भ्रष्टाचार, लापरवाही और निरंकुशता का पर्याय बनती जा रही है यूपी- 100 सेवा

सड़क किनारे गाड़ी में आराम करते यूपी- 100 सेवा के कर्मचारी।

बदायूं जिले में यूपी- 100 से व्यवस्था दुरुस्त होने की जगह खराब ज्यादा होने लगी है। कभी अवैध उगाही के आरोप लगते हैं, कभी पक्षपात के आरोप लगते हैं, कभी आपस में ही भिड़ जाते हैं। लापरवाही और मनमानी का पर्याय बन कर उभरी है यूपी- 100 सेवा। एसएसपी चन्द्रप्रकाश तेजतर्रार हैं और घटनाओं को गंभीरता से लेकर त्वरित कार्रवाई भी कर देते हैं, वरना हालात और भी भयावह हो जाते।

सहसवान क्षेत्र में 14-15 जुलाई की रात में गाय-बैलों की हत्या कर दी गई थी, इस घटना में पीआरवी वैन- 1321 के कर्मचारी प्रभारी आरक्षी सत्यवीर, आरक्षी वसीम अहमद व आरक्षी चालक राजकुमार पर आरोप लगे थे, जिस पर एसएसपी चन्द्रप्रकाश ने निलंबन की कार्रवाई की थी, इसी तरह सिविल लाइन थाना क्षेत्र में 22 जुलाई को अजयपाल की हत्या कर दी गई, इस घटना में यूपी- 100 के स्टाफ और थाना पुलिस पर आरोप लगे, तो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चन्द्रप्रकाश ने बीट आरक्षी रविन्द्र कुमार को सूचना मिल जाने के उपरान्त कोई कार्यवाही न करने के कारण लापरवाही बरतने पर निलंबित कर दिया था, इसके बाद थाना बिल्सी क्षेत्र में यूपी- 100 के सिपाही धर्मवीर ने एसओ अमित कुमार सिंह व मुंशी दिग्विजय सिंह पर मारपीट करने का आरोप लगाया, जिसकी एसएसपी ने जांच कराई, तो तीनों को निलंबित कर दिया और वहां ट्रेनी सीओ विजय प्रताप सिंह को प्रभारी बना कर तैनात कर दिया, इन घटनाओं से पुलिस की बड़ी फजीहत हुई है।

असलियत में पुलिस विभाग के ही कर्मचारी यूपी- 100 सेवा में लिए गये हैं, लेकिन उन पर एसओ का अंकुश नहीं है, उन पर कंट्रोल रूम से सीधे कॉल पहुंचती है, जिस पर वह कार्रवाई करते हैं, इस स्वतंत्रता का यूपी- 100 के कर्मचारी दुरूपयोग भी करते नजर आ रहे हैं। पूर्व में विभाग में ही होने के कारण उन्हें हर तरह के धंधों की जानकारी है, उन्हें यह भी पता है कि थाना पुलिस कहां से अवैध वसूली करती है, जिसमें वह बराबर का भागीदार बनना चाहती है, जिसको लेकर टकराव होता रहता है, इसके अलावा यूपी- 100 की गाड़ियों के प्वाइंट निश्चित हैं, उनके आसपास के गाँवों से की गई कॉल किस गाड़ी पर आयेगी, यह तय है, सो यूपी- 100 के कर्मचारियों के भी गाँवों में कई सारे लोग चहेते बन गये हैं, जो कॉल करते हैं और यूपी- 100 के कर्मचारियों की अवैध वसूली में सहायक बनते हैं। यूपी- 100 के कर्मचारियों को यह भी अधिकार है कि वह मौके पर जायेंगे और आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद थाना पुलिस को सौंप देंगे, साथ ही घटना के संबंध में थाना पुलिस को रिपोर्ट करेंगे, इस अधिकार का भी कई बार दुरूपयोग होता है। बताते हैं कि यूपी- 100 वाले रूपये लेकर गलत रिपोर्ट देते हैं, जिससे कई बार पीड़ित पर ही कार्रवाई करा देते हैं। 

यूपी- 100 और थाना पुलिस के टकराव की घटनायें बढ़ती जा रही हैं, इसे रोकने के लिए बड़े स्तर पर सुधार की आवश्यकता है यूपी- 100 में जातिगत आधार पर भी असमानता बताई जाती है, जिसमें छंटनी होनी चाहिए, साथ ही जिले से बाहर तबादला होना चाहिए, जिससे परिचितों को लाभ न पहुंचा सकें

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