आम आदमी की कमाई पर मस्ती करेंगे वीवीआईपी

आम आदमी की कमाई पर मस्ती करेंगे वीवीआईपी
  • बदायूं महोत्सव के आयोजन को लेकर जिलेभर में की जा रही है उगाही
  • सवाल: अवैध उगाही पर महोत्सव आयोजित करने की जरुरत ही क्या थी?
  • महोत्सव आयोजित करना जरुरी था, तो शासन से क्यूं नहीं माँगा धन?
तैयारी करते महोत्सव में भाग लेने वाले प्रतिभागी
तैयारी करते महोत्सव में भाग लेने वाले प्रतिभागी

बदायूं महोत्सव को लेकर गौतम सन्देश ने जैसी आशंका व्यक्त की थी, वैसा ही हो रहा है। प्रशासन खुलेआम धन उगाही में मदद कर रहा है, जिससे महोत्सव के नाम पर वीवीआईपी, अफसर और शहर के कुछ ख़ास लोग आम आदमी की खून-पसीने की कमाई पर कल से तीन दिनों तक जमकर आनंद लेते दिखेंगे।

बदायूं क्लब नाम की संस्था के जिलाधिकारी पदेन अध्यक्ष होते हैं। जनपद की परंपरा और संस्कृति को जीवित रखने का हवाला देते हुए बदायूं क्लब ने बदायूं महोत्सव आयोजित करने का सिलसिला शुरू किया था। जिलाधिकारी महोत्सव को भव्य बनाने के उद्देश्य से प्रशासनिक तौर पर मदद कर दिया करते थे, महोत्सव को आयोजित करने का उद्देश्य अब बदल गया है, लेकिन प्रशासन के द्वारा मदद के नाम पर धन उगाही इस बार भी की जा रही है। बसपा शासन में अधिकारी इस तरह धन उगाही नहीं कर पाते, सो बसपा शासन में महोत्सव के आयोजन का किसी को ख्याल तक नहीं आया, पर प्रदेश में सपा शासन आते ही महोत्सव का राग परवान चढ़ गया।

सूत्रों का कहना है जनपद के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक कर अधीनस्थों को खुल कर धन उगाही कराने के निर्देश दे दिए हैं। सचिव, लेखपाल, प्रधान, बीडीओ, राशन डीलर के साथ पुलिस, कलेक्ट्रेट और विकास विभाग से संबंधित अधिकारियों व बाबुओं को रसीदें उपलब्ध करा दी गई हैं, जो वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के चलते पैसा देने को मजबूर हैं। कोई अधिकारी या बाबू महोत्सव आयोजित करने को वेतन से तो चंदा देगा नहीं। जाहिर है कि इस पैसे की पूर्ति आम आदमी की जेब से ही पूरी की जायेगी।

इसके अलावा सूत्रों का कहना है कि क्लब के एकाउंट में हमेशा धन रहता है, साथ ही जनपद के बड़े नेता और व्यापारी खुल कर आर्थिक मदद कर रहे हैं एवं तमाम बड़े विज्ञापनदाता भी क्लब के पास हैं, जिनसे मोटी रकम क्लब को प्राप्त होगी, जिससे लोग चर्चा कर रहे हैं कि इतना धन कहाँ जाएगा? महोत्सव के नाम पर खुलेआम हो रही धन उगाही से आम आदमी की नज़र में शासन-प्रशासन की छवि और ख़राब हो रही है। आम तौर पर लोगों का कहना है कि महोत्सव का आयोजन वाकई बेहद आवश्यक था, तो प्रशासन को शासन से धन मांग कर महोत्सव का आयोजन कराना चाहिए, साथ ही महोत्सव में मुख्यमंत्री के अनुज सांसद धर्मेन्द्र यादव मुख्य अतिधि की भूमिका निभाएंगे, वह चाहते, तो उनके इशारे पर शासन से लाखों रुपया मिल सकता था, पर ऐसा नहीं किया गया, जबकि महोत्सव के नाम पर हो रही उगाही का मुद्दा जिले भर में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है, जिससे जनप्रितिनिधियों की भी छवि ख़राब हो रही है।

महोत्सव के नाम पर हो रही धांधली का असर लोकसभा चुनाव में साफ़ नज़र आयेगा। फिलहाल अवैध धन उगाही के साथ महोत्सव की तैयारियां भी जोरशोर से चल रही हैं।

चर्चा का विषय बनी निजी संस्था

बदायूं महोत्सव का आयोजक बदायूं क्लब ही रहता है। जिलाधिकारी के पदेन अध्यक्ष होने के कारण प्रशासन मदद करता है, लेकिन इस बार एक अन्य निजी संस्था सयुंक्त रूप से आयोजक बनाई गई है, जिससे लोग यह भी चर्चा कर रहे हैं कि इस संस्था से खर्च का आधा धन क्यूं नहीं लिया जा रहा, साथ ही इस निजी संस्था को किसी तरह के सहयोग के बिना ही मंच उपलब्ध क्यूं कराया जा रहा है?

सत्ता की क्रीम खाने की सीढ़ी है महोत्सव

बदायूं महोत्सव के नाम पर कुछ लोग सत्ताधारियों की नज़र में ख़ास बनने के प्रयास में लगे हुए हैं। एक व्यक्ति तो सफल आयोजन का श्रेय लेकर लालबत्ती पाने का भी सपना देखने लगा है। लोग यह भी कहते सुने जा रहे हैं कि जब सत्ताधारियों को विश्वास में लेकर अवैध रूप से धन उगाही कराई जा सकती है, तो चापलूसी के युग में लालबत्ती भी पाई जा सकती हैं। यह बात इसलिए उठ रही है कि सत्ता की मलाई लोग महोत्सव के नाम पर पहले भी खाते रहे हैं। खैर, इस बार का खुलासा तो भविष्य में ही होगा कि महोत्सव के सफल आयोजन का श्रेय और सत्ता की क्रीम किसके हिस्से में आयेगी?

One Response to "आम आदमी की कमाई पर मस्ती करेंगे वीवीआईपी"

  1. Sara   May 24, 2015 at 11:53 PM

    Wow! Great thniikng! JK

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