चौरासी कोसी यात्रा निकालने वाले हिंदुओं के दुश्मन

चौरासी कोसी यात्रा निकालने वाले हिंदुओं के दुश्मन

तथा-कथित संतों का समाज के सामने जिस तरह खुलासा हो रहा है, उससे तो यही लग रहा है कि शातिर किस्म के कुछ लोगों ने चंबल में न जाकर धर्म के नाम पर आश्रम बना लिए हैं और उनमें वह सब भी कर रहे हैं, जो चंबल में रह कर नहीं कर पाते। एक तरह से देखा जाये, तो यह तथा-कथित संत चंबल के डकैतों से बड़े डकैत हैं, क्योंकि हर डकैत लूटने के लिए ही चंबल की शरण नहीं लेता, तमाम डकैत ऐसे भी हैं, जिन्होंने शोषण और सामंती व्यवस्था के विरुद्ध हथियार उठाये हैं, लेकिन कथित संत लोगों के विश्वास के सहारे ऐसे घृणित कुकर्मों को अंजाम दे रहे हैं कि इनके इंसान होने पर ही शक होने लगता है।

बीपी गौतम
बीपी गौतम

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर निवासी, एक सभ्रांत परिवार की नाबालिग छात्रा के साथ लाखों-करोड़ों लोगों की आस्था का कत्ल करने के चलते कथित धर्मगुरु आसाराम बापू दुनिया भर में कुख्यात हो गए हैं। आसाराम के शब्दों को भगवान के शब्द मानने वाले और उन शब्दों का अक्षरशः पालन करने वाले अनुयायी की बेटी को आसाराम ने जिन्दा लाश बना दिया है, इसके बावजूद आसाराम और उनके प्रवक्ता बेशर्मी के साथ इसे कांग्रेस और ईसाई मिशनरियों का षड्यंत्र बता कर पीड़ित को ही कटघरे में खड़ा कर रहे हैं, जो आसाराम के कुकर्म से भी बड़ा अपराध है। कुकर्म के बाद बचाव करने में यह कथित संत और इनके जैसे इनके अनुयायी धर्म की ही आड़ लेते हैं, जिससे कथित संतों के साथ नई पीढ़ी धर्म से भी विमुख होती जा रही है, जिसका दुष्प्रभाव संपूर्ण समाज पर पड़ रहा है।

धर्म की आड़ में पाप और अपराध करने वाले आसाराम पहले शख्स नहीं हैं। आसाराम से पहले भी यह सब होता रहा है। अधर्मियों की सूची काफी लंबी है, जिनमें चिन्मयानंद के नाम से पहचान बना चुके कृष्णपाल सिंह का नाम सब से ऊपर आता है। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित एक अशिक्षित और गरीब परिवार में जन्मा चिन्मयानंद नाम का यह शख्स दस-ग्यारह वर्ष की आयु में ही कुकर्म कर घर से भाग गया था। वर्षों तक फुटपाथों पर रह कर जहाँ-तहां मांगकर खाता रहा और इस बीच किसी तरह वृन्दावन आ गया। यहाँ के एक आश्रम में संत कृष्णानंद के कपड़े धोने का काम मिला, जिसके बदले रहने को ठिकाना और खाने को मुफ्त में भोजन मिल जाता था, इससे बेहतर इसके लिए और क्या हो सकता था, सो वृन्दावन में ही रहने लगा। कृष्णाननंद को दान में कपड़े मिलते, वह उन कपड़ों में से ही इसे भी कुछ कपड़े दे देते, जिससे यह भी गेरुआ कपड़े पहनने लगा। वृन्दावन के पावन वातावरण में रह कर यह कई अच्छी बातें भी सीख गया और लगभग सत्तर के दशक में स्वामी धर्मानंद के संपर्क में गया। यहाँ इसे गौशाला की देखभाल करने का काम मिला। स्वामी धर्मानंद स्वभाव से बड़े ही भोले संत बताये जाते थे, जिससे उनके अच्छे स्वभाव का दुरूपयोग कर ऋषिकेश के स्वामी शुकदेवानंद ट्रस्ट और शाहजहांपुर के मुमुक्षु आश्रम ट्रस्ट पर कब्जा जमा लिया। इन संस्थाओं की प्रतिष्ठा का अपनी शातिर बुद्धि से दुरूपयोग कर देश के गृह राज्यमंत्री के पद तक पहुँच गया। अवसर का लाभ लेने में यह माहिर बताया जाता है, जिससे इसका पद-प्रतिष्ठा और सम्मान बढ़ता गया और इस सबकी आड़ में ही यह नाबालिग लड़कियों को छलता रहा। सुन्दर और नाबालिग लड़कियों को अपने जाल में फंसाने की इसे बीमारी बताई जाती है। अब तक यह तमाम लड़कियों का यौन शोषण कर चुका है, लेकिन इसके भय के चलते अधिकाँश लड़कियां चुप ही रह जाती हैं, साथ ही ऐसी तमाम लड़कियों की शादी अपने यहाँ काम करने वाले लड़कों से ही करा चुका है और उन्हें नौकरी-घर आदि दे चुका है, जिससे पीड़ित लड़कियां मौन हैं। कथित संत चिन्मयानंद ने ऐसे ही दिल्ली की एक लड़की को अपने जाल में फांसा। उस लड़की के सामने इसका असली चेहरा उजागर हो गया, तो उस लड़की ने इसके विरुद्ध शाहजहांपुर की सदर कोतवाली में 1 नवंबर 2011 को मुकदमा दर्ज करा दिया। लड़की का आरोप पुलिस की विवेचना में भी सिद्ध हो चुका है, लेकिन कथित संत चिन्मयानंद बेशर्मी की हद पार करते हुए आज तक स्वयं को निर्दोष ही बता रहा है।

