चेतना के दावे से प्रतिद्वंदीयों की उड़ी नींद

चेतना के दावे से प्रतिद्वंदीयों की उड़ी नींद

 

लोकसभा चुनाव में अभी भले ही समय शेष है लेकिन समाजवादी पार्टी ने अंदरखाने तैयारियां शुरू कर दी हैं। बरेली जनपद के आंवला लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी में टिकट पाने के लिये चेतना सिंह उर्फ संजू यादव ने दावेदारी पेश कर प्रतिद्वंदीयों के होश उड़ा दिये हैं। हालांकि गुटबंदी के चलते उन्हें टिकट मिलने के आसार कम ही हैं लेकिन अगर उन्हें पार्टी ने चुनाव लड़ने का मौका दे दिया तो वह विपक्षी पार्टीयों के प्रत्याशियों पर भारी अवश्य पड़ सकती हैं।

स्वर्गीय राजेश्वर सिंह यादव की राजनैतिक कर्मभूमि बदायूं ही रहा है। उनके समस्त राजनैतिक दलों के नेताओं से बड़े ही मधुर संबंध रहे। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से भी उनके नजदीकी संबंध थे। सपा सुप्रीमो के भतीजे धर्मेन्द्र यादव बदायूं लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने आए तो पारिवारिक सम्बन्धों के कारण ही उन्होने रहने के लिए नरेश प्रताप सिंह का आवास ही चुना। स्वर्गीय ससुर के सम्बन्धों का फल चेतना सिंह यादव को मिलता रहा है। वह तीन बार बदायूं जिला पंचायत की अध्यक्ष रह चुकी हैं लेकिन पिछले चुनाव में उन्हें पार्टी की गुटबंदी और डीपी यादव की दबंगई के कारण अध्यक्ष की कुर्सी से हाथ धोना पड़ा। पिछले चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर धनबली व बाहुबली  डीपी की सलहज पूनम यादव को बसपा ने टिकट दिया था जो विजयी घोषित की गईं। चेतना सिंह यादव पर पूनव से मिलीभगत का आरोप लगा और उन्हें व उनके पति नरेश प्रताप सिंह को समाजवादी पार्टी से निलंबित कर दिया गया साथ ही सांसद धर्मेन्द्र यादव ने उनका आवास भी छोड़ दिया। विधानसभा चुनाव से पूर्व आजम खान के साथ बदायूं के सदर विधायक आबिद रज़ा की समाजवादी पार्टी में वापसी हुई तो आबिद रज़ा ने पैरवी कर नरेश प्रताप सिंह और चेतना सिंह का निलंबन समाप्त करा दिया लेकिन हाई प्रोफाइल परिवार से संबंध होने के कारण चेतना सिंह यादव और नरेश प्रताप सिंह हाल ही के कुछ वर्षों में करोड़पति हुए सपा नेताओं को रास नहीं आते। ऐसे ही नेताओं की कूटनीतिक चाल के कारण नरेश-चेतना को जिला पंचायत चुनाव में बलि का बकरा बनाया गया था। चापलूसी के दौर में नरेश प्रताप सिंह और चेतना सिंह सामंजस्य नहीं बैठा पाते इसलिए वह पिछली बार मात भी खा चुके हैं। अब देखना यह है कि आंवला लोकसभा क्षेत्र से टिकट पाने के लिये वह अपने राजसी व्यवहार में कुछ परिवर्तन ला पाते हैं या नहीं। यह निश्चित है कि चेतना सिंह यादव को समाजवादी पार्टी ने टिकट दे दिया तो वह बाकी सभी प्रत्याशियों के दांत खट्टे कर देंगी। उनके अलावा बरेली के जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव व पूर्व प्रत्याशी धर्मेन्द्र कश्यप के साथ लगभग दस लोगों ने टिकट के लिए दावेदारी पेश की है।

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