मंत्रिपरिषद की बैठक में डीआरडीए कर्मियों की उम्र बढ़ाई

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को लखनऊ में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:-
नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो सिस्टम के निर्माण, संचालन एवं अनुरक्षण हेतु एस.पी.वी के गठन का फैसला
मंत्रिपरिषद ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो सिस्टम के निर्माण, संचालन एवं अनुरक्षण हेतु विशेष प्रयोजन साधन (एस.पी.वी.) एन.एम.आर.सी. का गठन किए जाने हेतु एम.ओ.ए. (मेमोरेण्डम आॅफ एसोसिएशन) तथा ए.ओ.ए. (आर्टिकल्स आॅफ एसोसिएशन) को अनुमोदित कर दिया है। इसके अलावा नोएडा से ग्रेटर नोएडा मेट्रो सिस्टम परियोजना के क्रियान्वयन हेतु डी.एम.आर.सी. से टर्न-की कन्सल्टेंसी फाॅर एक्जीक्यूशन आॅफ मेट्रो काॅरिडोर के माध्यम से कराए जाने के लिए एग्रीमेन्ट को भी मन्जूरी प्रदान कर दी है। अनुबन्ध पर हस्ताक्षर करने के लिए मुख्य कार्यपालक अधिकारी नोएडा तथा मुख्य कार्यपालक अधिकारी ग्रेटर नोएडा को अधिकृत किया गया है।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो सिस्टम परियोजना हेतु डी.एम.आर.सी. द्वारा प्रस्तुत पुनरीक्षित डी.पी.आर. अप्रैल, 2014 (कम्पलीशन काॅस्ट 5,533 करोड़ रुपए, केन्द्रीय कर सहित) को भी अनुमोदित कर दिया है। परियोजना की डी.पी.आर. में अपरिहार्य कारणोंवश यदि किसी प्रकार का संशोधन होता है तो निर्णय लेने हेतु नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बोर्ड को अधिकृत करने का फैसला भी लिया है। मंत्रिपरिषद ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो सिस्टम परियोजना में किसी प्रकार के नीतिगत निर्णय एवं शासन के अन्तर्विभागीय समन्वय हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति की संस्तुतियों पर निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है। इस परियोजना के लिए राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में तत्काल अथवा भविष्य में कोई वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।
नोएडा सिटी सेन्टर सेक्टर- 32 से सेक्टर-62 तक मेट्रो परियोजना हेतु डी.एम.आर.सी. एवं नोएडा के मध्य निष्पादित किए जाने वाले एग्रीमेन्ट को मंजूरी
मंत्रिपरिषद ने नोएडा सिटी सेन्टर सेक्टर-32 से सेक्टर-62 (एन.एच.-24) तक की मेट्रो परियोजना हेतु दिल्ली मेट्रो रेल काॅरपोरेशन लि. (डी.एम.आर.सी.) एवं नोएडा के मध्य निष्पादित किए जाने वाले एग्रीमेन्ट एवं डी.एम.आर.सी. से एग्रीमेन्ट करने हेतु मुख्य कार्यपालक अधिकारी, नोएडा को अधिकृत करने के प्रस्ताव को इस शर्त के साथ अनुमोदित कर दिया है कि इस परियोजना के लिए राज्य सरकार द्वारा कोई वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी। प्रस्तावित मेट्रो लाइन की लम्बाई 6.675 कि0मी0 तथा लागत लगभग 1,880 करोड़ रुपये है।
आगरा से लखनऊ प्रवेश नियंत्रित एक्सप्रेस- वे की कुल अनुमानित लागत 11526.73 करोड़ रु0 को मंजूरी पांच पैकेजों को ई.पी.सी. पद्धति पर क्रियान्वित किया जाएगा