इसी तरह आंध्र प्रदेश में पुट्टपर्थी के सत्य साईं बाबा के ऊपर भी यौन शोषण करने के आरोप लगते रहे हैं। उनके आश्रम में वैश्यावृति होने तक की खबरें सामने आती रही हैं, पर सत्य साईं और उनके अनुयायी इसे विरोधियों की साजिश कहकर आरोपों को खारिज करते रहे हैं, इसके अलावा सत्य साईं बाबा पर हवाला, सेवा परियोजनाओं में घपला और हत्या के भी आरोप लगे, लेकिन इस सब से बेपरवाह सत्य साईं खुद को शिरडी के साईं बाबा का अवतार बता कर भावनाओं का दुरूपयोग करते रहे। सत्य साईं बाबा की मृत्यु हो चुकी है। इस क्रम में दिल्‍ली में पकड़ा गया शिव मूरत  द्विवेदी उर्फ़ इच्‍छाधारी  बाबा उर्फ कथित संत भीमानंद महाराज चित्रकूट वाले का नाम भी अपराध के पन्नों में काले अक्षरों में लिखा दूर से ही दिख जाता है। यह प्रवचन की आड़ में पूरा सेक्‍स रैकेट चलाता था, इसे मकोका के तहत गिरफ्तार भी किया गया। पुलिस को जांच के दौरान पता चला था कि यह स्वयं-भू संत इच्छाधारी बाबा बनने से पहले नंबरी छिछोरा था। इसी कड़ी में सिरसा स्थित हाई-प्रोफाइल डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह का भी नाम आता है। इस पर भी रेप का आरोप लगा चुका है, साथ ही महिला अनुयायियों के यौन शोषण के साथ एक पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और डेरा के पूर्व प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या का भी आरोप लगा है। इस पर सितंबर, 2008 में डेरे की एक साध्वी ने यौन शोषण का आरोप लगाया था, इस मामले में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश की अदालत में राम रहीम पर धारा 376, 506 और 509 के अंतर्गत आरोप तय हो चुके हैं। कथित संतों की दुनिया में सेक्स गुरु के नाम से कुख्यात दक्षिण का कथित धर्मगुरु स्वामी नित्यानंद भी यौन शोषण के आरोपों के घेरे में है और जेल भी जा चुका है। 2 मार्च, 2010 को एक न्यूज चैनल पर एक तमिल अभिनेत्री के साथ आपत्तिजनक अवस्था में वीडियो दिखाये जाने के बाद नित्यानंद कुख्यात हो गया था, जिसके बाद यह भागता रहा, लेकिन बंगलूरू पुलिस ने हिमाचल प्रदेश से गिरफ्तार कर इसे जेल भेज दिया था। डेढ़ महीने से अधिक समय जेल में रहने के बाद नित्यानंद जमानत पर रिहा हो गया। इस कुख्यात नित्यानंद पर एक अमेरिकी महिला के अलावा नित्यानंद का ही एक पुरुष अनुयायी भी यौन उत्पीड़न का आरोप लगा चुका है, जिसमें मुकदमा भी दर्ज किया गया और इसका आश्रम के रूप में चलने वाला सेक्स का अड्डा पुलिस ने बंद करा दिया, पर धर्म के नाम पर इसका धंधा आज भी निरंतर चल रहा है। यह तो कुछ ही नाम हैं और ऐसे कथित संतों के कुकर्मों से अपराध की किताब के पन्ने भरे पड़े हैं, लेकिन इससे भी बड़े दुर्भाग्य की बात यह है कि ऐसे सभी कथित संतों का धर्म के नाम पर धंधा आज भी जारी है। असलियत में इन लोगों की शक्ति धर्मभीरू समाज ही है, जिसकी सोच अभी नहीं बदल पा रही है। इन कथित संतों का क़ानून भी कुछ नहीं कर सकता, क्योंकि इनकी दुकान चलाने वाले धर्मभीरू ग्राहकों की संख्या में कमी नहीं आती और जिस दिन आम आदमी की सोच इन कथित संतों के प्रति बदल जायेगी, उस दिन यह स्वतः ही मिट जायेंगे।

फिलहाल बलात्कारों के आरोपों से घिरे कथित संतों और हिन्दुओं के सम्मान की प्रतिष्ठा का सवाल बताई जा रही चौरासी कोसी यात्रा के मुद्दे राष्ट्रीय स्तर पर बवाल किये हुए हैं, जिससे सवाल उठता है कि चौरासी कोसी यात्रा ज्यादा जरुरी है या सनातन संस्कृति को बदनाम करने वाले इन कथित संतों का बहिष्कार। चौरासी कोसी यात्रा की जगह हिन्दुओं में व्याप्त कुरीतियों और भ्रांतियों को लेकर जागरूकता अभियान चलाना हिन्दुओं के ज्यादा हित में है। चिन्मयानंदों, आसारामों, नित्यानंदों, भीमानंदों और राम रहीमों के कुकृत्यों को नज़र अंदाज़ कर चौरासी कोसी यात्रा निकालने वाले, हिन्दुओं के शुभचिंतक नहीं, बल्कि दुश्मन हैं, साथ ही इन सब का बचाव करने वाले इनसे भी बड़े अपराधी और इनसे भी बड़े पापी।

Leave a Reply