सच्चर कमेटी की संस्तुतियों को लागू करे केन्द्र: मुख्यमंत्री

सच्चर कमेटी की संस्तुतियों को लागू करे केन्द्र: मुख्यमंत्री

 

  • नई दिल्ली में राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री का संबोधन
  • श्री विष्णु सहाय, भूतपूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, इलाहाबाद हाईकोर्ट की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग का गठन, जो दो माह में अपनी रिपोर्ट देगा
  • प्रत्येक मृतक के आश्रित को सरकारी नौकरी तथा पूरी तरह से नष्ट मकान के मालिक को ‘लोहिया आवास योजना’ के तहत मकान दिया जाएगा
  • सोशल मीडिया के माध्यम से भावनाओं को भड़काने वाली आपत्तिजनक सामग्री के प्रसारण की रोकथाम की कारगर व्यवस्था की जाए
  • मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था की जाए, आवश्यकता पड़ने पर संविधान में संशोधन भी किया जाए
  • मुजफ्फरनगर की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, दोषियों के विरुद्ध बिना किसी पक्षपात के कठोर कार्यवाही की जाएगी
  • उत्तर प्रदेश में साम्प्रदायिक सद्भाव एवं शान्ति व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के कल्याण एवं हित की कई विशेष योजनाएं प्रारम्भ
नई दिल्ली में राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
नई दिल्ली में राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि वर्तमान समाजवादी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता राज्य में साम्प्रदायिक सद्भाव व शान्ति व्यवस्था बनाए रखना है। प्रदेश सरकार अपने इस दायित्व के प्रति कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अपनी गंगा-जमुनी तहजीब के लिए जाना जाता है तथा सदियों से हिन्दू-मुस्लिम सम्प्रदाय के लोग सौहार्दपूर्ण वातावरण में एक साथ रहते चले आए हैं।
मुख्यमंत्री आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। मुख्यतः साम्प्रदायिक सद्भाव के संबंध में आहूत इस बैठक को देश व प्रदेश के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि विगत कुछ दशकों में प्रदेश में साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने एवं सामाजिक वैमनस्य पैदा करने के प्रयास किए गए। जिसकी वजह से कई साम्प्रदायिक दंगे हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1990 में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने ऐसी साम्प्रदायिक ताकतों को अपने मंसूबों में कामयाब नहीं होने दिया।
श्री यादव ने कहा कि वर्ष 1992 में बाबरी मस्जिद को गिराकर कानून के राज को तोड़ा गया। बाबरी मस्जिद गिराए जाने की घटना देश व प्रदेश के इतिहास में एक काला अध्याय है। इस विध्वंसकारी घटना के दुष्परिणाम स्वरूप देश के कई हिस्सों में दंगे हुए और हजारों जानें गईं। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद प्रकरण को एक सोची-समझी साजिश के तहत निहित स्वार्थों द्वारा राजनीतिक उद्देश्य से बहुत बड़ा स्वरूप प्रदान करने का प्रयास किया गया, जिससे साम्प्रदायिक सद्भाव पर बहुत खराब प्रभाव पड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए कुछ प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा राजनीतिक लाभ के लिए सीधी सादी जनता को गुमराह कर साम्प्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने का खतरनाक प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश की आबादी के ध्रुवीकरण की कोशिश चल रही है। उन्होंने 15 जून, 2013 को जनपद शामली में एक लड़की के साथ हुई दुराचार की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस सम्बन्ध में तुरन्त गिरफ्तारी कर कानूनी कार्यवाही की गयी। परन्तु फिर भी 16 एवं 17 जून, 2013 को स्थानीय राजनीतिक नेताओं द्वारा घटना को साम्प्रदायिक रूप देने का प्रयास किया गया।
