परेशान लोगों की मंडलायुक्त से कार्रवाई की उम्मीद टूटी

परेशान लोगों की मंडलायुक्त से कार्रवाई की उम्मीद टूटी
  • पूरा कार्यक्रम निश्चित कर दो दिवसीय दौर पर आ रहे हैं मंडलायुक्त
  • व्यवस्था दुरुस्त दिखाने के लिए अफसरों के साथ जिलाधिकारी खुद जुटे
विकालागों के लिए बने शौचालय में लगा ताला और रास्ते में खड़ी साईकिल
विकालागों के लिए बने शौचालय में लगा ताला और रास्ते में खड़ी साईकिल

मण्डलायुक्त कल 25 सितंबर से बदायूं जनपद के दो दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान वह 24 सितम्बर को 10 बजे से 12.30 बजे तक विकास भवन स्थित सभा कक्ष में 23 विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा करने के बाद 12.30 से 3 बजे तक दो परियोजनाओं का निरीक्षण करेंगे। 4 बजे नगर पालिका परिषद बदायूं तथा 5 बजे तहसील सदर का निरीक्षण करेंगे। 25 सितम्बर को प्रातः 08 बजे जिला चिकित्सालय का निरीक्षण करने के बाद मण्डलायुक्त 10.30 से 01 बजे तक डा. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्रामों का निरीक्षण करने के साथ-साथ ग्राम सभा की बैठक भी लेंगे।
मंडलायुक्त का उक्त कार्यक्रम कई दिन पूर्व आ चुका है। जिलाधिकारी अपनी निगरानी में मंडलायुक्त को अच्छा-अच्छा दिखाने की तैयारी करा रहे हैं, ऐसे में मंडलायुक्त को बुरा दिखने की संभावना न के बराबर ही है। दो दिन के लिए विकास भवन और कचहरी परिसर साफ़ किया जा सकता है। दो दिन गेट पर सिपाही लगा कर फरियादी रोके जा सकते हैं। दो दिन रिश्वत के काम टाले जा सकते हैं। दो दिन अस्पताल में मरीजों को अच्छे से देखा जा सकता है, क्योंकि सब को पहले से ही पता है कि मंडलायुक्त आ रहे हैं और आकर क्या-क्या करेंगे, ऐसे में सवाल  उठता है कि ऐसे निरीक्षण से क्या कुछ बदलेगा?

दो दिवसीय दौरे के दौरान मंडलायुक्त अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कार्य करेंगे ही, ऐसे में कुछ सुझाव हैं और उम्मीद है कि एक नज़र इन पर भी डाल लें। विकास भवन परिसर में विकलांगों के लिए शौचालय का निर्माण कराया गया है, लेकिन उसमें हर समय ताला लटका रहता है और अंदर जाने वाले रास्ते में साईकिल व बाइक खड़ी रहती हैं, ऐसे में किसी विकलांग को आवश्यकता पड़ जाये, तो ताले की चाबी मांगने किस के पास जाये? विकास भवन परिसर में ही बनी कैंटीन का ठेका होता था, जिससे सरकार को राजस्व मिलता था और ग्राहकों को सही दाम में गुणवत्तायुक्त चीजें मिल जाती थीं, लेकिन पिछले पांच वर्षों से कैंटीन का टेंडर ही नहीं निकाला गया है, क्योंकि कैंटीन माफिया ने संबंधित अधिकारी-कर्मचारी से सेटिंग कर उसने प्राइवेट दुकान खोल रखी है, जिससे अधिकारियों के सामने ही लूट रहा है। इस सब के साथ यह भी देखना कि गाँवों की सफाई को नियुक्त किये गए सफाई कर्मचारी अधिकारियों और नेताओं के आवासों पर संबद्ध क्यूं हैं?

बंद पड़ी कैंटीन की भट्टियाँ भी तोड़ दी गई हैं
बंद पड़ी कैंटीन की भट्टियाँ भी तोड़ दी गई हैं

कलेक्ट्रेट में सब से पहले तो शस्त्र कार्यालय को ही देख लेना। इसे परचून की दुकान बना रखा है, इसके बाद हैसियत प्रमाण पत्र जारी करने वाले पटल पर जाकर रजिस्टर देखना न भूलना। ग़रीबों और आश्रितों को मिलने वाली धनराशि को लेने को भटकते पात्र मिल जायें, तो उनसे भी एक मिनट बात कर लेना। अस्पताल में मरीजों को विश्वास में लेकर बात कर ली, तो सब पता चल ही जायेगा, लेकिन जो मरीज नहीं बता सकते, वो यह है कि फार्मासिस्ट बीके शर्मा ने स्टोर में करोड़ों का घपला किया है, जिसका आरोप पत्र भी बन चुका है, लेकिन कारवाई आज तक नहीं हुई। आप चाहेंगे, तो यह कार्रवाई एक मिनट में हो सकती है। लोक निर्माण विभाग के कार्यालय जाना आपके कार्यक्रम में नहीं है, पर कहीं दूर नहीं जाना है। विकास भवन से कलेक्ट्रेट आते समय बीच में पड़ेगा। एक मिनट को गाड़ी के ब्रेक लगवा कर बांड रजिस्टर देख लेना कि अपडेट है या नहीं। रोड पर तो चलेंगे ही, इसलिए उनकी गुणवत्ता भी परख लें, तो यह भी जनहित में ही रहेगा और यह सब नहीं कर सकते, तो ऐसी गर्मी में बदायूं तक आने की परेशानी उठाने की भी क्या जरुरत है, वहीँ रजिस्टर मंगा कर मुआयने की रस्म पूरी की जा सकती है।

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