पाकिस्तान भी मिटा दोगे, तो जायेंगे कहाँ: आजम खां

पाकिस्तान भी मिटा दोगे, तो जायेंगे कहाँ: आजम खां

  • सचिवालय के अलावा और किसी बैंक में मेरा एकाउंट नहीं हैं
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आज़म खाँ
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आज़म खाँ

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव की हैसियत से आज़म खाँ ने आज फिर लिखित वक्तव्य जारी किया है, जिसमें नरेंद्र मोदी के साथ गिरिराज सिंह, प्रवीण तोगड़िया और महाराष्ट्र शिवसेना के नेता शिवराज को निशाना बनाया गया है। आजम खां के बयान को अक्षरशः नीचे दिया जा रहा है।

श्री गिरिराज सिंह, श्री प्रवीण तोगड़िया और महाराष्ट्र शिवसेना के नेता श्री शिवराज द्वारा जो विचार व्यक्त किया गया है, कि मुसलमान पाकिस्तान चलें जायें, मकान ख़ाली कर दें या छः महीने के अन्दर पाकिस्तान का नामोनिशान मिट जायेगा, ऐसे वक्तव्यों के सम्बंध में श्री नरेन्द्र मोदी जी का कहना है वह इनसे सहमत नहीं है। देश को तोड़ने वाले तथा धार्मिक वैमनस्यता की खाई को बड़ा करने वाले ऐसे राष्ट्र विरोधी बयानों की केवल निन्दा ही नहीं की जानी चाहिए, बल्कि सुधीजनों, धर्मनिरपेक्ष सियासी पार्टियों और देश से प्रेम करने वाले हर बुद्धिजीवी की ज़िम्मेदारी है कि वे इस पर गम्भीरता से विचार भी करें।  इन बयानात से एक सच सामने निकलकर आया है, जो यह पूरी तरह साबित करता है कि भाजपा और फाशिस्ट ताकतों का यही एजेण्डा है। जो बात श्री नरेन्द्र मोदी खुद नहीं कहना चाहते या कह नहीं सकते तो, उन लोगों से जो उनके हाथ-पैर कहे जाते हैं, उनसे इस प्रकार के बयान दिलवाकर, नया भारत कैसा होगा, यह बताना चाहते हैं। अपने इस छुपे हुये एजेण्डे में श्री नरेन्द्र मोदी जी को काफी हद तक कामयाबी भी मिली है।
फाशिस्टों में वह लोग जिन्हें श्री नरेन्द्र मोदी जी की सिखावन है, उनमें से एक कहता है कि मोदी विरोधी पाकिस्तान चले जायें, तो दूसरे का कहना है कि पाकिस्तान का नामोनिशान मिटा दिया जायेगा। इन हालात में पूरे देश को यह बताने की और एक सवाल खड़ा करने की आवष्यकता हो गयी है कि प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के विरोधियों को जब हिन्दुस्तान में रहने ही नहीं दिया जायेगा और पाकिस्तान का नामोनिशान बाक़ी नहीं छोड़ा जायेगा, तो वे जायेंगे कहाँ?
श्री गिरिराज जी ने तो यह भी कह डाला है कि वह आज़म ख़ाँ नहीं हो सकते। उनको यह जानना चाहिये कि नासमझी में ही सही लेकिन उन्होंने एक ज़िन्दा सच कह दिया है, क्योंकि वह हरगिज़ आज़म ख़ाँ नहीं हो सकते, और न बन सकते हैं, इसलिए कि राजनीति का इतना लम्बा इतिहास रखने वाले व्यक्ति का, जिसका विधानसभा के सचिवालय के अलावा दुनिया के किसी बैंक में दूसरा व्यक्तिगत एकाउण्ट नहीं हैं, जिसके दोस्त तो क्या दुष्मन भी यह जुर्रत नहीं कर सकते कि बेईमानी का एक छोटा सा इल्ज़ाम भी लगा सकें, गिरिराज जी न तो आप खुद उसकी मिसाल बन सकते हैं, न दूसरी कोई मिसाल ढूंढकर ला सकते हैं। मेरा 40 साल का बेदाग़ सियासी इतिहास उन तथाकथित देश भक्तों के लिये खुली चुनौती है, जो काला धन विदेशी बैंकों से बाहर लाने का ढोंग तो कर रहे हैं, मगर अपने गिरेबान में मुँह नहीं डालते कि उस धन में उनका खुद का कितना हिस्सा है।
