शराब कांड में तीन और अधिकारी निलंबित, अनिल गर्ग सेफ

बदायूं जिले के उझानी कोतवाली क्षेत्र में दिल्ली हाइवे के किनारे स्थित खोखे में चल रही सरकारी शराब की दुकान।
बदायूं जिले के उझानी कोतवाली क्षेत्र में दिल्ली हाइवे के किनारे स्थित खोखे में चल रही सरकारी शराब की दुकान।
जहरीली शराब के सेवन से लखनऊ और उन्नाव के लोगों के मरने पर गौतम संदेश ने सवाल उठाया था कि छोटे अफसरों के विरुद्ध कार्रवाई कर प्रकरण को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश शासन ने कल देर रात थाना मलिहाबाद क्षेत्र के ग्राम दतली, लखनऊ में विषाक्त मदिरा के सेवन से कई व्यक्तियों के मृत्यु होने तथा कई व्यक्तियों के अस्पताल में भर्ती होने की घटना के आरोप में रविशंकर पाठक, उप आबकरी आयुक्त जनपद- लखनऊ को शासकीय कार्यों एवं दायित्वों के निर्वाहन में शिथिलता बरतने तथा अपने अधीनस्थों पर प्रभावी नियंत्रण न रखने के प्रथम दृष्टिया दोषी पाते हुए निलम्बित कर दिया है। इसी प्रकार सहायक आबकारी आयुक्त एस.एस.एफ. (बी), अतुल कुमार श्रीवास्तव को भी उक्त आरोपों में तात्कालिक प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया है। लाल बहादुर यादव, सहायक आबकारी आयुक्त/जिला आबकारी अधिकारी- लखनऊ एवं प्रभारी उप आबकारी आयुक्त- लखनऊ प्रभार लखनऊ को भी उक्त आरोपों में तात्कालिक प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया है। निलम्बित अवधि में इन तीनों अधिकारियों को आबकारी आयुक्त कार्यालय- इलाहाबाद से संबद्ध किया गया है। इन अधिकारियों के विरूद्ध संस्थित विभागीय/अनुशासकीय कार्यवाही में अपर आबकारी आयुक्त प्रशासन उत्तर प्रदेश को जांच अधिकारी नामित किया गया है। शासन स्तर से हुई इस कार्रवाई के बाद भी यह आम चर्चा है कि चर्चित अधिकारी अनिल गर्ग को क्यूं बचाया जा रहा है?
उधर बदायूं जिले में खोखों में चल रही शराब की दुकानों को आज भी नहीं हटाया गया और न ही शराब ठेकेदारों और जिले के अफसरों के विरुद्ध कोई कार्रवाई की गई है, जिससे स्पष्ट है कि शासन स्तर पर शराब माफिया पूरी तरह हावी है।
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