डीआरडीए की लापरवाही और पुलिस की दबंगई से सांसद बदनाम

रोडवेज बस अड्डे के सामने बना विवादित पुलिस सहायता केंद्र।
रोडवेज बस अड्डे के सामने बना विवादित पुलिस सहायता केंद्र।

अधिकारियों-कर्मचारियों की मनमानी का आलम यह है कि सत्ता पक्ष के सांसद और विधायकों की निधि में भी गड़बड़ करा रहे हैं, जिससे उनके नाम पर भी धब्बा लग सकता है, इससे भी बड़े आश्चर्य की बात यह है कि खुलासा होने के बावजूद संबंधित अफसरों व कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो रही। अधिकारी मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रदेश में किसी अन्य दल की सरकार आ गई, तो जनप्रतिनिधि भी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि बदायूं लोकसभा क्षेत्र के लोकप्रिय व युवा सांसद धर्मेन्द्र यादव ने पुलिस विभाग के लिए सहायता केंद्र के निर्माण को अपनी निधि से धन दिया था। सांसद व विधायक निधि का लेखा-जोखा मुख्य विकास अधिकारी के संज्ञान में जिला ग्राम्य विकास अभिकरण द्वारा किया जाता है। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण ही यह देखता है कि धन राशि जिसके लिए प्रस्तावित की गई है, वह संस्था मानक के अनुरूप है या नहीं। सांसद के प्रस्ताव पर विभाग ने आरईएस को भवन निर्माण के लिए धन आहरित कर दिया और आरईएस ने रोडवेज बस अड्डे के गेट के बराबर में भवन बना दिया, जबकि भवन फुटपाथ पर बनाया गया है। संबंधित जगह पुलिस विभाग की है ही नहीं, साथ ही नव-निर्मित भवन के स्थान पर वर्षों से रिक्शा स्टैंड था और टीन शैड पड़ा था, जहां वर्षा, धूल व धूप से बचने के लिए रिक्शा चालक खड़े होते थे, लेकिन पुलिस ने दबंगई में रिक्शा स्टैंड समाप्त कर भवन का निर्माण करा लिया।

सांसद धर्मेन्द्र यादव द्वारा निरस्त कराए गये प्रस्तावों के पत्र की छाया प्रति।
सांसद धर्मेन्द्र यादव द्वारा निरस्त कराए गये प्रस्तावों के पत्र की छाया प्रति।

रोडवेज बस अड्डे का क्षेत्र बाबू राम मार्केट की चौकी के क्षेत्र में आता है, लेकिन उगाही के लालच में संबंधित पुलिस चौकी का स्टाफ हर समय रोडवेज बस अड्डे पर ही रहता है, इसीलिए भवन का निर्माण भी रोडवेज पर ही करा लिया। हैरत की बात यह भी है कि भवन पर दो-तीन दिन पहले एक शिलान्यास संबंधी पत्थर भी लगाया गया है, जिस पर सांसद धर्मेन्द्र यादव के साथ एमएलसी बनवारी सिंह यादव व सदर विधायक आबिद रज़ा का नाम अंकित है, इस पत्थर पर डीएम के रूप में चन्द्रप्रकाश का नाम लिखा है, जबकि चन्द्रप्रकाश कई माह पूर्व रामपुर तबादले पर जा चुके हैं।
रिक्शा चालक अब तक समझ रहे थे कि पुलिस ने दबंगई में भवन बना लिया है, लेकिन पत्थर लगने के बाद यह खुलासा हो गया कि सांसद के धन से भवन बना है, जिससे रिक्शा चालकों में नेताओं के प्रति भी आक्रोश नजर आ रहा है, लेकिन डीआरडीए के कर्मियों, पीडी व सीडीओ ने नियमों पर ध्यान दिया होता, तो धन आहरित ही नहीं होता, क्योंकि भवन उसी स्थान पर बन सकता था, जिस पर पुलिस का मालिकाना अधिकार होता।
इसी तरह एमएलसी बनवारी सिंह यादव की निधि को लेकर बवाल हो चुका है। उन्होंने सांसद के कहने पर बदायूं क्लब के लिए धन प्रस्तावित किया था और सांसद की रूचि के चलते अफसरों ने तत्काल धन आहरित कर दिया, लेकिन बाद में ज्ञात हुआ कि बदायूं क्लब रजिस्टर्ड ही नहीं है, साथ ही क्लब के पदेन अध्यक्ष डीएम होते हैं। गैर पंजीकृत संस्था और जिस संस्था के अध्यक्ष डीएम हों, उसे धन दिया ही नहीं जा सकता, यह प्रकरण भी अभी तक लटका हुआ है, ऐसे तमाम प्रकरण सरकार रहने तक दबे ही रहते हैं, लेकिन सरकार बदलने पर विरोधी नेता कार्रवाई कराते हैं, तो कहा जाता है कि बदले की भावना से फंसाया गया है।
उधर सांसद धर्मेन्द्र यादव ने अपने पांच प्रस्ताव निरस्त करा दिए हैं, लेकिन सांसद को अनधिकृत रूप से रोडवेज बस अड्डे पर बनाये गये पुलिस सहायता केंद्र के संबंध में भी अपने विचार जनता के सामने रखने होंगे कि रिक्शा स्टैंड समाप्त करने का उनका कोई उद्देश्य नहीं था, साथ ही संबंधित कर्मचारियों व अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई करानी होगी, वरना गरीब तबके के रिक्शा चालक यही समझते रहेंगे कि उनका स्टैंड सांसद ने खत्म करा दिया।

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