मन्त्रिपरिषद ने आगरा से लखनऊ प्रवेश नियंत्रित एक्सप्रेस-वे (ग्रीन फील्ड परियोजना) की कुल अनुमानित लागत यूटिलिटी शिफ्टिंग सहित 11526.73 करोड़ को मंजूरी प्रदान कर दी है।
इसके अलावा मेसर्स राइट्स लि. से प्राप्त लागत का यूपीडा के तकनीकी सेल द्वारा की गई गणना परीक्षण के उपरान्त आकलित लागत को परियोजना के पांच पैकेजों के प्राप्त बिडों के मूल्यांकन हेतु प्रयोग करने का अनुमोदन भी प्रदान करते हुए आगरा से लखनऊ प्रवेश नियंत्रित एक्सप्रेस-वे परियोजना के पांचों पैकेजों को ई.पी.सी. पद्धति पर क्रियान्वयन हेतु पैकेज संख्या-1 आगरा से फिरोजाबाद मे0 पीएनसी इन्फ्राटेक लि. 1635.75 करोड़ रुपए, पैकेज-2 फिरोजाबाद से इटावा मे0 एफ्काॅन इन्फ्रास्ट्रक्चर लि. 1990.49 करोड़ रुपए, पैकेज-3 इटावा से कन्नौज मे0 एनसीसी लि. 1674.81 करोड़ रुपए, पैकेज संख्या-4 कन्नौज से उन्नाव मे0 इफ्काॅन इन्फ्रास्ट्रक्चर लि. 2124.17 करोड़ रुपए तथा पैकेज-5 उन्नाव से लखनऊ मे0 लार्सन एण्ड टूब्रो लि. 1630 करोड़ रुपए के न्यूनतम बिड्स को भी अनुमोदित कर दिया है।
ज्ञातव्य है कि मे0 राइट्स लि. द्वारा प्रस्तुत परियोजना के अनुमानित आगणन का यूपीडा के टेक्निकल सेल द्वारा किए गए सम्पूर्ण बिडिंग प्रोसेस का परीक्षण एवं मूल्यांकन मा. उच्च न्यायालय के 02 सेवानिवृत्त जजों द्वारा उचित एवं पारदर्शी बताया गया है।
नये विद्युत उपकेन्द्र के निर्माण के लिए शासकीय अंशपूंजी पर सहमति 
मंत्रिपरिषद ने वर्ष 2016 तक प्रदेश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सुचारु विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन काॅर्पोरेशन लि0 द्वारा निर्दिष्ट पारेषण तंत्र के निर्माण के लिए शासकीय अंशपूंजी पर सहमति प्रदान कर दी है। इसके तहत 400 के.वी. के 02, 220 के.वी. के 08, 132 के.वी. के 16 उपकेन्द्र एवं इनसे सम्बन्धित लाइनों के सम्भावित व्यय 1825.36 करोड़ रुपए का शासकीय अंशपूंजी का भाग 30 प्रतिशत अर्थात लगभग 547.61 करोड़ रुपए पर सहमति प्रदान की गई है।
 
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत पात्र गृहस्थियों के चयन हेतु मार्गदर्शी सिद्धांतों का निर्धारण 
मंत्रिपरिषद ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में पात्र गृहस्थियों के चयन हेतु मार्गदर्शी सिद्धांतों का निर्धारण करते हुए आवश्यकतानुसार व्यवहारिक रूप से संशोधन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है।
ग्रामीण और शहरी इलाकों में सभी आयकर दाताओं को खाद्य सुरक्षा अधिनियम का लाभ नहीं मिलेगा और इन्हें एक्सक्लूजन क्राइटेरिया में शामिल किया गया है। सभी बी0पी0एल0 परिवार और अंत्योदय लाभार्थी खाद्यान्न सुरक्षा के दायरे में शामिल होेंगे। शहरी इलाके में ऐसा परिवार जिसके किसी सदस्य के स्वामित्व में अकेले या अन्य सदस्य के साथ 100 वर्ग मीटर से अधिक का स्वअर्जित आवासीय प्लाॅट या उस पर स्वनिर्मित मकान अथवा 100 वर्ग मीटर से अधिक कार्पेट एरिया का आवासीय फ्लैट हो उन्हें अधिनियम के तहत पात्र गृहस्थियों में सम्मिलित नहीं किया जाएगा।
