सवाल: पायलट बाबा हिन्दुस्तानी संत हैं या चीनी?

पायलट बाबा के आश्रम में मंदिर के ठीक सामने नज़र आ रहीं ड्रैगन की मूर्तियां।
पायलट बाबा के आश्रम में मंदिर के ठीक सामने नज़र आ रहीं ड्रैगन की मूर्तियां।

किरन कांत

विश्व विख्यात हिंदुस्तानी संत पायलट बाबा को चीन के राष्ट्रीय चिन्ह ड्रैगन से बेहद लगाव है। वह अपने हर आश्रम में सबसे पहले विशाल ड्रैगन की मूर्तियाँ लगवाते हैं और फिर बाकी कार्य कराते हैं। हालांकि ड्रैगन से प्रेम के चलते कई बार उनका विरोध भी हुआ है, लेकिन वह फिर भी मानने को तैयार नहीं हैं। इस बार तो उन्होंने प्रेम की सीमा ही पार कर दी है, इस बार उन्होंने भगवान शिव की प्रतिमा के बराबर में ड्रैगन को भी विराजमान कर दिया है।

उत्तराखंड की विश्व विख्यात धर्म नगरी हरिद्वार में जूना अखाड़े के सबसे ताकतवर कहे जाने वाले संत पायलट बाबा का गंगा किनारे आश्रम बन रहा है। इस भव्य आश्रम में चीन का राष्ट्रीय चिन्ह ड्रैगन की विशाल मूर्तियाँ नज़र आ रही हैं। इससे पहले उनके उत्तरकाशी आश्रम में बने ड्रैगन को लेकर विरोध प्रदर्शन हो चुका है। विरोध के चलते उन्हें ड्रैगन की मूर्तियाँ हटवानी पड़ी थीं, लेकिन उनका ड्रैगन प्रेम फिर भी कम नहीं हुआ।

पायलट बाबा के आश्रम में लगी ड्रैगन की मूर्ति।
पायलट बाबा के आश्रम में लगी ड्रैगन की मूर्ति।

पायलट बाबा के हर आश्रम में अंदर दाखिल होने के पहले दरवाजों पर ही ड्रैगन की प्रतिमायें नज़र आ जायेंगी। हरिद्वार में बन रहे आश्रम में भी ड्रैगन की मूर्तियाँ स्थापित हो चुकी हैं। ऐसा नहीं है कि पायलट बाबा को ज्ञान न हो। वह खुल कर मान रहे हैं और ड्रैगन की तुलना भारत के राष्ट्रीय चिन्ह से भी कर रहे हैं। उन्होंने चीन की परंपराओं और संस्कृति की भी ऐसे प्रशंसा की, जैसे वे सनातनी संत नहीं, बल्कि चीनी परंपराओं और चीनी संस्कृति के प्रचारक हों। उन्होंने कहा कि चीन के लोग बहुत अच्छे हैं।

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