने को तैयार पुलिस का फ़ाइल फोटो

भट्टा पारसौल की दर्दनाक यादें आम आदमी के दिलो-दिमाग में अभी भी हैं। बसपा सरकार किसानों की जगह ठेकेदारों के साथ खड़ी हो गई थी, जिससे हालात भयावह हो गए थे, तब कांग्रेस और भाजपा के साथ सपा भी किसानों की हमदर्द नज़र आ रही थी, लेकिन आज बसपा वाली भूमिका में सपा है और किसान जिस भूमिका में कल थे, वह उसी में आज हैं।

जी हाँ, बरेली जनपद में एक दर्जन गाँवों के किसान जमीन देने को तैयार नहीं हैं, लेकिन प्रशासन लाठी और रायफल के दम पर जमीन छीनने को आमादा है। उल्लेखनीय है कि परसाखेड़ा से लेकर रजऊ तक 30 किलोमीटर लंबा बाईपास बनाने के लिए 33 गाँवों के 2400 किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई है, जिनमें भूड़ा, कुम्हड़ा, अटा कायस्थान, कचौली, आलमपुर, मुड़िया अहमदनगर, परसाखेड़ा और धनतिया गाँव के अधिकाँश किसानों ने सरकार द्वारा निर्धारित मुआवजा लेने से मना कर दिया है। यह किसान 25 लाख रुपया प्रति बीघा की दर से मुआवजा मांग रहे हैं, जो प्रशासन देने को तैयार नहीं है।

किसानों की मर्जी के बिना बरेली में धरती को रौंदती मशीन
किसानों की मर्जी के बिना बरेली में धरती को रौंदती मशीन

किसानों को मनाने की बजाये प्रशासन ने दरिंदगी शुरू कर दी है। पुलिस के बल पर जमीन छीननी शुरू कर दी है, जिससे मंगलवार को किसानों और पुलिस के बीच भिड़ंत भी हो गई थी। गुस्साई पुलिस ने बच्चे, महिला और बुजुर्गों तक को बेरहमी से पीटा था। तमाम लोगों को मुकदमा लिख कर जेल भेजा रहा है, पर भट्टा पारसौल के किसानों का साथ देने वाले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मौन हैं।

उधर मंगलवार को भूड़ा गाँव में पुलिस के साथ पीएसी भी मौके पर थी, पर पीएसी किसानों पर अत्याचार के विरुद्ध है, तभी पुलिस के साथ पीएसी ने लाठी चार्ज नहीं किया, जिससे पुलिस को मुंह की खानी पड़ी। हालांकि इस बात को पीएसी की तरफ से नहीं कहा गया है, लेकिन पुलिस पीएसी के साथ न देने के कारण ही पिटी।

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