शहरी और ग्रामीण इलाकों में ट्रांसजेण्डर कम्यूनिटी (किन्नर) पात्र होेंगे बशर्ते वे संबंधित क्षेत्र के एक्सक्लूजन क्राइटेरिया में न आते हों। ग्रामीण/शहरी क्षेत्रों में ऐसे परिवार जिनके सदस्यों के पास एक से अधिक शस्त्र का लाइसेन्स/शस्त्र हों एक्सक्लूजन क्राइटेरिया में सम्मिलित होंगे। शहरी क्षेत्र की भांति ग्रामीण क्षेत्र की पात्रता में भी घरेलू काम-काज, जूते चप्पल की मरम्मत करने वाले, फेरी लगाना-खोमचे वाला, रिक्शा चालक, दैनिक वेतन मजदूर यथा-कुली, पल्लेदार आदि को शामिल किया गया है।
गैर अनुदानित मदरसों को अनुदान सूची पर लिए जाने हेतु पूर्व निर्गत शासनादेशों तथा निर्धारित मानकों में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी
मंत्रिपरिषद ने गैर अनुदानित मदरसों को अनुदान सूची पर लिए जाने हेतु पूर्व निर्गत शासनादेशों तथा निर्धारित मानकों में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। इससे मानकों पर खरे उतरने वाले जूनियर स्कूलों तथा मदरसों को अनुदान सूची पर लिया जा सकेगा। इस प्राथमिकता की पूर्ति के सम्बन्ध में विचार करने पर पाया गया कि 1998 तक आलिया स्तर के 246 मदरसे अनुदान हेतु लम्बित थे, जिनमें से 100 मदरसों को वर्ष 2010 में अनुदानित कर दिया गया था। शेष 146 मदरसों को अनुदान सूची में लिए जाने के क्रम में निर्णय लिया गया कि प्रथम फेज में 75 मदरसों को अनुदान सूची पर लिए जाने की कार्रवाई की जाए। शेष मदरसों को अगले चरण में अनुदान पर लिए जाने पर विचार किया जाएगा।
अनुदान सूची पर लिए जाने हेतु पूर्व शासनादेशों एवं निर्धारित मानकों में संशोधन के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव में परिवर्तन-परिवर्धन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत करने का निर्णय लिया गया है।
उ0प्र0 रूफटाॅप सोलर फोटोवोल्टाइक पावर प्लाण्ट नीति-2014 को मन्जूरी
मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश रूफटाॅप सोलर फोटोवोल्टाइक पावर प्लाण्ट नीति-2014 को मन्जूरी प्रदान कर दी है। इस नीति के तहत राज्य में मार्च, 2017 तक रूफटाॅप सोलर पावर प्लाण्ट द्वारा 20 मेगावाट क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य है।
ज्ञातव्य है कि राज्य में सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। राज्य के अधिकांश भागों में दैनिक औसत 5.0 से 5.5 किलोवाट घण्टा/वर्गमीटर की सौर विकिरण प्राप्त होती है, जो कि सौर ऊर्जा आधारित संयंत्रों की स्थापना के लिए उपयुक्त है। तदनुसार प्रदेश सरकार द्वारा मेगावाॅट क्षमता के ग्रिड संयोजित सोलर पावर प्लाण्ट्स की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए सौर ऊर्जा नीति-2013 घोषित की गई है।
