कमीशनखोरी रोके बिना कालाबाजारी रोकने का दावा

कमीशनखोरी रोके बिना कालाबाजारी रोकने का दावा
जिला पूर्ति अधिकारी सत्यदेव
जिला पूर्ति अधिकारी सत्यदेव

बदायूं की राशन वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार चरम पर है, जो विभागीय अधिकारियों के साथ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से फलफूल रहा है। कमीशनखोरी खत्म करने की बजाये अफसर बयानबाजी कर जनता को मूर्ख बनाने का प्रयास कर रहे हैं। एक हेल्प लाइन स्थापित की गई है। कहा जा रहा है कि इससे भ्रष्टाचार रोकने में मदद मिलेगी, लेकिन सवाल उठता है कि जब सब अफसरों की मिलीभगत से ही हो रहा है, तो किसी भी तरह की शिकायत करने से क्या लाभ होगा?
जिला पूर्ति अधिकारी सत्यदेव ने राशन एवं कुकिंग गैस वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने को लेकर आज पत्रकार वार्ता की, जिसमें उन्होंने बताया कि खाद्यान एवं कुकिंग गैस वितरण में पाई जाने वाली अनियमितताओं को दूर करने तथा वितरण व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने हेतु जिला पूर्ति कार्यालय में हेल्प लाइन स्थापित की गई है, जिस पर शिकायतकर्ता की कॉल रिकार्ड की जाएगी। उसके बाद पूर्ति निरीक्षकों तथा एआरओ द्वारा प्राप्त शिकायत की जांच कराई जाएगी। जांच सत्य पाए जाने पर सम्बंधित कोटेदार अथवा गैस एजेंसी के विरूद्ध कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने बताया कि यदि शिकायत असत्य पाई जाती है, तो शिकायतकर्ता के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। राशन तथा गैस वितरण सम्बंधी शिकायत 9411254518 नम्बर पर दर्ज कराई जा सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि राशन तथा गैस वितरण में किसी भी प्रकार की शिथिलता को बर्दाश्त नहीं की जायेगी। गैस तथा राशन की कालाबाजारी करने वाले माफियाओं को धारा 151 के तहत जेल भेजा जाएगा। डीएसओ ने कहा कि जिन कुकिंग गैस उपभोक्ताओं ने अभी तक अपने 9 गैस सिलेन्डर सम्बंधित एजेंसी से प्राप्त नहीं किए हैं, वह 31 मार्च, 2014 तक अपने नौ सिलेण्डर अवश्य ले लें। उन्होंने यह भी बताया कि जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक नए राशन कार्ड बनवाने हेतु अपना बैंक खाता नम्बर तथा फोटो पहचान पत्र आदि अभिलेख सम्बंधित कोटेदार को उपलब्ध नहीं कराए हैं और वह जब तक उक्त अभिलेख उपलब्ध नहीं कराते, तब तक उनको मिट्टी का तेल देना बन्द कर दिया जाएगा।
डीएसओ के दावे औए चेतावनी से हट कर बात करें, तो इसी डीएसओ ऑफिस के कोटेदारों को निर्देश हैं कि वह केरोसिन नौसेरा स्थित न्यू भारत पेट्रोलियम से ही उठायें, जबकि और भी डिपो हैं और वे क्षेत्र के अनुसार नजदीक भी हैं। यह डिपो सपा के एक कद्दावर नेता का है, जहां कोटेदार को तीन माह में दो बार तेल देने की परंपरा दशकों से चली आ रही है। एक माह के तेल के बदले कोटेदार को मुनाफे के रूप में सिर्फ चार रूपये प्रति लीटर की दर से रूपये दे दिए जाते हैं। विभागीय अफसरों की दहशत के चलते कोटेदार चुपचाप रजिस्टर में फर्जी एंट्री करा कर जो मिल रहे हैं, उन रूपये को ले जाकर शांत बैठ जाता है, जबकि कभी भी शिकायत होने पर फंसता है सिर्फ कोटेदार। कार्रवाई भी सिर्फ कोटेदार के विरुद्ध ही होती है। विभागीय अफसरों व इस तेल माफिया के गिरेबान तक किसी के हाथ नहीं पहुँचते। यह सिस्टम सालों से चला आ रहा है। बीच में जिलाधिकारी एम. देवराज आये, तो कुछ समय के लिए यह सब बंद हो गया, लेकिन उनके जाते ही फिर सब वैसा ही चलने लगा।

सवाल उठता है कि पूर्ति निरीक्षक, जिला पूर्ति अधिकारी और खुद डीएम जिस भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, वो भ्रष्टाचार बंद कैसे हो सकता है?, यह लोग ईमानदार होते, तो भ्रष्टाचार स्वतः ही खत्म हो जाता। भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए इस तरह का नाटक करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। हेल्प लाइन और चेतावनी देने के इस नाटक से जनता का कोई लाभ नहीं होने वाला। इसी तरह गैस एजेंसी की बात करें, तो स्थानीय प्रशासन को उनके विरुद्ध कार्रवाई करने के अधिकार ही नहीं है। कालाबाजारी के मामले में एफआईआर लिखा कर जेल भेज सकते हैं, पर इतनी बड़ी कार्रवाई कमीशन लेने वाले अफसर कभी नहीं कर सकते और कमीशन लेनी बंद कर देंगे, तो सब बंद हो ही जाएगा।

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