आलू का खराब बीज देने वालों के विरुद्ध होगी कड़ी कार्रवाई

आलू का खराब बीज देने वालों के विरुद्ध होगी कड़ी कार्रवाई
  • कामधेनु डेयरी योजना का लक्ष्य मुख्यमंत्री ने 75 से बढ़ाकर 425 करने का निर्णय लिया: कृषि उत्पादन आयुक्त 
 
 
  • 50 दुधारू पशुओं वाली डेयरी पर भी अनुदान शीघ्र: आलोक रंजन
 
  • अलीगढ़ में तीन मण्डलों की रबी गोष्ठी सम्पन्न 
अलीगढ़ में आयोजित कृषक गोष्ठी में किसान को पुस्तक भेंट करते उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक रंजन
अलीगढ़ में आयोजित कृषक गोष्ठी में किसान को पुस्तक भेंट करते उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक रंजन
उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक रंजन ने अलीगढ़ में आयोजित रबी गोष्ठी में किसानों को बताया कि राज्य सरकार ने कामधेनु योजना के अन्तर्गत 100 दुधारू पशुओं की डेयरी खोलने के वर्तमान 75 के लक्ष्य को बढ़ाकर उसकी संख्या 425 डेयरी की कर दी है। उन्होंने कहा कि किसानों में कामधेनु योजना की लोकप्रियता को देखते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कामधेनु डेयरी की लक्ष्य संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि अब 50 दुधारू जानवरों की क्षमता वाली डेयरियों पर भी अनुदान योजना जल्द ही शुरू कर दी जाएगी।
आलोक रंजन आज अलीगढ़ में रबी गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे थे। इसमें प्रमुख सचिव कृषि देबाशीष पाण्डा, प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास अरुण कुमार सिंघल, कृषि निदेशक देव मित्र सिंह, निदेशक बीज प्रमाणीकरण संस्था ए0के0विश्नोई, मण्डलायुक्त अलीगढ़ टी0वेंकटेश, मण्डलायुक्त कानपुर महेश कुमार गुप्ता, मण्डलायुक्त आगरा प्रदीप भटनागर और तीनों मण्डलों के प्रगतिशील किसान तथा कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। श्री रंजन ने कहा कि अलीगढ़ मण्डल में 9 हजार एकड़ भूमि सुधार कार्यों को गति देने के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्तर्गत कार्य कराया जाएगा। उन्होंने ट्रैक्टर लोन के लिए अधिक भूमि बंधक बनाए जाने की समस्या पर कहा कि इस सम्बन्ध में केन्द्र सरकार से राज्य सरकार की बातचीत चल रही है और प्रयास चल रहा है कि ट्रैक्टर पर अधिक भूमि बंधक न बनाई जाए।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने मण्डलों के उद्यान अधिकारियों को निर्देश दिया कि उन सभी आलू बीज आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए, जो किसानों को खराब गुणवत्ता वाले आलू बीज बिक्री कर रहे हैं। उन्होंने किसानों की मांग के अनुसार फसल बीमा योजना को संशोधित करने का भी आश्वासन दिया है और कहा कि अब हर महीने जिलाधिकारी इस योजना के लाभार्थियों की समस्याओं के समाधान हेतु बैठक करेंगे। इस मौके पर उन्होंने किसानों से कुक्कुट पालन तथा मत्स्य पालन की सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।
गोष्ठी में अनेक किसानों ने अपने नए प्रयोगों से हुए लाभों एवं कृषि समस्याओं पर प्रकाश डाला। अलीगढ़ के कृषक तेजवीर सिंह ने मूंगफली की खेती से जुड़े उपकरणों पर अनुदान दिए जाने तथा किसान अजब सिंह ने फसल बीमा की सुविधा के लिए न्याय पंचायत स्तर को इकाई बनाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ कि अलीगढ़ में बन्द पड़ी कृषि कार्यशाला को पुनः शुरू किया जाए। अलीगढ़ के राधेश्याम शर्मा ने वर्मी कम्पोस्ट के फायदे गिनाए। एटा जनपद के किसान दूरबीन सिंह ने खारे पानी की समस्या को दूर करने के लिए किए गए अपने प्रयासों को साझा किया। कासगंज के कृषक मोरमुकुट भारद्वाज ने आत्मा योजना के लाभों को गिनाया। हाथरस के रामबाबू शर्मा ने उद्यान विभाग में भी विभिन्न योजना पर 90 प्रतिशत तक के अनुदान की मांग की। आगरा के किसान बंगाली बाबू ने कहा कि उद्यान विभाग की ओर से ट्रैक्टर पर 150000 रुपए का अनुदान किया जा रहा है, जबकि कृषि विभाग में मात्र 45000 रुपए का दिया जाता है। इस असमानता को दूर किया जाए। उन्होंने हर गांव में कृषि निवेश उपलब्ध कराने के लिए किसान कैन्टीन खोले जाने का सुझाव दिया। मथुरा के किसान मूर्ति सिंह ने समय से किसान दुर्घटना बीमा योजना का लाभ नहीं मिल पाने की समस्या रखी। मैनपुरी के नीरज कुमार ने मूंगफली की खेती के लिए सरकारी गोदामों पर पर्याप्त मात्रा में पोटाश उपलब्ध नहीं होने की समस्या रखी। कानपुर देहात के बाबूलाल निषाद ने खाद-बीज समय से पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराए जाने की मांग की। फर्रूखाबाद के किसान अरविन्द सिंह ने कहा कि सघन मिनी डेयरी योजना का लाभ सभी किसानों को दिया जाना चाहिए। इटावा के किसान अमर सिंह यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी अनुदान पर कम्बाइन उपलब्ध कराई जाए। औरया के मथुरा प्रसाद ने नील गायों की समस्या रखी।

गोष्ठी का समापन करते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त ने रिकार्ड उत्पादकता के लिए तीनों मण्डलों को बधाई दी। मण्डलायुक्तों ने कृषि उत्पादन आयुक्त को अपने-अपने मण्डलों में रबी हेतु उत्पादन लक्ष्य की जानकारी कराई और खाद व बीज की उपलब्धता के बारे में विस्तार से बताया। मण्डलायुक्त अलीगढ़ ने मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भूमि में 0.9 प्रतिशत जीवांश कार्बन का मानक है, जबकि मौजूदा समय में अलीगढ़ मण्डल में यह घटकर मात्र 0.1 से 0.3 प्रतिशत पर है। उन्होंने कहा कि इसे ठीक करने के लिए हरी खाद, वर्मी कम्पोस्ट और बायोफर्टिलाइजर के प्रयोग हेतु किसानों को तैयार कराने के लिए एक अभियान चलाने की आवश्यकता है।

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