बदायूं में पुलिस भी करती है ऑनर किलिंग

बदायूं में पुलिस भी करती है ऑनर किलिंग
मृतक प्रवेश गिरी का फ़ाइल फोटो
मृतक प्रवेश गिरी का फ़ाइल फोटो

उत्तर प्रदेश और हरियाणा में ऑनर किलिंग की सनसनीखेज वारदातें होती रहती हैं। प्रेमी-प्रेमिका और उनके परिजन मारे जाते रहे हैं, जिसको लेकर उच्चतम न्यायालय सरकार और पुलिस को निर्देश देता रहा है। सरकारों में बैठे लोग भी इस मुददे पर खुद को बेहद गंभीर दिखाते रहे हैं, इस सब के बावजूद उत्तर प्रदेश के जनपद बदायूं में दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। जिस पुलिस को प्रेमी-प्रेमिका और उनके शुभचिंतकों की रक्षा करनी थी, उस पुलिस ने ही पहले प्रेमी के ताऊ की गाँव में सरेआम बेरहमी से पिटाई लगाई और फिर मूंछें उखाड़ कर प्रेमिका के परिजनों से पेशाब पिलवाई। पुलिस की दरिंदगी यहीं नहीं रुकी, मनमानी पर उतारू बेख़ौफ़ पुलिस ने प्रेमी के निर्दोष भाई को हवालात में ही पीट-पीट कर मौत के घाट ही उतार दिया।

ह्रदय विदारक घटना जनपद बदायूं में स्थित थाना हजरतपुर क्षेत्र की है। हजरतपुर थाना क्षेत्र के गाँव बघौरा निवासी पच्चीस वर्षीय मुन्ना गिरी नाम का युवक और बहेलिया जाति की शेषवती नाम की लड़की आपस में प्रेम करते हैं और दोनों शादी करना चाहते थे, पर लड़की के परिजन दबंग हैं, जिससे गाँव में रहते हुए विवाह कर पाना संभव नहीं था, इसलिए करीब तीन माह पूर्व दोनों भाग गए और दोनों ने विवाह कर लिया। लड़की के परिजनों ने प्रेमी युवक मुन्ना के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करा दिया, लेकिन प्रेमी-प्रेमिका हाईकोर्ट की शरण में चले गए और खुद को बालिग बताते हुए शादी का प्रमाण पत्र न्यायालय के समक्ष रख दिया, जिस पर न्यायालय ने पुलिस को मुकदमा खत्म कर प्रेमी-प्रेमिका को सुरक्षा देने का आदेश दिया, इसके बावजूद पुलिस प्रेमिका के परिजनों के दबाव में प्रेमी के परिजनों और रिश्तेदारों का लगातार उत्पीड़न करती रही और दोनों का पता बताने और दोनों को गाँव में बुलाने का दबाव लगातार बनाती रही।

बताया जाता है कि थानाध्यक्ष हरचरण सिंह यादव ने कुछ दिन पहले प्रेमी के ताऊ को गाँव में सरेआम बेरहमी से पीटा ही नहीं, बल्कि लड़की के परिजनों के हाथों पेशाब पिलाने के साथ उसकी मूंछे तक उखाड़ लीं। पुलिस इतने पर ही मान जाती, तब भी ठीक था। लड़की पक्ष के दबाव में पुलिस ने प्रेमी युवक के बहनोई और भाई को थाने की हवालात में बंद कर रखा था। सेटिंग के चलते बहनोई को दस दिन बाद रिहा कर दिया, लेकिन प्रेमी के भाई प्रवेश गिरी को नहीं छोड़ा और 7 सिंतबर की रात में प्रवेश की बेरहमी से इतनी पिटाई लगाई कि प्रवेश ने तड़प-तड़प कर दम ही तोड़ दिया।