सौर ऊर्जा पर आधारित पावर प्लाण्ट की स्थापना छत पर किए जाने से भूमि की बचत होगी तथा डी.जी. सेट से उत्सर्जित होने वाली कार्बन डाईआॅक्साइड में कमी होगी। निर्बाध आपूर्ति हेतु निजी/सरकारी भवनों/औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों की छतों पर रूफटाॅप सोलर फोटो वोल्टाइक पावर प्लाण्ट्स की स्थापना कराए जाने की दशा में इन संयंत्रों से उत्पादित ऊर्जा का उपयोग बिल्डिंग में उपभोक्ताओं द्वारा किया जा सकता है तथा सरप्लस ऊर्जा होने की दशा में सरप्लस ऊर्जा को ग्रिड में भी इंजेक्ट किया जा सकता है।
प्रदेश सरकार समान रूप से ग्रिड संयोजित रूफटाॅप सोलर फोटोवोल्टाइक पावर प्लाण्ट की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए वचनबद्ध है। रूफटाॅप सोलर फोटोवोल्टाइक प्लाण्ट की स्थापना से जीवाश्म ईधन से विद्युत उत्पादन पर निर्भरता में कमी आएगी। भवनों की छतों एंव आस-पास की रिक्त भूमि का समुचित उपयोग होगा। पारेषण एवं वितरण अवस्थापना पर होने वाले निवेश में बचत के साथ-साथ पारेषण नेटवर्क हानियों में कमी आएगी। साथ ही, विद्युत शिड्यूलिंग के प्रबन्धन की लागत में कमी आएगी।
 
‘फिक्स्ड प्राइस काॅन्ट्रैक्ट व्यवस्था’ के अनुसार भवन निर्माण कार्याें से सम्बन्धित द्विपक्षीय अनुबन्ध का माॅडल डाॅक्यूमेन्ट अनुमोदित
मंत्रिपरिषद ने ‘फिक्स्ड प्राइस काॅन्ट्रैक्ट व्यवस्था’ के अनुसार भवन निर्माण कार्याें से सम्बन्धित द्विपक्षीय अनुबन्ध के माॅडल डाॅक्यूमेन्ट को अनुमोदित कर दिया है। मन्त्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश सरकार की वित्तीय हस्त पुस्तिका के सुसंगत प्राविधानों का ‘फिक्स्ड प्राइस काॅन्ट्रैक्ट व्यवस्था’ के लिए प्रस्तावित माॅडल डाॅक्यूमेन्ट में उल्लिखित प्राविधानों की सीमा तक शिथिलीकरण किए जाने का भी निर्णय लिया है। माॅडल डाॅक्यूमेन्ट के प्राविधानों के सम्बन्ध में यथावश्यक स्पष्टीकरण, व्याख्या अथवा संशोधन करने के लिए मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री को अधिकृत कर दिया है।
ज्ञातव्य है कि फिक्स्ड प्राइस काॅन्ट्रैक्ट की इस नई व्यवस्था के अन्तर्गत 10 करोड़ रुपये से अधिक लागत के भवन निर्माण कराए जाएंगे। कार्याें में विलम्ब होने की स्थिति में निर्माण एजेन्सी पर अर्थदण्ड की व्यवस्था तथा उत्तरादायी कार्मिकों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की व्यवस्था का प्राविधान भी इसमें किया गया है। इससे कार्य समय से पूर्ण हो सकेंगे।
 
प्रदेश में वर्तमान जल संरचनाओं को उनके मूल स्वरूप में लाने के उद्देश्य से प्रस्तुत कार्ययोजना को मंजूरी
मंत्रिपरिषद ने प्रदेश में वर्तमान जल संरचनाओं को उनके मूल स्वरूप में लाने, बाढ़ नियंत्रण तथा नदियों की मिएन्डिरिंग में कमी लाने के उद्देश्य से प्रस्तुत कार्ययोजना को मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके तहत नदी, जलाशय, नहर आदि का आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों/माध्यमों से सर्वेक्षण कर उन भागों का चिन्हीकरण किया जाएगा, जहां सिल्ट/बालू/बजरी जमा है। यह कार्य सैटेलाइट मैपिंग, सोनार बोट, इको साउन्उर, गूगल सर्विसेज आदि के