गंगा किनारे कर्मकांड न करें संत: खंडूरी

गंगा किनारे कर्मकांड न करें संत: खंडूरी

 

गंगा किनारे कर्मकांड न करें संत: खंडूरी

भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अध्यक्ष व सांसद कर्ण सिंह का कहना है कि सरकार सिर्फ पैसे खर्च कर गंगा को निर्मल करने का लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकती, वहीं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडरी ने धर्मगुरुओं को गंगा किनारे धार्मिक कर्मकांड को रोकने की चुनौती भी दी।

गंगा को बचाने के सरकारी प्रयासों की समीक्षा के लिए हुए सम्मेलन में कर्ण सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से वादा किया है कि 2020 तक गंगा को प्रदूषण मुक्त कर दिया जाएगा। सरकार प्रयास भी कर रही है, हजारों करोड़ खर्च हो चुके हैं, इसके बावजूद गंगा की स्थिति नहीं सुधरी है, इसलिए गंगा को प्रदूषण मुक्त करने का सरकारी वादा हास्यास्पद लगता है। गंगा को प्रदूषणमुक्त करने के लिए समग्र रूप से विचार किया जाए। गंगा सेवा मिशन के अध्यक्ष स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि  जब तक गंगा को सिर्फ संसाधन समझा जाता रहेगा, तब तक इसे बचाने की दिशा में एक कदम भी प्रगति नहीं होगी। प्रकृति कभी संसाधन भर नहीं हो सकती। महाभारत के गंगापुत्र भीष्म का उदाहरण देते हुये उन्होंने कहा कि प्रवाह का नाम ही नदी है और इसकी रक्षा करना राजा का कर्तव्य है। गंगा बचाने की बात करने वाले विकास के विरोधी नहीं, लेकिन विकास अराजकता की ओर ले जाने वाला नहीं होना चाहिए। इस दौरान भुवन चंद्र खंडूरी ने धर्मगुरुओं को चुनौती दी कि वे धर्म के नाम पर गंगा के साथ हो रहे दु‌र्व्यवहार को रोकें। खंडूरी ने कहा कि हम गंगा की तरह गाय को भी मां मानते हैं, लेकिन बच्चों को पिलाने के लिए उसका दूध उपयोग करते हैं। इसी तरह बिजली बनाने से अगर गंगा के औषधीय गुण या शुद्धता पर फर्क नहीं पड़ता हो तो पनबिजली परियोजना का विरोध नहीं होना चाहिए, इसलिए जरूरी है कि वैज्ञानिक अध्ययन किए जायें। सलीम चिश्ती की दरगाह के पीरजादा रईस मियां चिश्ती ने कहा कि यह सोचना भी मुश्किल है कि यह मुल्क बिना गंगा के कैसा होगा।

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