देश को ईमानदार लोगों की सख्त आवश्यकता है: राज्यपाल

  • राज्य सरकार प्रदेश के युवाओं को उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है: मुख्यमंत्री
  • विख्यात संगीतकार रवीन्द्र जैन को यशभारती सम्मान से सम्मानित करने की घोषणा
  • दीक्षान्त समारोह जैसे आयोजन अत्यन्त महत्वपूर्ण: मुलायम सिंह यादव
  • मुलायम सिंह यादव को डी. लिट् की मानद उपाधि प्रदान की गई
लखनऊ के डाॅ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षान्त समारोह में मौजूद राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव।
लखनऊ के डाॅ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षान्त समारोह में मौजूद राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव।
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि देश को ईमानदार लोगों की सख्त आवश्यकता है। छात्रों को मुस्कुराने (स्माइल), सराहने (एप्रीशीएट), दूसरों को छोटा न साबित करने (डोण्ट बिलिटिल अदर्स) तथा चीजों को और बेहतर ढंग से करने (फाइण्ड वेज टु डू थिंग्ज इन ए बेटर वे) का मूलमंत्र देते हुए उन्होंने कहा कि वे अब अपना भविष्य गढ़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने छात्रों का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपने लिए जो भी कार्यक्षेत्र चुनें, उसमें ईमानदारी से उत्कृष्टता प्राप्त करने का प्रयास करें। उन्होंने सभी छात्रों को भविष्य के लिए अपना आशीर्वाद तथा शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपने जीवन में लगातार सकारात्मक प्रयास करते रहें, ताकि वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें तथा अपने माता-पिता, विश्वविद्यालय, प्रदेश तथा देश का नाम रौशन कर सकें।
राज्यपाल राम नाईक ने ये विचार मंगलवार को लखनऊ के डाॅ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षान्त समारोह कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए। गौरतलब है कि राज्यपाल इस विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष भी हैं। इस अवसर पर उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व रक्षा मंत्री, भारत सरकार तथा लोकसभा सांसद मुलायम सिंह यादव को डी.लिट् की मानद उपाधि प्रदान करते हुए कहा कि उनका नेतृत्व अनुकरणीय तथा वन्दनीय है। उन्होंने कहा कि नेता जी का व्यक्तित्व इतना विशाल है कि इस विश्वविद्यालय को उन्हें उपाधि देते हुए गौरव की अनुभूति हो रही है। मुलायम सिंह यादव के व्यवहार से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि लगातार आठ बार विधायक चुना जाना, लोकसभा में सांसद के रूप में अपने क्षेत्र का निरंतर प्रतिनिधित्व करना तथा तीन बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनना बहुत बड़ी उपलब्धियां हैं। उन्होंने छात्रों को मुलायम सिंह यादव के व्यक्तित्व से प्रेरणा लेने को कहा। उन्होंने डाॅ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय को अनूठा बताते हुए कहा कि यही एक मात्र ऐसा शिक्षण संस्थान है, जहां सामान्य वर्ग के छात्र तथा विकलांग छात्र एक साथ अध्ययनरत हैं।
कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के युवाओं को उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है। इस विश्वविद्यालय को विश्वस्तरीय बनाने के लिए सरकार सारी मदद उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विकलांग लोगों के उत्थान के लिए तत्पर है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री इस विश्वविद्यालय की सामान्य परिषद के अध्यक्ष भी हैं।
