बहुत दिन में पड़ेगी सचिन बिना क्रिकेट की आदत

बहुत दिन में पड़ेगी सचिन बिना क्रिकेट की आदत
बहुत दिन में पड़ेगी सचिन के बिना क्रिकेट देखने की आदत

क्रिकेट की दुनिया में भगवान के नाम से पुकारे जाने वाले सचिन रमेश तेंदुलकर ने वनडे क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। अचानक हुई घोषणा से देश और दुनिया में फैले उनके प्रशंसक स्तब्ध नज़र आ रहे हैं।

सचिन को हस्ताक्षरयुक्त बल्ला देते सर डान ब्रेडमेन

वनडे क्रिकेट में 49 शतक और 96 अर्द्ध शतक के सहारे 18426 रनों का पहाड़ खड़ा करने वाले सचिन ने 463 वनडे मैच खेले हैं। वनडे क्रिकेट के अधिकाँश रिकॉर्ड उन्हीं के नाम हैं, जिनमें एक दोहरा शतक भी शामिल है। क्रिकेट जगत में दूसरे सचिन के पैदा होने की कल्पना करना भी बेहद कठिन लगता है, क्योंकि क्रिकेट की दुनिया में दूसरा सर डॉन ब्रेडमेन पुनः पैदा नहीं हुआ और न ही ऎसी संभावनाएं हैं, लेकिन सर डॉन ब्रेडमेन ने भी सचिन की प्रशंसा की थी और घर बुला कर उन्होंने सचिन को सम्मानित किया था। मैदान की बात करें, तो विरोधी टीम की पूरी रणनीति सचिन से पार पाने की ही रहती थी। दुनिया भर के गेंदबाज उनसे खौफ खाते थे। सचिन ने दुनिया के सभी बड़े गेंदबाजों की मैदान पर जमकर धुनाई की है। भारतीय टीम के इस हीरे को लेकर दुनिया भर के बल्लेबाज भी चिंतित नज़र आते रहे हैं, क्योंकि सचिन के सामने उनकी प्रतिभा दबी ही रह गई। तमाम अवसर ऐसे आये हैं, जब कुल स्कोर में आधे से अधिक रन सचिन के और बाक़ी रन पूरी टीम के होते थे, इसीलिए क्रिकेट में वह विश्वास के प्रतीक बन गए थे। वह बल्लेबाजी के साथ कैच, गेंदबाजी और आउट होने में भी अलग-अलग तरह के रिकॉर्ड बना चुके हैं। हाल-फिलहाल वह रन नहीं बना पा रहे थे, जिससे उनके आलोचकों की संख्या बढ़ती जा रही थी, तभी सचिन ने संन्यास की अचानक घोषणा कर दी, जिससे उनके प्रशंसक ही नहीं, बल्कि सभी लोग स्तब्ध नज़र आ रहे हैं। आम क्रिकेट प्रेमी अभी उन्हें और खेलते देखना चाहता है।

खैर, मेन ऑफ द मैच बनने का रिकॉर्ड बनाने वाले सचिन ने क्रिकेट जगत में तिरंगे की शान को हमेशा बढ़ाया, पर मैदान पर मंद-मंद मुस्कान बिखेरने वाला यह शालीन हीरो अब दिखाई नहीं दिया करेगा। सचिन तेंदुलकर के बिना क्रिकेट देखने की आदत क्रिकेट प्रेमियों को बहुत दिनों में पड़ेगी।

 

आउट न कर पाने पर रो पड़ा गेंदबाज

सचिन तेंदुलकर शुरू से ही प्रतिभावान रहे हैं। वर्ष 1988 में उन्होंने एक स्कूल के टूर्नामेंट में विनोद कांबली के साथ 664 रनों की पारी खेली थी, जिससे वह अचानक चर्चा में आ गये। उस समय सचिन का ऐसा खौफ था कि विपक्षी टीम खेलने से मना कर देती थी। उस टूर्नामेंट में तो एक गेंदबाज रो पड़ा था। इसी तरह कहा जाता है कि उनके कोच अभ्यास के समय स्टंप पर एक रुपया रख देते थे, जो आउट करने वाले खिलाड़ी को मिलता था और आउट न होने पर वह रुपया सचिन का हो जाता था। सचिन के पास ऐसे तेरह सिक्के हैं। सचिन से जुड़ी ऐसी ही तमाम कहानियाँ हैं, जो सुनते हुए बेहद रोचक लगती हैं।

 

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