माध्यम से कराया जाएगा। इनकी रीचवार मात्रा एवं क्वालिटी का आकलन किया जाएगा। सिल्ट/बालू/बजरी को बाहर निकालने एवं उसके भण्डारण में होने वाले व्यय का रीचवार आकलन कर प्राक्कलन तैयार किया जाएगा, जिसकी स्वीकृति सिंचाई विभाग के सक्षम अधिकारी द्वारा प्रदान की जाएगी। इसके पश्चात् कार्य सम्पादन हेतु निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी। निविदा प्रक्रिया की नियमावली एवं शर्तें प्रमुख अभियंता सिंचाई द्वारा निर्धारित की जाएंगी। निविदाओं में निविदा दाता से जल संरचना से आवश्यक सामग्री बाहर निकालने हेतु दरे मांगी जाएंगी। निविदा दाता को राज्य सरकार द्वारा निर्धारित राॅयलटी आदि जमा कराने के पश्चात् सामग्री का निस्तारण विक्रय करने का अधिकार होगा। सिंचाई विभाग की संस्तुति पर खनन विभाग द्वारा अधिकृत एजेन्सी को भण्डारण लाइसेन्स निर्गत किया जाएगा, जिसके उपरान्त नियमानुसार राॅयल्टी जमा करने पर खनन विभाग भण्डारण में रखी सामग्री के निस्तारण हेतु आवश्यक प्रपत्र जारी करेगा।
 
के.जी.एम.यू. तथा राज्य सम्पत्ति विभाग के कतिपय पदों की वेतन विसंगतियों को दूर करने का निर्णय
मंत्रिपरिषद ने के.जी.एम.यू. लखनऊ के डेन्टल मैकेनिक के कुल 20 पदों तथा डेन्टल हाइजिनिस्ट के कुल 32 पदों पर वेतन बैण्ड-2 एवं ग्र्रेड वेतन 4600 रुपए तत्काल प्रभाव से स्वीकृत करने का निर्णय लिया है। साथ ही प्लास्टिक सर्जरी विभाग के अंतर्गत प्रास्थेटिक मैकेनिक के एकल पद पर वेतन बैण्ड-2 एवं गे्रड वेतन 4800 रुपए तत्काल प्रभाव से अनुमन्य कराने का निर्णय लिया गया है।
राज्य सम्पत्ति विभाग के टेलीफोन आॅपरेटर संवर्ग को पुनर्गठित करते हुए टेलीफोन आॅपरेटर पदनाम से 50 प्रतिशत पद वेतन बैण्ड-1 एवं ग्रेड वेतन 2000 रुपए में, वरिष्ठ टेलीफोन आॅपरेटर पदनाम से 30 प्रतिशत पद वेतन बैण्ड-1 एवं ग्रेड वेतन 2800 रुपए में तथा वरिष्ठ टेलीफोन आॅपरेटर पदनाम से 20 प्रतिशत पद वेतन बैण्ड-2 एवं गे्रड वेतन 4200 रुपए में रखे जाने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान में राज्य सम्पत्ति विभाग के टेलीफोन आॅपरेटर संवर्ग में 74 पद उपलब्ध हैं।
डी.आर.डी.ए. के कार्मिकों की अधिवर्षता आयु को 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष किए जाने का निर्णय
मंत्रिपरिषद ने जिला ग्राम्य विकास अभिकरणों (डी.आर.डी.ए.) के कार्मिकों की अधिवर्षता आयु को 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष किए जाने का निर्णय लिया है।
उ.प्र. सचिवालय के समीक्षा अधिकारी व अपर निजी सचिव के पद को राजपत्रित प्रतिष्ठा प्रदान किए जाने का निर्णय
मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश सचिवालय के समीक्षा अधिकारी व अपर निजी सचिव के पद को राजपत्रित प्रतिष्ठा प्रदान किए जाने का निर्णय लिया है।
