संभल जिले में कानून भाजपाईयों के अधीन, खुलेआम शोषण कर रही है पुलिस

विवेचक द्वारा एसएसपी को लिखे गये पत्र की छायाप्रति।

संभल जिले में शासनादेशों और कानून के कोई मायने नहीं रह गये हैं। भाजपा नेता जो कह रहे हैं, उसे ही शासनादेश मान कर पुलिस अक्षरशः लागू कर रही है, जबकि मुख्यमंत्री निरंतर कह रहे हैं कि बदले की भावना से कार्य न करें। हालात भयावह हो चले हैं। पुलिस द्वारा प्रताड़ित किये जा रहे लोगों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है।

ताजा प्रकरण संभल (भीम नगर) जिले की कोतवाली गुन्नौर क्षेत्र के गाँव दबथरा श्याम का है, यहाँ के निवासी अध्यापक दुर्वेश यादव, अध्यापक उमेश यादव, बीएससी के छात्र चेतन्य यादव एवं दबथरा हिमंचल निवासी अजयपाल यादव और गाँव गैंहट निवासी ब्रह्म्नेश के विरुद्ध भुवनेश नाम के व्यक्ति द्वारा 7 अप्रैल को मुकदमा संख्या- 276/2017 धारा- 323, 147, 148, 149, 307, 452, 504 और 506 आईपीसी के अंतर्गत दर्ज कराया गया। विवेचना उप निरीक्षक संजय तोमर को दी गई। विवेचना के दौरान खुलासा हुआ कि पुरानी रंजिश के चलते झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया है। विवेचना में ही खुलासा हुआ कि घटना के समय नामजद घटना स्थल से बहुत दूर थे, साथ ही नामजदों के बीच लंबे समय से कोई संपर्क भी नहीं था। खुलासा हुआ कि घटना के दिन उमेश यादव और चेतन्य यादव बदायूं में थे। उमेश ने एसबीआई के एटीएम से रूपये निकाले थे, इस दौरान वह सीसीटीवी में कैद हो गया। बैंक ने वीडियो पुलिस को उपलब्ध करा दिया है, इसी तरह घटना के समय चेतन्य एक समारोह में डांस फ्लोर पर रिश्तेदारों के साथ डांस कर रहा था, जिसका भी वीडियो है, इसी तरह दुर्वेश बीमारी के चलते दिल्ली स्थित एक अस्पताल में भर्ती था, इसके अलावा वादी को थाने से मेडिकल परीक्षण कराने के लिए पत्र दिया गया, उसमें गोली लगने का उल्लेख नहीं किया गया है। साक्ष्य के आधार पर विवेचक कार्रवाई कर रहा था, लेकिन विवेचक पर साक्ष्यों को दरकिनार कर नामजदों के विरुद्ध कार्रवाई कराने का दबाव बनाया जाने लगा, तो विवेचक संजय तोमर ने पुलिस अधीक्षक के नाम कोतवाल के माध्यम से पत्र लिख दिया कि डॉक्टर ने गोली लगने की पुष्टि नहीं की है एवं डॉक्टर सप्लीमेंट्री रिपोर्ट भी नहीं दे रहा है, इस प्रकरण में राजनैतिक दबाव के चलते निष्पक्ष कार्रवाई करने में समस्या उत्पन्न हो रही है, इसलिए क्राइम ब्रांच या अन्य किसी थाना स्तर से विवेचना कराई जाये। विवेचक के पत्र को संस्तुति सहित कोतवाल ने सीओ को प्रेषित कर दिया और सीओ ने संस्तुति सहित पत्र एसएसपी को भेज दिया, जिसे एसएसपी ने यह लिख कर वापस लौटा दिया कि विवेचना स्थानांतरित करने का कोई औचित्य प्रतीत नहीं हो रहा है, विवेचना जारी रखें, इसके बाद पुलिस नामजदों के पीछे पड़ गई, जिससे नामजद भूमिगत हैं।

उक्त नामजदगी के पीछे बताया जाता है कि 22 अप्रैल 1998 को लालाराम नाम के व्यक्ति की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी, जिसमें गुलफाम सिंह यादव, हरी सिंह, चन्द्रप्रकाश आदि को वर्ष- 2012 में आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है, इसके बाद मृतक लालाराम के परिजन पर 17 अक्टूबर 2015 को फायरिंग की गई, जिसमें भुवनेश, विनोद आदि नामजद किये गये, इसके बाद अगले ही दिन 18 अक्टूबर 2015 को संतोष का छुरे से पेट फाड़ दिया, जिसका मुकदमा गुलफाम सिंह यादव, उनके बेटे दिव्यप्रकाश, हरी सिंह और राजेश के विरुद्ध दर्ज कराया गया एवं बाद में संतोष की मौत हो गई, लेकिन विवेचना के दौरान गुलफाम सिंह यादव और दिव्यप्रकाश दोष मुक्त कर दिए गये। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उनके साथ अंजाम दी गई घटनाओं के मुकदमों में फैसला कराने के उद्देश्य से सभी के विरुद्ध फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया है, इसमें गाँव गैंहट निवासी ब्रह्म्नेश को इसलिए फंसाया गया है कि वे पिछले मुकदमा में गवाह रहे हैं, इस फर्जी मुकदमे को दर्ज कराते समय सभी लोग संपर्क में थे, जिसका खुलासा मोबाईल की कॉल डिटेल से हो गया है। साक्ष्य और आधार सामने होने के बावजूद फर्जी फंसाये गये लोगों को स्थानीय पुलिस राहत देने को तैयार नहीं है। फर्जी मुकदमा में फंसाये गये लोगों का कहना है कि गुलफाम सिंह यादव गुन्नौर विधान सभा क्षेत्र से वर्ष- 2004 में भाजपा प्रत्याशी रहे हैं, उनके ही दबाव में उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।

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