सांसद के नाम पर लिया तीस-तीस प्रतिशत कमीशन, हड़कंप

भाजपा सांसद धर्मेन्द्र कश्यप
भाजपा सांसद धर्मेन्द्र कश्यप

ठगों व भ्रष्टाचारियों के हौसले इतने बुलंद होते जा रहे हैं कि अब सांसद के नाम पर भी लोगों को बेखौफ ठगने लगे हैं। सांसद के नाम से डीएम को फर्जी पत्र जारी कर स्कूल प्रबंधकों को न सिर्फ तीन-तीन लाख रूपये देने की संस्तुति कर दी, बल्कि प्रबंधकों से रिश्वत के रूप में तीस प्रतिशत नकद कमीशन भी ले लिया। खुलासा होने पर अफसरों व कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।

सूत्रों के अनुसार आंवला लोकसभा क्षेत्र के भाजपा सांसद धर्मेन्द्र कश्यप के नाम का पत्र 8 मई 2015 को जिलाधिकारी- बदायूं को दिया गया, जिसमें मोरपाल सिंह प्राथमिक विद्यालय ग्राम सिकन्दराबाद विकास क्षेत्र उसावां, जगन्नाथ सिंह पब्लिक स्कूल ग्राम ग्योती लभारी विकास क्षेत्र म्याऊँ, मैके सिंह मैमोरियल शिक्षा निकेतन ग्राम रतेनगला विकास क्षेत्र उसावां व भगवान सिंह मैमोरियल जनकल्याण शिक्षण संस्थान ग्राम धर्मपुर मंसानगला विकास क्षेत्र म्याऊँ को तीन-तीन लाख रूपये देने की संस्तुति की गई थी।

सांसद का उक्त पत्र जिलाधिकारी कार्यालय से सीडीओ कार्यालय पहुंचा और वहां से डीआरडीए के पीडी के समक्ष पहुंच गया, तो पत्र पर धन जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। प्रबंधकों से पंजीकरण व मान्यता से संबंधित कागजात मांगने का पत्र पीडी की ओर से जारी हो गया, इस बीच किसी तरह सांसद धर्मेन्द्र कश्यप को पता चल गया, तो उन्होंने जिलाधिकारी से फोन पर बात की और पत्र के संबंध में अनभिज्ञता जाहिर करते हुए सभी संबंधित विद्यालयों को धन आहरित न करने को कहा, इसके बाद जिलाधिकारी कार्यालय के साथ विकास विभाग व डीआरडीए में हड़कंप मच गया।

सांसद धर्मेन्द्र कश्यप के पत्र का सच जानने के उददेश्य से जिलाधिकारी ने सभी विद्यालयों के प्रबंधकों को बुलवाया, लेकिन जिलाधिकारी के अवकाश पर होने के कारण प्रबंधकों की मुलाकात जिलाधिकारी से नहीं हो सकी। डीआरडीए में आये प्रबंधकों ने एक और सनसनीखेज खुलासा किया कि उनसे एक व्यक्ति ने तीस प्रतिशत कमीशन के रूप में नब्बे-नब्बे हजार नकद ले लिए हैं, इसके अलावा वे कुछ नहीं जानते। उन्हें तो यही बताया गया था कि कमीशन के रूपये सांसद के पास ही जायेंगे और रूपये लेने के बाद ही वे पत्र जारी करेंगे।

खैर, यह एक गंभीर प्रकरण हैं, लेकिन दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई कराने में सांसद धर्मेन्द्र कश्यप व जिले के वरिष्ठ अफसर कितनी रूचि लेते हैं, यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। फिलहाल पूरा प्रकरण चर्चा का विषय बना हुआ है, साथ ही अधिकांश लोग ठगों और भ्रष्टाचारियों के बुलंद हौसलों को लेकर स्तब्ध हैं।

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