दुःख जताने की जगह दंगों पर श्रेय लेने का एक और प्रयास

दुःख जताने की जगह दंगों पर श्रेय लेने का एक और प्रयास
दुःख जताने की जगह दंगों पर श्रेय लेने का एक और प्रयास
दुःख जताने की जगह दंगों पर श्रेय लेने का एक और प्रयास

उत्तर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर तो कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है, लेकिन दंगों की भयावह यादों को ताज़ा करते हुए खुद का गुणगान अवश्य किया है। मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर की गई सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर दुःख व्यक्त करने की जगह उत्तर प्रदेश सरकार चुनाव में लाभ लेने का प्रयास करती नज़र आ रही है।इससे पहले भी सरकार दंगों में लोगों की मदद करने के नाम पर खुद का गुणगान कराती रही है।

सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य सरकार ने मुजफ्फरनगर तथा इसके इर्द-गिर्द के जनपदों में घटित हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना के प्रभावितों को गम्भीरता व तत्परता से राहत तथा आर्थिक मदद पहुंचाने के सारे प्रयास किए। इन प्रयासों के फलस्वरूप इस घटना पर तत्काल काबू भी पाया गया तथा घटना के प्रभावित परिवारों को लगभग एक अरब चार करोड़ रुपये की मदद पहुंचायी गई। यही नहीं, सरकार द्वारा घटना में मृत व्यक्तियों के 58 परिजनों को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। पीड़ित परिवारों को अन्य प्रकार की मदद भी उपलब्ध करायी गई। घटना में घायल लोगों को पेंशन की सुविधा भी उपलब्ध करायी गई।

ज्ञातव्य है कि 27 अगस्त, 2013 को मुजफ्फरनगर जिले में यह दुःखद घटना घटित हुई। जिसके बाद 7 सितम्बर, 2013 को अचानक साम्प्रदायिक हिंसा की घटनायें इस क्षेत्र में होने लगीं। राज्य सरकार ने जिला प्रशासन को इन घटनाओं को तत्काल नियंत्रित करने के आदेश दिये तथा असामाजिक तत्वों से सख्ती से निपटने के निर्देश भी दिये।

विज्ञप्ति के अनुसार घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए मुजफ्फरनगर के तीन थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाया गया। इन घटनाओं पर नियंत्रण के लिए शासन द्वारा तत्काल सेना की सहायता ली गई और बड़ी संख्या में केन्द्रीय अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती कर अगले दिन 8 सितम्बर, 2013 तक स्थिति पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त कर लिया गया। 9 सितम्बर के उपरान्त छुटपुट घटनाओं को छोड़कर साम्प्रदायिक हिंसा की कोई बड़ी घटना नहीं हुई।
इन साम्प्रदायिक घटनाओं में लिप्त अपराधिक तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही करते हुए अब तक कुल 295 अभियुक्तों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। 38 अभियुक्त हाजिर अदालत हुये हैं। कानून व्यवस्था बनाये रखने हेतु धारा 107/116 (3) सीआरपीसी के अन्तर्गत कुल 7410 व्यक्तियों को मुचलके पर पाबन्द किया गया। घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए 3 हजार से अधिक लोगों को धारा 151 द0प्र0स0 के अन्तर्गत निरुद्ध किया गया। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत 11 व्यक्तियों के विरुद्ध निरोधात्मक कार्यवाही की गयी और सुरक्षा की दृष्टि से शस्त्र लाइसेंसो का निरस्तीकरण व शस्त्र जब्त करने की कार्यवाही की गयी।
जिले के ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में गणमान्य व्यक्तियों, प्रधानों, पूर्व प्रधानों एवं विभिन्न समुदायों के व्यक्तियों आदि का सहयोग लेकर शांति समितियों की बैठकों के आयोजन का सिलसिला जारी है। इन बैठकों के माध्यम से सभी से अपने-अपने गांव व क्षेत्र में शांति व आपसी सौहार्द को कायम रखने की अपील की गयी।
घटना की गम्भीरता को देखते हुए शासन द्वारा पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हेतु सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति श्री विष्णु सहाय की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग 9 सितम्बर, 2013 को गठित किया जा चुका है।
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