दरिंदगी की बात तो यह है कि प्रवेश जब तड़प रहा था, तब नशे में धुत पुलिस उसकी तड़प पर आनंद ले रही थी और जब वह मर गया, तो हजरतपुर थाने की पुलिस थाना छोड़ कर ही भाग गई। अगले दिन सुबह मूसाझाग, अलापुर और दातागंज कोतवाली की पुलिस तैनात की गई। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी खुलासा हो चुका है कि प्रवेश की मौत पुलिस की पिटाई से ही हुई है, साथ ही थानाध्यक्ष हरचरण सिंह यादव को निलंबित करते हुए उसके साथ सब-इन्स्पेक्टर बलवीर सिंह और लड़की के परिजनों सहित दस लोगों के विरुद्ध हत्या करने और हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने का मुकदमा दर्ज हो चुका है एवं एसपी सिटी मानपाल सिंह चौहान को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दलवीर सिंह यादव ने पूरे प्रकरण की जांच सौंपी है, लेकिन सवाल उठता है कि ऐसी जांच से क्या होगा, जिसमें पुलिस आम आदमी की तरह कार्रवाई नहीं कर रही? जो पुलिस कानून को ताक में रख कर प्रेमी के परिजनों का उत्पीड़न कर रही थी, वही पुलिस मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपियों को गिरफ्तार क्यूं नहीं कर रही? साफ़ है कि जांच के नाम पर घटना को दबा दिया जायेगा, इसलिए प्रवेश गिरी जैसे निर्दोष आगे भी मरते रहेंगे, साथ ही खागी पहन कर दरिंदे कानून को भी ठेंगा दिखाते रहेंगे।

इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद भयभीत मुन्ना गाँव नहीं आ पाया, क्योंकि उसे मौत के घाट उतार दिया जायेगा। मृतक के परिवार में गाँव छोड़ चुके भाई मुन्ना के अलावा और कोई सगा नहीं है, जिसका लाभ अभियुक्त उठा सकते हैं। मृतक के चचेरे भाई पटे गिरी को प्रवेश की हत्या के मुकदमे का वादी बनाया गया है, जिसे पुलिस कभी भी तोड़ सकती है। पुलिस और लड़की के परिजनों के विरुद्ध लिखे गए इस मुकदमे का दुखद अंत होने की ही संभावना है, क्योंकि अभी तक एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई है, जबकि अभियुक्त खुलेआम घूम रहे हैं। दर्दनाक घटना होने के बावजूद पुलिस की कार्यप्रणाली में कोई परिवर्तन नहीं आया है।

असलियत में प्रेमी युवक गिरी जाति का है, जिनकी संख्या क्षेत्र में कम है और आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं है, जबकि लड़की बहेलिया जाति की है, जिनकी संख्या ज्यादा है और अधिकाँश दबंग भी हैं और उन्हें नेताओं का भी सरंक्षण प्राप्त है। पुलिस की भूमिका सही रही होती, तो बालिग प्रेमी गाँव से भागते ही नहीं। प्रेमियों का निर्णय अब सही लगता है, क्योंकि खुद हत्या करने वाली पुलिस से कोई मदद की आशा कैसे कर सकता है?

बताया जाता है कटरी क्षेत्र में स्थित हजरतपुर थाने में अफसर इरादे से ही जाते हैं। वार्षिक मुआयने के अलावा अफसर पूरी-पूरी साल यहाँ देखने तक नहीं जाते, जिससे इस थाने में तैनात पुलिस पूरी तरह लापरवाह हो ही जाती है और जमकर मनमानी करती है। बदमाश बनने वाले अधिकाँश लड़के इसी क्षेत्र के होते हैं, जो पुलिस की बर्बरता के चलते ही हथियार उठाने को मजबूर हो जाते हैं। बताया जाता है कि इस इलाके में शराब के सरकारी ठेके चल ही नहीं पाते, क्योंकि खुलेआम कच्ची शराब का कारोबार होता है। सूत्र का कहना है कि लड़की के परिजनों के साथ पुलिस ने घटना वाली रात कच्ची शराब पी थी और नशा चढ़ने पर लड़की के परिजनों के सामने ही प्रवेश की बेरहमी से मार लगाई थी। सूत्र का यह भी कहना है कि लड़की के घर वालों ने दो दिन पूर्व जमीन बेची है और पुलिस को खूब पैसा खिला रहे हैं।

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