विश्व हिन्दू परिषद द्वारा अयोध्या में श्रीराम मन्दिर के निर्माण की मांग को लेकर समाज में धूर्वीकरण करने तथा सरकार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से 25 अगस्त से 13 सितम्बर, 2013 के मध्य तथाकथित चैरासी कोसी परिक्रमा का आयोजन किया गया, जबकि परम्परागत रूप से चैरासी कोसी परिक्रमा पहले ही सम्पन्न हो चुकी थी। अतः स्थानीय प्रशासन द्वारा विश्व हिन्दू परिषद् के इस आयोजन को प्रतिबन्धित किया गया। इसी प्रकार धर्मगुरु महन्त सेवक स्वामी की 22 सितम्बर से 13 अक्तूबर, 2013 तक प्रतिदिन की प्रस्तावित पंचकोसी परिक्रमा की घोषणा भी साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का प्रयास लगता है। देवबन्द में भी एक मंदिर में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा 07 सितम्बर, 2013 को धर्म संसद आयोजित करने का ऐलान किया गया था, जिसे पुलिस द्वारा सतर्कता बरतते हुए रोका गया। अतः आज यह अत्यधिक आवश्यक है कि समाज के सभी समुदाय एवं राजनीतिक दल अपनी जिम्मेदारी समझें और साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखने में अपना योगदान दें।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अभी हाल ही में मुजफ्फरनगर एवं आसपास के जनपदों में कुछ निहित स्वार्थों एवं राजनीतिक दलों द्वारा गैर जिम्मेदाराना आचरण एवं भड़काऊ भाषणों के माध्यम से कुछ घटनाओं को साम्प्रदायिक रूप दिया गया। दोनों समुदायों के मध्य तनाव पैदा हुआ और हिंसात्मक घटनाएं हुईं। सबसे खतरनाक बात यह है कि साम्प्रदायिक तनाव को ग्रामीण क्षेत्र में भी फैलाया गया और इन जनपदों में हिंसा के फलस्वरूप कई लोगों की मृत्यु हुई और अनेक लोग घायल हुए। प्रदेश सरकार द्वारा साम्प्रदायिक स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए गए और बिना विलम्ब किए सेना को मुजफ्फरनगर एवं शामली जनपदों में तैनात कराया गया। भारी संख्या में प्रदेश सरकार के पुलिस बल के अतिरिक्त केन्द्रीय अर्द्धसैनिक बलों को लगाया गया और न्यूनतम समय में स्थिति पर नियंत्रण पा लिया गया। इस संबंध में 2255 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं। इनमें से 235 व्यक्ति गम्भीर अपराधों के आरोपी हैं और 2020 व्यक्तियों को निरोधात्मक धाराओं में गिरफ्तार किया गया है। इन घटनाओं में जिनका अपराध पाया जाएगा, उनके विरुद्ध बिना पक्षपात या द्वेष भावना के कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने 15 सितम्बर, 2013 को मुजफ्फरनगर एवं शामली जनपद के प्रभावित इलाकों में जाकर स्थिति का जायजा लिया। साम्प्रदायिक घटना की जांच हेतु राज्य सरकार ने भूतपूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, इलाहाबाद हाईकोर्ट श्री विष्णु सहाय की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित कर दिया है, जो अपनी रिपोर्ट दो माह में प्रस्तुत करेगा। आयोग से घटनाओं का पता लगाने, इसके सम्बन्ध में उत्तरदायित्व निर्धारित करने तथा इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु सुझाव देने की अपेक्षा की गयी है।
श्री यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रत्येक मृतक के परिवार को 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह सहायता प्रधानमंत्री सहायता कोष से मिलने वाली दो लाख रुपए एवं आतंकवादी/साम्प्रदायिक/नक्सली हिंसा के पीडि़तों की सहायता हेतु केन्द्रीय योजना के अन्तर्गत मिलने वाली तीन लाख रुपए की धनराशि के अतिरिक्त है। गम्भीर रूप से घायल प्रत्येक व्यक्ति को 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी और उसका निःशुल्क इलाज कराया जाएगा। प्रधानमंत्री सहायता कोष से भी प्रत्येक घायल को 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्राप्त होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक मृतक के आश्रित को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी दी जाएगी। क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत हेतु आर्थिक सहायता दी जाएगी। यदि मकान पूरी तरह से नष्ट हो गया है, तो उस व्यक्ति को लोहिया आवास योजना के तहत एक मकान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रभावित गांवों के शिविरों में रह रहे लोगों को अपने-अपने घरों में फिर से बसाया जाएगा एवं उनके पुनर्वास के लिए हर सम्भव सहायता दी जाएगी। इन लोगों के मन में सुरक्षा की भावना एवं आत्मविश्वास पैदा करने के लिए गांवों में पुलिस पिकेट स्थापित की जा रही है। स्थानीय स्तर पर शान्ति समितियों की मदद से भी आपसी विश्वास एवं भाईचारे का माहौल स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
