जिला जज और अपर जिला जज-6 का बहिष्कार

जिला जज और अपर जिला जज-6 का बहिष्कार

– बार के निर्णय के विरुद्ध एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने किया कार्य

जिला जज और अपर जिला जज-6 का बहिष्कार
जिला जज और अपर जिला जज-6 का बहिष्कार

बदायूं में नवनिर्वाचित बार एसोसियशन और जजों के बीच दूरियां इस कदर बढ़ गई हैं कि बार ने जिला जज और कोर्ट संख्या-6 का बहिष्कार कर दिया है, वहीं सिर्फ दो अदालतों के बहिष्कार को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, साथ ही एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने जिला बार के निर्णय के विरुद्ध जाकर जिला जज की अदालत में कार्य किया, जिससे बार और वरिष्ठ अधिवक्ता के बीच पत्राचार की जंग छिड़ गई है।

बदायूं में हाल ही में जिला बार एसोसियशन का गठन हुआ है और नवनिर्वाचित बार ने सब से पहला निर्णय बहिष्कार का लिया है। वकीलों का कहना है कि धारा 156 (3) और जमानतों के प्रार्थना पत्रों पर लंबी तारीखें दी जा रही हैं, जिससे वादकारियों को बेवजह परेशान होना पड़ रहा है। वकीलों के इस तर्क पर विश्वास करें, तो वकील सही भी लगते हैं, लेकिन सवाल उठता है कि वकीलों ने सिर्फ दो अदालतों का ही बहिष्कार क्यूं किया?

जिला जज जिम्मेदार होते हैं, इसलिए सिर्फ उनके ही कोर्ट का बहिष्कार होता, तो सवाल नहीं उठता, साथ ही सभी अदालतों का बहिष्कार किया जाता, तो भी सवाल नहीं उठते, लेकिन जिला जज के साथ कोर्ट संख्या-6 के बहिष्कार की वजह गले नहीं उतर रही। सूत्रों का कहना है कि नवनिर्वाचित बार पदाधिकारियों ने दो दिन पूर्व जिला जज से मिलने का समय माँगा था, लेकिन समय निश्चित होने के बावजूद जिला जज किसी कारण मिल नहीं पाये, इसलिए वकील खुन्नस निकाल रहे हैं, वहीं कोर्ट संख्या-6 में तेजी से मुकदमे सुने जा रहे हैं और बलात्कार व हत्या के अधिकाँश मुकदमों में 6 नंबर कोर्ट से सज़ा ही सुनाई जा रही है, जिससे कोर्ट संख्या-6 का खौफ बैठ गया है। कोर्ट संख्या-6 में मुकदमा टालने की वकीलों की कोई युक्ति काम नहीं आ रही, इसके अलावा हत्या और बलात्कार के मुकदमे जिला जज कोर्ट संख्या-6 में ही भेज रहे हैं, इसलिए वकीलों ने जान कर इन दोनों को निशाना बनाया है।

उधर बार के निर्णय के विरुद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता मौलाना नसरुद्दीन ने आज जिला जज की अदालत में कार्य किया, जिससे रुष्ट बार ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। तीन दिन का समय होने के बावजूद मौलाना ने भी आज ही जवाब दे दिया कि उन्हें वकालत करने से कोई नहीं रोक सकता, जिससे बहिष्कार को लेकर वकीलों के बीच भी गुटबाजी शुरू हो गई है।

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