ज्ञातव्य है कि प्रदेश सचिवालय में समीक्षा अधिकारी तथा अपर निजी सचिव के पद का वेतनमान रु. 9,300-34,800 ग्रेड वेतन रु. 4,800 है। केन्द्रीय सचिवालय में यह वेतनमान अनुभाग अधिकारी के पद पर देय है, जो एक राजपत्रित पद है। चूंकि समीक्षा अधिकारी तथा अपर निजी सचिव के पद के कर्तव्य व दायित्व राजपत्रित पद हेतु आवश्यक 08 मानकों में से सामान्यतः 07 मानकों को पूर्ण करते हैं तथा प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा इन पदों को राजपत्रित प्रतिष्ठा प्रदान किए जाने की सहमति व्यक्त की गई है, इसलिए मंत्रिपरिषद ने इन पदों को राजपत्रित प्रतिष्ठा प्रदान करने का निर्णय लिया है।
बजट मैनुअल के प्रस्तर 94 में वित्तीय अधिकार की सीमा में वृद्धि के साथ-साथ 05 करोड़ रु. तक की वित्तीय स्वीकृति जारी करने का अधिकार प्रशासकीय विभाग में निहित करने का निर्णय
मंत्रिपरिषद ने बजट मैनुअल के प्रस्तर 94 में विभागीय मंत्री एवं वित्त मंत्री के वित्तीय अधिकार की सीमा में वृद्धि के साथ-साथ 05 करोड़ रुपए तक की परियोजनाओं के विस्तृत विवरण तैयार करने एवं उस पर सक्षम प्राधिकारी का अनुमोदन प्राप्त कर वित्तीय स्वीकृति जारी करने का अधिकार प्रशासकीय विभाग में निहित करने का निर्णय लिया है। इस परिप्रेक्ष्य में उ.प्र. बजट मैनुअल के प्रस्तर 94 के प्रथम दो परन्तुकों में संशोधन किया गया है, जिसके अनुसार जहां परियोजना/योजना अथवा सेवा की कुल लागत 05 करोड़ रुपए से अनधिक हो अथवा धनराशि डिक्री धनराशि का भुगतान करने के लिए अपेक्षित हो, वहां वित्त मंत्री तथा मुख्यमंत्री का अनुमोदन आवश्यक नहीं होगा। ऐसे मामलों में वित्त विभाग की पूर्व सहमति आवश्यक नहीं होगी। अग्रतर प्रतिबंध यह है कि जहां धनराशि 05 करोड़ रुपए से अधिक हो परन्तु 15 करोड़ रुपए से अनधिक हो, वहां मुख्यमंत्री का अनुमोदन आवश्यक नहीं होगा।
बजट मैनुअल के प्रस्तर 94 के तहत 05 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं के संबंध में विभागीय मंत्री, 05 करोड़ रुपये से अधिक व 15 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं पर वित्त मंत्री और 15 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं पर मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने की कार्यवाही की जाएगी।
सीमा पुनिया को 50 लाख एवं नरसिंह यादव को 15 लाख रु0 के पुरस्कार की घोषणा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इंचियोन एशियाई खेलों में महिलाओं की डिस्कस थ्रो प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक विजेता सीमा पुनिया एवं कुश्ती में कांस्य पदक विजेता श्री नरसिंह यादव को बधाई दी है। उन्होंने सुश्री पुनिया को 50 लाख रुपए एवं नरसिंह यादव को 15 लाख रुपए पुरस्कार स्वरूप दिए जाने की घोषणा भी की है।
श्री यादव ने कहा है कि सुश्री पुनिया व श्री यादव ने अपनी प्रतिभा, लगन और मेहनत के बल पर बेहतरीन प्रदर्शन करके देश व प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि इन खिलाडि़यों की इस उत्कृष्ट उपलब्धि से युवाओं को अच्छा प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलेगी।

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