डॉ कैप्टन लक्ष्मी सहगल: एक ऐसा नाम जिसने अपने जीवन के हर पड़ाव को एक नई पहचान दी

डॉ कैप्टन लक्ष्मी सहगल: एक ऐसा नाम जिसने अपने जीवन के हर पड़ाव को एक नई पहचान दी

डॉ कैप्टन लक्ष्मी सहगल, एक ऐसा नाम जिसने अपने जीवन के हर पड़ाव को एक नई पहचान दी। जहां लोगों का पूरा जीवन एक पहचान ढूंढने में बीत जाता है वहीं 24 अक्तूबर 1914 को जन्मी इस महान हस्ती का हर पल एक नई पहचान लिए था। पहचान भी ऐसी जो लाखों को अचंभित कर दे, और हजारों उसका अनुकरण करने पर मजबूर हो जाएँ। कैप्टन लक्ष्मी के पिता मद्रास के एक जाने-माने वकील थे और उनकी माताजी एक समाज सेवी और स्वतन्त्रता सेनानी। उनका बचपन सामाजिक सरोकारों के लिए चिंतित और कार्यरत लोगों के बीच गुज़रा और इसका स्पष्ट  प्रभाव उनके जीवन में भी दिखा। उनकी परवरिश एक बहुत ही सुलझे हुए और ऐसे आधुनिक वातावरण में हुई जो भारत में लड़कियों के लिए आज भी दुर्लभ है। उन्होने सन 1938 में एमबीबीएस की डिग्री ली। पढ़ाई के दौरान और उसके बाद तक उन पर सरोजिनी नायडू की बहन सुहासिनी का बहुत प्रभाव रहा जो जातिवाद के खिलाफ लड़ रही थी। पढ़ाई के बाद कुछ वर्ष भारत में सेवा करने के बाद 26 साल की यह कमउम्र डॉक्टर 1943 में सिंगापुर में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस से मिलीं और उसके बाद इनके जीवन की दिशा ही बदल गयी। इन्होंने नेताजी की सेना की सदस्यता ली। इन्हें कैप्टेन बनाया गया और इसके बाद डॉ लक्ष्मी सहगल डॉ कैप्टन लक्ष्मी सहगल बन गईं। यह पदनाम उनके जीवन के आखिरी क्षण तक उनके साथ रहा और आगे भी रहेगा। 2002 में कैप्टन लक्ष्मी राष्ट्रपति चुनाव लड़ीं जिसमें डॉ अब्दुल कलाम विजयी घोषित हुए। डॉ लक्ष्मी ने  ईमानदारी से माना कि उन्हें जीतने की ज़रा भी उम्मीद नहीं थी पर फिर भी उनका जुझारूपन ज्यों का त्यों था। वे चुनाव के दौरान बड़ी ही मेहनत से घूम-घूम कर लोगों में जागरूकता का संदेश फैलाती रहीं। उनके जीवन की सफलता की सबसे बड़ी पहचान ही यह  है कि उन्होने जो भी अपनाया उसे कभी छोड़ा नहीं और उस पर कभी रुकी भी नहीं। डॉ बनीं तो आखिरी वक्त तक उन्हें मरीज देखते पाया गया। नेताजी की सेना में कैप्टन बनीं तो वह आज तक उनके नाम और जीवन से जुड़ा है। इतना सब होने पर भी उनमें गर्व लेशमात्र नहीं था। जो उनसे मिलता, बस उनका ही होकर रह जाता। 92 साल की आयु में भी उन्हें दिखाने को मरीज आतुर रहते। वे जीवन भर खुशियाँ ही बांटती रहीं। एक और उनमें देवी लक्ष्मी सा सुख और सौभाग्य था तो दूसरी ओर झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई सा साहस। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि डॉ कैप्टन लक्ष्मी सहगल जैसी नारियों के कारण ही इस देश में नारियों की पूजा होती है। देवी! तुम्हारी सदा ही जय हो।

 

 

 

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