श्री यादव ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाये रखने में यह कठिनाई अनुभव की गयी है कि सोशल मीडिया के माध्यम से जो आपत्तिजनक सामग्री भावनाओं को भड़काने के लिए प्रसारित की जाती है, उसकी रोकथाम के लिए कोई कारगर व्यवस्था अभी नहीं है। भड़काऊ सामग्री जो ई-मेल या मोबाइल फोनों से एसएमएस और एमएमएस द्वारा क्षेत्रों में प्रसारित की जाती है, उसकी रोकथाम के लिए आवश्यक है कि इन्टरनेट सेवा प्रदाताओं तथा मोबाइल कम्पनियों के पास यह क्षमता हो कि निर्देश मिलने पर सीमित क्षेत्र में आपत्तिजनक सामग्री का वितरण प्रतिबन्धित कर सकें। इनके पास यह तकनीक भी उपलब्ध होनी चाहिए, जिससे त्वरित गति से यह पता लगाया जा सके कि चिन्ह्ति आपत्तिजनक सामग्री सर्वप्रथम किसने भेजी। यदि यह क्षमता इन्टरनेट सेवा प्रदाताओं तथा मोबाइल कम्पनियों के पास नहीं है, तो इसे उन्हें विकसित करना चाहिए। उन्होंने इस सम्बन्ध में भारत सरकार से अविलम्ब कार्रवाई करने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश व प्रदेश के अल्पसंख्यकों और विशेषकर मुस्लिम सम्प्रदाय को यह पूरा मौका मिलना चाहिए कि आत्मसम्मान के साथ एवं सुरक्षित तथा भयमुक्त वातावरण में रह सके। साथ ही, मुस्लिम समुदाय को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना बहुत जरूरी है। संसद में नवम्बर, 2006 में सच्चर कमेटी की रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी थी, जो समाज में मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक स्थिति के बारे में एक मात्र प्रामाणिक रिपोर्ट है। सच्चर कमेटी की इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो जाता है कि कदाचित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों के बाद आर्थिक एवं शैक्षणिक रूप से यदि कोई सबसे पिछड़ा समुदाय है तो वह मुस्लिम समुदाय है। कहीं-कहीं तो मुस्लिम समुदाय की स्थिति अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति से भी बदतर है।
श्री यादव ने कहा कि इसलिए देश के 17 करोड़ मुसलमानों को विकास की मुख्य धारा में शामिल करना निहायत जरूरी है। उन्हें छोड़कर प्रदेश एवं देश के समग्र विकास की परिकल्पना नहीं की जा सकती। इसके अतिरिक्त रंगनाथ मिश्र आयोग द्वारा भी सामाजिक, आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 16(4) के अन्तर्गत मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय को आरक्षण का लाभ दिये जाने की महत्वपूर्ण संस्तुति की गयी है। उन्होंने केन्द्र सरकार से अनुरोध किया कि सच्चर कमेटी की संस्तुतियों को पूरी तरह लागू किया जाए तथा मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था की जाए। यदि इसके लिए संविधान में संशोधन आवश्यक हो तो उसके लिए भी कदम उठाए जाएं।
अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के लिए प्रदेश में संचालित विभिन्न विकास कार्यक्रमों पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की कुल जनसंख्या में 18.5 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को प्रदेश में संचालित विभिन्न विकास कार्यक्रमों एवं योजनाओं में उनका न्यायोचित हिस्सा दिलाने के उद्देश्य से प्रत्येक ऐसी योजना के भौतिक लक्ष्यों में 20 प्रतिशत मात्राकरण अल्पसंख्यकों के लिए करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए कई विशेष योजनाएं प्रारम्भ की गयी हैं, जिसमें ‘हमारी बेटी उसका कल’ योजना शामिल है। इसमें हाईस्कूल पास बालिका के लिए आगे पढ़ाई के लिए एकमुश्त 30 हजार रुपए की धनराशि देने की व्यवस्था है। इसके अलावा अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों में नये आई0टी0आई0, पालीटेक्निक, इण्टर कालेज एवं डिग्री कालेज खुलवाए जा रहे हैं। अल्पसंख्यकों के लिए तकनीकी शिक्षा, निःशुल्क कोचिंग एवं कुशल कारीगरों की दक्षता वृद्धि के लिए भी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि देश को आगे बढ़ाना है और भारतवासियों को अपने जीवन स्तर में सुधार करने का मौका दिया जाना है, अपने देश व प्रदेश के विकास के सपने को साकार करना है तो उसकी पहली शर्त यह है कि देश-प्रदेश में शान्ति व्यवस्था और साम्प्रदायिक सद्भाव बना रहे। उन्होंने क्षुद्र राजनीतिक लाभ के लिए साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वालों की कड़े शब्दों में निन्दा की और प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि राष्ट्रीय एकता परिषद् द्वारा ही इसी प्रकार का एक प्रस्ताव पारित किया जाए। मुख्यमंत्री ने समाज के सभी वर्गों एवं राजनीतिक दलों से साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखने में अपना योगदान देने की अपील की। इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी, प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव तथा प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री राकेश गर्ग उपस्थित रहे।

Leave a Reply