धर्मेन्द्र यादव ने मेडिकल कॉलेज और ओवरब्रिज देकर छीन लिया स्वाभिमान

सांसद धर्मेन्द्र यादव

बदायूं पिछड़ा जिला इसलिए रहा है कि बदायूं जिले के लोग राजनैतिक रूप से जागरूक नहीं रहे हैं। स्वतंत्रता के बाद स्थानीय और बाहरी जनप्रतिनिधि तो चुने जाते रहे, पर यहाँ की मिटटी से राजनेता पैदा नहीं हो सका, जिसका दुष्परिणाम ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हुए भी संपूर्ण जिला झेलता रहा है। राजनैतिक दृष्टि न होने के कारण ही बदायूं जिला लंबे अर्से से बाहरी लोगों के कब्जे में हैं। शरद यादव और चिन्मयानंद जैसा धूर्त व्यक्ति भी यहाँ से सांसद बनने में कामयाब रहा, सलीम इकबाल शेरवानी ने तो यहाँ के लोगों की राजनैतिक विकलांगता का भरपूर लाभ उठाया और अब धर्मेन्द्र यादव बड़ी ही चालाकी के साथ राज कर रहे हैं।

बदायूं के भोले लोगों ने बाहरी व्यक्ति को पलकों पर बैठाया, इसका अहसान मानने की जगह बाहरी नेता उल्टा यह अहसान जताते रहे हैं कि वे पलकों पर बैठ कर कृतार्थ कर रहे हैं, ऐसा ही रवैया धर्मेन्द्र यादव का भी रहता है, वे अपनी बात शुरू ही मेडिकल कॉलेज से करते हैं, वे ओवरब्रिज और फोरलेन सड़कों का हवाला देते हुए यह संदेश देने का प्रयास करते हैं कि तुम्हारे जैसे लोगों की इस सबकी हैसियत नहीं थी, लेकिन मैंने फिर भी करा दिया, इस बात को इतनी बार और इतनी तरह से कहा जाता रहा है कि आम आदमी उन्हें विकास पुरुष कहने लगा, जबकि इस सबकी आड़ में यहाँ के लोगों का बहुत कुछ छीन लिया गया है।

सबसे पहले तो स्वाभिमान ही छीन लिया गया है, जिसका अहसास राजनैतिक चर्चा करते समय गैर बदायूंनी अक्सर करा देते हैं कि जो भी सही, पर आपके पास अपनी मिटटी में जन्मा एक नेता तक नहीं है, यहाँ के लोगों का भोलापन देखिये कि उनके बीच का कोई आदमी धर्मेन्द्र यादव को बाहरी कह दे, तो उस पर उल्टा सवार हो जाते हैं, मरने और मारने पर उतर आते हैं, क्योंकि उन्हें असलियत नहीं पता। मेडिकल कॉलेज और ओवरब्रिज का गुलदस्ता सामने रखा है, उसके पीछे से पूरे जिले के दलितों, पिछड़ों, बुजर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों तक का हिस्सा खाया गया है। धर्मेन्द्र यादव के चहेते माफिया ने ही यह सब किया और इस केरोसिन माफिया को दंडित कराने की जगह धर्मेन्द्र यादव ने टिकट भी दिलवा दिया। अगर, दुर्भाग्य से यह माफिया विधायक बन गया, तो आम आदमी का सब कुछ खा जायेगा।

फोरलेन सड़कों के पीछे का भयावह सच यह है कि बदायूं जिले में पिछले पांच वर्षों में विधिवत टेंडर प्रक्रिया ही नहीं हुई है। धर्मेन्द्र यादव ने कमीशन के आधार पर हर सड़क बेची है, उनकी बनाई सूची पर ही अफसर टेंडर जारी करते रहे हैं, जिससे कई लोग तो ठेकेदारी ही छोड़ गये। छोटे तबके के आहत ठेकेदार एकजुट हैं और सबक सिखाने का अवसर भी देख रहे हैं, ऐसे हालात हर विभाग और हर क्षेत्र के हैं, लेकिन शक्ति और भय के चलते लोग मौन धारण किये हुए हैं।

बात मान-सम्मान की करें, तो केंद्रीय स्तर के कैबिनेट मंत्री भी जिस क्षेत्र से सांसद चुने जाते हैं, उस क्षेत्र के लोगों के लिए उनके द्वार हर समय खुले रहते हैं, उन्हें विशेष सम्मान दिया जाता है, लेकिन धर्मेन्द्र यादव प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे, वे स्वयं को बदायूं का शहंशाह मान रहे हैं और नागरिकों को अपनी प्रजा, तभी उनके बदायूं स्थित आवास पर सशस्त्र जवान तैनात रहते हैं, जहाँ आम आदमी झांक तक नहीं सकता, लेकिन बदायूं के लोग इतने भोले हैं कि अभी यह सब समझ नहीं पा रहे हैं, जिस दिन लोगों में राजनैतिक जागरूकता का संचार हो गया, उसी दिन बदायूं जिला भी विकसित श्रेणी में सम्मिलित हो जायेगा।

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