गीत के सागर में डुबो कर स्मृति वंदन महोत्सव का समापन

काव्य पाठ सुनते सांसद धर्मेन्द्र यादव और अन्य तमाम श्रोतागण।
काव्य पाठ सुनते सांसद धर्मेन्द्र यादव और अन्य तमाम श्रोतागण।

बदायूं में तीन दिवसीय स्मृति वन्दन महोत्सव- 2014 का बीती रात विधिवत समापन हो गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरे का भी आयोजन किया गया, जिसका शुभारंभ मुख्य अतिथि सांसद धर्मेन्द्र यादव व विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध गीतकार सोम ठाकुर ने माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अध्यक्षता गीत का सागर कहे जाने वाले गीतकार गोपाल दास नीरज ने की।

सर्व प्रथम सोनभद्र से आईं रचना तिवारी ने सरस्वती वन्दना की, जिसके बाद फरीदाबाद से आये धर्मेश अविचल व पटियाली से आये शरद लंकेश ने गति प्रदान की। खुशबू रामपुरी ने ऐसी खुशबू विखेरी कि संपूर्ण वातावरण खुशबू में ही हो गया, लेकिन अलीगढ़ से आये लटूरी लट्ठ ने हास्य की ऐसी लाठी चलाई कि श्रोता हंसी से त्राहि-त्राहि करने लगे, ऐसे ही अज्म शाकिरी बेहद पसंद किये गये। गोपाल दास नीरज को श्रोताओं ने ऐसे सुना, जैसे कोई गीत के देवता को सुनता, वहीं सोम ठाकुर ने गीत से ऐसा मंत्र फूंका कि प्रत्येक श्रोता एकाग्रचित हो गया। फरुखाबाद से आये डॉ. शिवओम अम्बर संचालन करते हुए ही श्रोताओं के मन-मस्तिष्क पर छा गये थे, लेकिन रचनाओं से भी उन्होंने श्रोताओं को एक नये शिखर पर ले जाकर बैठा दिया। इसके अलावा कई अन्य कवियों ने रचना पाठ किया। स्मृति वन्दन ने मुख्य अतिथि सांसद धर्मेन्द्र यादव के हाथों सोम ठाकुर, शरद लंकेश, अज्म शाकिरी और डॉ. शिवओम अम्बर को विशेष रूप से पुरस्कृत भी कराया। महोत्सव के आयोजन में मुख्य संयोजक भानु प्रकाश “भानु” व संयोजक भूराज सिंह “राज लॉयर”, डॉ. अरविन्द धवल और धर्मेन्द्र कुमार के साथ डॉ. निशि अवस्थी, डॉ गीतम सिंह, डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी, डॉ. उमा सिंह गौर, सुशील कुमार, सोमेन्द्र यादव, संजीव सक्सेना, पवन गुप्ता व प्रमोद यादव सहित अन्य तमाम लोगों का सहयोग रहा।

हास्य का पात्र बनने पर सांसद ने की गंभीर टिप्पणी

सांसद धर्मेन्द्र यादव अब बदायूं में जनसामान्य के बीच बेहद लोकप्रिय हो गये हैं। अधिकाँश लोगों का उनसे आत्मीय रिश्ता बन गया है। लोग उनके स्वभाव को जान गये हैं, सो अधिकाँश लोग उनके साथ बड़े नेता की तरह नहीं, बल्कि प्रिय परिजन की तरह व्यवहार करने लगे हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि की हैसियत से सांसद धर्मेन्द्र यादव कवियों को सम्मानित कर रहे थे। वे कवि को शॉल उड़ा कर और स्मृति चिन्ह देकर बैठ जाते, तो संचालक एक और कवि को सम्मानित करने के लिए बुला लेता। यह क्रम जब दस से अधिक बार हो गया, तो सामने बैठे उनके चाहने वाले उनके उठते ही ठहाका लगाने लगते। अगली बार वे जैसे ही उठते, वैसे ही उनके चाहने वाले हंसने लगते। सांसद समझ गये कि सामने बैठे उनके प्रिय उन्हें हास्य का पात्र बना चुके हैं, तो वे स्वयं भी आनंद लेने लगे, लेकिन उन्होंने एक टिप्पणी भी की, जिसे सुन कर पंडाल में बैठा प्रत्येक श्रोता गंभीर हो गया। उन्होंने कहा कि वे ऐसे लोगों का सम्मान कर रहे हैं, जिनका सानिध्य पाना ही बड़ी बात होती है, ऐसे में उन्हें अगर, पूरी रात भी उठना-बैठना पड़े, तो उन्हें ख़ुशी ही होगी, साथ ही उन्होंने समस्त साहित्यकारों से हिंदी को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

 काव्य पाठ करते हुए खुशबू रामपुरी, संचालन करते हुए डॉ. शिवओम अम्बर और अध्यक्षता करते दोपाल दास नीरज।

काव्य पाठ करते हुए खुशबू रामपुरी, संचालन करते हुए डॉ. शिवओम अम्बर और अध्यक्षता करते डॉ. गोपाल दास नीरज।

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