गिरिराज जी के साथ-2 तमाम फाशिस्टों को यह जानना चाहिये कि हम तो आज भी उसी मकान के मालिक हैं, जिसमें कभी हमारे पूर्वज रहा करते थे, आज जो लोग हमसे यह कह रहे हैं कि हिन्दुस्तान छोड़कर पाकिस्तान चले जाओ, यही इस मुल्क के अस्ल गद्दार हैं।
गुजरात के श्री अली असगर जावेरी, जो एक सज्जन और सम्पन्न व्यक्ति हैं, उन्हें अपने ही मकान में घुसने से रोक दिया गया। क्या यही इंसाफ़ है? क्या फाशिस्ट ऐसा ही भारत बनाना चाहते हैं, जिसमें मालिक मकान के बाहर खड़ा रहे और अपराधी मालिक बनकर अन्दर बैठें। यह दुःखद है कि राजनीति ने धर्म की आड़ ले ली है और दो मज़हबों को आमने-सामने खड़ा कर दिया है, लेकिन इसका ज़िम्मेदार कौन है। वह भाजपाई नेता जो मुल्क की दूसरी सबसे बड़ी आबादी मुसलमानों को देश से बाहर का दुर्भाग्यपूर्ण रास्ता दिखाने की बात करता है, वह भूल गया कि यही सोच थी, जिसने मुल्क को 1947 में बांटा और यही विचारधारा थी, जिसने आज़ादी के बाद 60 बरसों में देश में नफ़रत पैदान करने, बढ़ाने और भाई को भाई से लड़ाने का काम अन्जाम दिया।
कई रोज़ से चर्चाये हैं और आम तौर पर लोगों का मानना है कि आर0एस0एस0 ने फ़िरक़ापरस्त मीडिया के माध्यम से, दौलत के ज़ोर पर, एक ऐसा फ़र्जी माहौल बनाने की कोशिस की है, जिसमें लोग यह महसूस करें कि मौजूदा चुनाव हमारी लोकतान्त्रिक व्यवस्था का आख़री चुनाव है। साज़िशों के इस माहौल में, जबकि देश को एक बार फिर बांटने की मुनज़्ज़म कोशिस की जा रही है, ऐसे में तमाम सेकुलर ताकतों को उन कमज़ोर, लेकिन वतनपरस्त हिन्दुस्तानियों के बारे में विचार करना होगा, जिनके बारे में सच्चर कमेटी की रिपोर्ट कहती है कि आज मुल्क में इनकी हालत दलितों से भी ज़्यादा बद्तर है। जब ऐसे ही दुःखी समाज को भाजपा देश में रहने नहीं देगी और आने वाले वक्त में पाकिस्तान रहेगा नहीं, यहां रहने भी न देंगे, जहां जा सकते हो, वह जमीन भी न रहे तो दुनिया के किसी देश के बारे में भाजपा और उसके नेता विचार करने के लिये तैयार हैं? बता सकेंगे कि वह मुसलमानों के लिये कौन सी ज़मीन तैयार करेंगे? बता सकेंगे कि अगर संविधान में संशोधन भी कर दें, तो क्या अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के तहत यह सम्भव होगा?
आज़ाद भारत में अपमान सहने वाले लोग अपमान की इस काली चादर को उतार फेंकना चाहते हैं। कारगिल से कन्या कुमारी तक माथे पर लगे हुये इस कलंक को कि वह आई0एस0आई0 के एजेण्ट हैं, देश के गद्दार हैं, पाकिस्तानी हैं, इस कलंक को खुरच कर हमेशा के लिये फेंक देना चाहते हैं। हमें भी क़ुर्बानियों का सिला मिलना चाहिये, मोहब्बतों का जवाब मोहब्बत ही होना चाहिये, इस देश को बचाने और बनाये रखने के लिये इसके सिवाय कोई रास्ता नहीं है।

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