मानव तस्करी से जुड़े प्रकरण में भी 36 घंटे बाद नहीं हुआ पीएम

पोस्टमार्टम हाउस पर रखे शव का फाइल फोटो।
पोस्टमार्टम हाउस पर रखे शव का फाइल फोटो।

मानव तस्करी से जुड़ी घटना प्रकाश में आने के बावजूद पुलिस पूरी तरह लापरवाह बनी हुई है। हद की बात तो यह है कि पुलिस 36 घंटे बाद भी शव का पोस्टमार्टम नहीं करा पाई है। मृतका का यौन उत्पीड़न हुआ होगा, तो 24 घंटे बाद योनि में स्पर्म मिलने की संभावना कम हो जाती है।

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार रात को बदायूं जिले में स्थित कादरचौक थाना क्षेत्र के गाँव जरासी में पेड़ पर लगभग 24 वर्षीय एक महिला की लाश लटकी मिली थी। शव के साथ एक पहचान पत्र मिला, जिस पर संगीता लोमगा, पिता का नाम सोमनाथ लोमगा, आयू- 22 वर्ष, गाँव सेरेंगदा, पश्चिमी सिंहभूम दर्ज है, जो झारखंड राज्य में बताया जा रहा है। पुलिस ने शनिवार को पंचनामा भर कर शव पोस्टमार्टम के लिए मुख्यालय तो भेज दिया, लेकिन 36 घंटे बीत जाने के बाद भी शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि महिला डॉक्टर की कमी के चलते पोस्टमार्टम नहीं हुआ। सवाल उठता है कि महिला डॉक्टर न होने की दशा में पुलिस शव पोस्टमार्टम के लिए बरेली क्यूं नहीं ले गई?

असलियत में फिलहाल उक्त प्रकरण मानव तस्करी से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। लंबे अर्से से जिले भर में ऐसा गिरोह सक्रीय है, जो बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा व मद्रास आदि से गरीब परिवारों की लड़कियों को खरीद कर या धोखे से ले आता है और फिर उन्हें यहाँ लाकर बेच देता है। गिरोह द्वारा लाई हुईं लड़कियाँ जिले भर के गाँवों में हैं, जो अघोषित रूप से कई-कई लोगों की पत्नियाँ हैं। कुछेक तो ऐसी हैं, जो कई-कई जगह बिक चुकी हैं। गिरोह कुछ लड़कियों को धंधेबाजों को भी बेच देता है। कुछेक सही व्यक्ति के हाथों में पहुंच जाती हैं, लेकिन अधिकांश लड़कियों का जीवन बर्बाद ही नजर आता है, जिनमें कुछ की जिन्दगी तो जानवरों से भी बदतर कही जा सकती है। चूँकि यह सब पुलिस की जानकारी में ही होता रहा है, इसीलिए पुलिस इस घटना को भी दबाने का प्रयास करती नजर आ रही है।

जानकारों का कहना है कि यौन उत्पीड़न की दशा में स्पर्म 24 घंटे तक ही रहते हैं, ऐसे में अगर, इस महिला के साथ भी ऐसा कुछ हुआ होगा, तो 36 घंटे बीत जाने के कारण मेडिकल रिपोर्ट में पुष्टि नहीं हो सकेगी, जिससे पुलिस का सिर दर्द खत्म हो जायेगा।

बदायूं जिले में यूं तो चप्पे-चप्पे पर नेता नजर आते हैं, साथ ही सामाजिक संगठनों की भी बाढ़ आई हुई है, लेकिन इस तरह की महिलाओं के पक्ष में आवाज उठाने वाला दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा, जिससे गिरोह और पुलिस लंबे समय से मनमानी करते आ रहे हैं।

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