डीएम की लापरवाही पर मासूमों पर शुरू हुई राजनीति

डीएम की लापरवाही पर मासूमों पर शुरू हुई राजनीति
  • बच्चे स्वस्थ होने के बावजूद बसपा विधायक ने घटना को बेवजह दिया तूल
    विधान परिषद सदस्य बनवारी सिंह यादव ने अस्पताल में बच्चों को बांटे फल
जिला अस्पताल में स्वस्थ बच्चों को फल बांटते सपा जिलाध्यक्ष व एमएलसी बनवारी सिंह यादव
जिला अस्पताल में स्वस्थ बच्चों को फल बांटते सपा जिलाध्यक्ष व एमएलसी बनवारी सिंह यादव

बदायूं जिले में दातागंज तहसील क्षेत्र के गाँव अगोड़ी स्थित प्राथमिक विद्यालय के बच्चे मिड्डे मील के रूप में खीर खाकर आंशिक रूप से बीमार हो गए थे, लेकिन जिलाधिकारी की लापरवाही और नेताओं के षड्यंत्र के चलते घटना पुनः चर्चा में आ गई है। बसपा विधायक ने देर रात कुछ बच्चों को जिला अस्पताल लाकर एडमिट करा दिया, तो आज सुबह जिला प्रशासन के साथ सपा नेता भी अस्पताल में जमे रहे। विधान परिषद सदस्य व् सपा जिलाध्यक्ष बनवारी सिंह यादव, शेखूपुर के विधायक आशीष यादव, दातागंज के पूर्व विधायक प्रेम पाल सिंह यादव एवं सुरेश पाल सिंह चौहान ने जिला चिकित्सालय पहुँच कर भर्ती बच्चों का हाल चाल जाना और उनको फल वितरित किए।
जिलाधिकारी ने बच्चों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने हेतु सीएमएस को निर्देश दिए, साथ ही बरेली के अपर निदेशक स्वास्थ्य ने अपने साथ दो चाइल्ड स्पेशलिस्ट को लाकर भर्ती बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया है। परीक्षण में सभी बच्चे स्वस्थ पाए गए हैं। जिलाधिकारी ने सीएमएस को यह भी निर्देश दिए कि यदि कोई अभिभावक अपने बच्चों को बिना चिकित्सक की मर्जी के अस्पताल से डिस्चार्ज कराना चाहे, तो उससे लिखित रूप में अवश्य ले लिया जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि सीएचसी दातागंज में भर्ती बच्चों को डिस्चार्ज करने के मामले में सम्बंधित एमओआईसी से स्पष्टीकरण लिया जा रहा है।
इसके बाद जिलाधिकारी चिकित्सालय स्थित ब्लड बैंक जा धमके और वहां पर घोर अनियमितता पाए जाने पर जिलाधिकारी ने तमाम अभिलेख अपने कब्जे में लेते हुए ब्लड बैंक के लैब-टेक्नीशियन पीके श्रीवास्तव को निलंवित कराने हेतु उनके उच्चाधिकारी को संस्तुति करने को कहा है। जिलाधिकारी ने पाया कि पंजिका में  डाक्टर तथा टेक्नीशियन के कहीं पर हस्ताक्षर नहीं हैं। जिलाधिकारी ने इसको फर्जीबाड़ा मानते हुए अभिलेखों को जब्त कर लिया है। जिलाधिकारी ने ब्लड बैंक इंचार्ज डाक्टर को भी कड़ी चेतावनी देते हुए निर्देश दिए हैं कि रक्तदाता तथा रक्त लेने सम्बंधी पूरा विवरण दीवार पर पेंट कराया जाए। ब्लड बैंक में मात्र 16 बोतल ब्लड स्टाक में पाया तो गया लेकिन अभिलेखों का रखरखाव उचित न पाए जाने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई है। इस अवसर अपर जिलाधिकारी प्रशासन मनोज कुमार, नगर मजिस्ट्रेट निधी श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी आर के शर्मा, सीएमएस जीएस त्रिपाठी,  जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कृपा शंकर वर्मा  सहित अन्य चिकित्सालय के चिकित्सकगण मौजूद रहे।
उल्लेखनीय है कि दो दिन पूर्व बच्चों का स्वास्थ्य आंशिक रूप से बिगड़ गया था, लेकिन मीडिया के भय के चलते समूचा प्रशासनिक अमला मौके पर तत्काल पहुँच गया और वाहवाही लूटने के लिए तमाम दिशा-निर्देश दिए गये। बच्चों की हालत वाकई खराब हुई होती, तो संभाले नहीं संभलती, पर शासन की नज़र में बेहतर दिखने के प्रयास में जिलाधिकारी ने बच्चों को एडमिट करा दिया और मीडिया के आने के बाद सब के सब भूल गए। अगले दिन सुबह किसी ने यह अफवाह फैला दी कि बच्चों की हालत और खराब होने की बात कहने से सरकार पैसा देगी, यह सुन कर अभिभावकों के मन में लालच आ गया और दातागंज के स्वास्थ्य केंद्र से अपने बच्चों को लेकर बसपा विधायक के साथ जिला अस्पताल आ गए और रात में करीब एक बजे जिला अस्पताल में हंगामा काटने लगे, जिस पर पुनः समूचा प्रशासन हिल गया, जबकि बच्चों को किसी तरह की कोई समस्या ही नहीं है, लेकिन उनके अभिभावक जबरन ऑंखें बंद कर लेटने को जोर देते देखे गए। असलियत में यह सब जिलाधिकारी की वजह से ही हुआ। उन्हें बच्चे एडमिट ही नहीं कराने थे। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें उसी दिन घर भेज दिया होता, तो कुछ न होता, साथ ही अगर एडमिट कराये, तो प्रशासन की ओर से जिम्मेदार अफसर को भी तैनात करना चाहिए था, पर ऐसा नहीं किया, जिससे लालच की अफवाह पर अभिभावक बच्चों को अस्पताल से उठा कर बदायूं ले आये। प्रशासन ने सतर्कता बरती होती, तो विपक्षियों को राजनीति करने अवसर न मिलता।

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