नेताओं पर एफआईआर से और बिगड़ सकते हैं हालात

नेताओं पर एफआईआर से और बिगड़ सकते हैं हालात
  • 28 की मौत, 40 घायल, 90 गिरफ्तार
  • डीआईजी और कमिश्नर पर गिरी गाज
नेताओं पर एफआईआर से और बिगड़ सकते हैं हालात
नेताओं पर एफआईआर से और बिगड़ सकते हैं हालात

उत्तर प्रदेश के जिला मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक दंगों की आग में अब तक 28 लोगों की मौत हो चुकी है और 40 से ज्यादा घायल बताये जा रहे हैं। सरकार ने आज डीआईजी और मंडलायुक्त को हटा दिया है, साथ ही एक थानाध्यक्ष को निलंबित भी किया है, इसके अलावा भाजपा और कांग्रेस सहित कई प्रमुख नेताओं के विरुद्ध मुकदमा भी दर्ज किया है, जिसे स्थानीय लोग एकतरफा कार्रवाई करार दे रहे हैं, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस के अपर महानिदेशक ने बताया कि मुजफ्फरनगर के डीआईजी डी. सी. मिश्रा और सहारनपुर के ‌मंडलायुक्त एस. के. श्रीवास्तव को हटा दिया गया है। उनकी जगह अशोक मुथा जैन मुजफ्फरनगर के नये डीआईजी और भुवनेश कुमार सहारनपुर के नये मंडलायुक्त होंगे। सब से ज्यादा हिंसाग्रस्त क्षेत्र थाना फुगना के थानाध्यक्ष ओमवीर सिंह को निलंबित कर दिया गया है। अरुण कुमार के अनुसार 90 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, साथ ही दंगा प्रभावित इलाकों में तीन थाना क्षेत्रों के शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं।

उधर भाजपा विधायक दल के नेता हुकुम सिंह, विधायक सुरेश राणा, भारतेंदु, संगीत सोम और कांग्रेस के पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक के साथ अन्य तमाम लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने से स्थानीय लोग नाराज हैं। अधिकाँश लोग इस कार्रवाई को एकतरफा कार्रवाई करार दे रहे हैं। आज भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने मुजफ्फनगर जाने का भी प्रयास किया, लेकिन उन्हें पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया।

राज्यपाल ने सरकार को दोषी माना

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बीएल जोशी ने गृह मंत्रालय को भेजी को भेजी अपनी रिपोर्ट में सीधे सरकार को ही दोषी माना है। उनका कहना है कि सरकार ने स्थिति को काबू करने में देरी की, जबकि हालात शुरू में ही काबू किये जा सकते थे, इसके अलावा विपक्ष के नेताओं ने सपा सरकार को बर्खास्त करने की मांग की है।

Leave a Reply