श्री यादव ने दीक्षान्त समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए सभी शिक्षकों को बधाई दी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में डाॅ. शकुन्तला मिश्रा पुनर्वास विश्वविद्यालय को एक अभिनव प्रयोग बताते हुए उन्होंने कहा कि बहुत कम समय में इस विश्वविद्यालय ने शिक्षा के मामले में अपनी खास पहचान बनायी है। यह संस्थान समाज की विकसित होती सोच का फल है। उन्होंने कहा कि समाजवादी लोग शिक्षा के महत्व को भली-भांति समझते हैं, इसीलिए नेता जी के समय से ही प्रदेश में शिक्षा के विकास के लिए समाजवादी सरकारें लगातार कार्य करती रही हैं।
उत्तर प्रदेश के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रदेश के सभी प्रकार के आंकड़ों का प्रभाव देश पर पड़ता है। ऐसे में इसे अनदेखा करना बहुत बड़ी भूल होगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विजिटिंग प्रो. के रूप में आमंत्रित विख्यात संगीतकार रवीन्द्र जैन को यश भारती सम्मान से सम्मानित करने की भी घोषणा की।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व रक्षा मंत्री तथा लोकसभा सांसद मुलायम सिंह यादव ने सभी उपाधि प्राप्त करने वाले छात्रों को बधाई देते हुए आशा की कि वे अपनी कार्यशैली से सभी को प्रभावित करेंगे। उन्होंने कहा कि सभी छात्र-छात्राओं के समक्ष भविष्य में बड़ी-बड़ी चुनौतियां आएंगी, जिनसे उन्हें निपटना होगा। उन्होंने दीक्षान्त समारोह को अत्यन्त महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से हम सबको बड़ी प्रेरणा मिलती है। उन्होंने उपाधि पाने वाले सभी छात्र-छात्राओं को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए पिछड़ा वर्ग कल्याण तथा विकलांग कल्याण मंत्री अम्बिका चौधरी ने कहा कि इस विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने विकलांग छात्रों की शिक्षण, हाॅस्टल तथा मेस की फीस माफ करने का निर्णय लिया है।
कार्यक्रम को लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव, खाद्य एवं रसद मंत्री रघुराज प्रताप सिंह “राजा भइया” तथा यूनीवर्सिटी आॅफ सेण्ट्रल लंकाशायर की प्रो. उलरीके जीशान ने भी सम्बोधित किया। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारम्भ राज्यपाल राम नाईक तथा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम का संचालन कुलपति डाॅ. निशीथ राय ने किया। इस मौके पर राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तथा मुलायम सिंह यादव को प्रतीक चिन्ह के रूप में उनके चित्र भेंट किए गए। मंत्रिगणों शिवपाल सिंह यादव, अम्बिका चौधरी तथा रघुराज प्रताप सिंह “राजा भइया” को भी प्रतीक चिन्ह भेंट किए गए। इस अवसर पर प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल, विशेष सचिव मुख्यमंत्री रिग्जियान सैम्फिल, विशेष कार्याधिकारी जगदेव सिंह, डाॅ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के विभिन्न पदाधिकारी, उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र एवं छात्राएं, शिक्षक तथा गणमान्य लोग उपस्थित थे।
ज्ञातव्य है कि डाॅ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2008 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गई थी। वर्तमान में विश्वविद्यालय के चार संकायों (कला, शिक्षा, वाणिज्य और विधि) के बारह विभागों में कुल 21 स्नातक और परास्नातक स्तर के पाठ्यक्रम चलाये जा रहे हैं। वर्तमान सत्र से यहाॅ पी.एच.डी. पाठ्यक्रम भी शुरू किया गया है। विश्वविद्यालय परिसर में एक लिम्ब सेण्टर भी स्थापित करने के निर्देश मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए हैं। आज के दीक्षान्त समारोह में उपाधि पाने वालों को कुलाध्यक्ष पदक, मुख्यमंत्री पदक, मुलायम सिंह यादव स्वर्ण पदक, डाॅ. शकुन्तला मिश्रा स्वर्ण पदक तथा कुलपति स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान समाजवाद पर डाॅ. वीरेन्द्र यादव द्वारा लिखित पुस्तकों ‘डाॅ. राममनोहर लोहिया समाजवादी विमर्श’ तथा ‘भारत में समाजवाद दशा एवं दिशा’ का विमोचन भी किया गया।

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