एस्मा लगाने के बावजूद जारी रही कर्मचारियों की हड़ताल

एस्मा लगाने के बावजूद जारी रही कर्मचारियों की हड़ताल
  • प्रदेश सरकार द्वारा हड़ताली कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त करने की अपील 
 
  • आवश्यक सेवाओं को सुचारु रूप से जारी रखने में कर्मचारी सहयोग करें 

  • प्रमुख सचिव वित्त सदस्य तथा प्रमुख सचिव कार्मिक सदस्य संयोजक होंगे 
 
  • उ0प्र0 राज्य कर्मचारी अधिकार मंच के प्रतिनिधिमण्डल से मुख्य सचिव के प्रतिनिधि के रूप प्रमुख सचिव कार्मिक की वार्ता हुर्इ 
 
  • राज्य कर्मचारी अधिकार मंच की मांगों पर विचार के लिए कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित
 

बदायूं में रैली निकालते व नारेबाजी करते हड़ताली कर्मचारी
बदायूं में रैली निकालते व नारेबाजी करते हड़ताली कर्मचारी
एस्मा लगाने के बावजूद कर्मचारियों की हड़ताल आज भी जारी रही, वहीं उत्तर प्रदेश में राज्य कर्मचारियों के एक गुट द्वारा संचालित हड़ताल के मददेनजर आज मुख्य सचिव के प्रतिनिधि के रूप में प्रमुख सचिव कार्मिक राजीव कुमार के साथ राज्य कर्मचारी अधिकार मंच के प्रतिनिधिमण्डल की वार्ता हुर्इ। प्रमुख सचिव कार्मिक ने हड़ताली कर्मियों से अपील की है कि वे अपनी हड़ताल समाप्त कर दें तथा आवश्यक सेवाओं को सुचारु रूप से जारी रखने में सहयोग करें।
हाईकोर्ट की दखल के बाद प्रदेश सरकार ने कल एस्मा लगा दिया था, लेकिन कर्मचारी नहीं डरे और आज भी हड़ताल जारी रखी, जिससे कुछ विभागों में कामकाज ठ़प रहा। उधर जानकारी देते हुए आज लखनऊ में प्रमुख सचिव कार्मिक राजीव कुमार ने बताया कि राज्य कर्मचारी अधिकार मंच की मांगों के सम्बन्ध में कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गर्इ है। यह समिति राज्य कर्मचारी अधिकार मंच की मांगों के सभी पहलुओं पर विचार करते हुए तथा विस्तृत रूप से अध्ययन करते हुए, ऐसी मांगें जो न्यायोचित हों, तथा जिनकी पूर्ति प्रदेश सरकार के सीमित वित्तीय संसाधनों के अन्तर्गत की जा सकती है, उनके सम्बन्ध में अपनी संस्तुतियां तीन माह में उपलब्ध कराएगी। इस समिति के अन्य सदस्य प्रमुख सचिव वित्त एवं सदस्य संयोजक प्रमुख सचिव कार्मिक होंगे।
प्रमुख सचिव कार्मिक ने बताया कि राज्य कर्मचारी अधिकारी मंच के प्रतिनिधिमण्डल से हुर्इ वार्ता के दौरान उनके द्वारा दिए गए 21 सूत्री मांग पत्र पर विचार किया गया। विचारोपरान्त यह तय पाया गया कि राज्य कर्मचारी अधिकार मंच द्वारा की गर्इ कर्इ मांगें जटिल प्रकृति की हैं। इनमें से कर्इ मांगों में अत्यधिक वित्तीय उपाशय निहित हैं। ये मांगें कर्इ विभागों एवं संवर्गों से सम्बनिधत हैं तथा उनकी प्रकृति ऐसी है, जिसके कारण इन मांगों पर तत्काल कोर्इ निर्णय लिया जाना संभव नहीं है। इसे देखते हुए राज्य कर्मचारी अधिकारी मंच की मांगों के हर पहलू के विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता है तथा कतिपय मांगों में वित्तीय उपाशय की भी गणना करना आवश्यक है।
राजीव कुमार ने बताया कि जिस प्रशासकीय विभाग से सम्बनिधत विषयों पर चर्चा होगी, उसके प्रमुख सचिवसचिव को गठित समिति विभागीय पक्ष प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित करेगी। कर्मियों की बात भी समुचित रूप से सुनी जाए, इसके लिए यह समिति सम्बनिधत विषय विभाग के कर्मियों के संगठनों के प्रतिनिधियों को भी अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर देगी।
प्रमुख सचिव कार्मिक ने कहा कि प्रदेश सरकार हड़ताली कर्मचारियों को यह भी अवगत कराना चाहती है कि जनता की कठिनार्इयों और उनके हित को देखते हुए हड़ताल को जारी रखने का कोर्इ औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार कर्मियों की न्यायोचित मांगों को अपने सीमित वित्तीय संसाधनों की सीमा में रहते हुए पूरा किए जाने पर यथोचित निर्णय शीघ्र लेगी।
राजीव कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार अपने कर्मियों के प्रति सदभाव रखती है तथा सदव्यवहार बना रहे, इसके लिए प्रयासरत रहती है। राज्य कर्मचारी संगठनों/संघों के साथ विगत 15 माह में 15 बैठकें की गर्इ हैं, जिसमें विभिन्न कर्मचारी संगठनोंसंघों की मांगों पर चर्चा की गर्इ तथा एक सीमा तक निस्तारण भी किए गए हैं। प्रमुख सचिव कार्मिक ने बताया कि इन बैठकों के माध्यम से कर्मचारी संगठनोंसंघों द्वारा समय-समय पर जो मांगे की गर्इ हैं, उनके अनुसार राज्याधीन लोक सेवाओं और पदों पर आवेदन करने हेतु राज्य कर्मचारियों को अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट प्रदान करने हेतु दिनांक 27 अगस्त, 2013 को शासनादेश निर्गत किया गया है। दिनांक 15 मार्च, 2012 से पूर्व अवरुद्ध पदोन्नति की प्रक्रिया को प्रारम्भ किया गया, जिससे विभिन्न विभागों में अधिकतर कर्मियों को पदोन्नति का अवसर प्राप्त हुआ। राज्य कर्मचारियों को प्राप्त होने वाले विभिन्न प्रकार के भत्ते जैसे द्विभाषी टंककों/आशुलिपिकों का प्रोत्साहन भत्ता, मोटरकार/मोटरसार्इकिल/मोपेड/साईकिल भत्ता, नियत यात्रा भत्ता, वर्दी धुलार्इ भत्ता आदि जिनमें विगत कर्इ वर्षों से वृद्धि नहीं की गर्इ थी, को दोगुना कर दिया गया है। दिनांक 03 दिसम्बर, 2012 के द्वारा दिनांक 1 जनवरी, 2006 से सेवानिवृत्तमृत सरकारी कर्मचारियों/पेंशनरों की अविवाहित/विधवा/तलाकशुदा पुत्रियों को पारिवारिक पेंशन अनुमन्य करार्इ गर्इ।
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