मुख्य सचिव के समस्या समाधान करने के कड़े निर्देश

मुख्य सचिव आलोक रंजन
मुख्य सचिव आलोक रंजन
उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने समस्त जिलाधिकारियों एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान प्राथमिकता से सुनिश्चित कराया जाना होगा। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को यह संदेश अवश्य जाना चाहिए कि जनपदों में तैनात अधिकारी उनकी समस्याओं के निराकरण हेतु सजग एवं प्रयत्नशील हैं। उन्होंने कहा कि जनपद, तहसील एवं ब्लाक स्तर पर तैनात समस्त अधिकारी टीम वर्क के साथ कार्यों को पूरी लगन एवं तन्मयता से करें, ताकि समस्याओं का निस्तारण स्थानीय स्तर पर तत्काल हो सके। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अपने अधीनस्थ क्षेत्रों का भ्रमण कर विकास कार्यों का निरीक्षण करने के साथ-साथ गांवों मेें रात्रि विश्राम करना होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी जनपद से लखनऊ में आकर आम नागरिक ने समस्या के समाधान हेतु स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने की जानकारी दी, तो सम्बन्धित अधिकारियों को दण्डित किया जायेगा।
मुख्य सचिव आज वीडियो कान्फ्रेन्सिंग के माध्यम से लखनऊ स्थित योजना भवन में यह निर्देश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि सम्बन्धित अधिकारी अपने अधीनस्थ तहसीलों, थानों और विकासखण्डों का नियमित रूप से निरीक्षण अवश्य करें। उन्होंने कहा कि लम्बित राजस्व वादों का निस्तारण प्राथमिकता से सुनिश्चित किया जाय। उन्होंने कहा कि भूमि विवादों का निस्तारण प्राथमिकता से करने हेतु ऐसे ग्रामों को जहां पर भूमि विवाद से सम्बन्ध्ति 05 या अधिक प्रकरण लम्बित हों, चिन्हित किया जाय तथा ऐसे ग्रामों  में जनपद के प्रत्येक थानावार राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीमों का गठन कर ऐसे भूमि विवाद प्रकरणों का निस्तारण मौके पर जाकर कराया जाय।
श्री रंजन ने कहा कि दुधारू पशुओं के अवैध वध एवं उनके अनाधिकृत परिवहन की शिकायतें प्राप्त होने पर स्थानीय स्तर पर आवश्यक कार्यवाही प्राथमिकता से समय से सुनिश्चित कराई जाय। उन्होंने कहा कि ऐसे अवैध कार्यों में लिप्त किसी भी कर्मी को बख्शा न जाय। उन्होंने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाय कि अवैध मद्य निष्कर्षण एवं बिक्री किसी भी जनपद में न होने पायेे, ताकि कोई अप्रिय घटना न घटित हो। उन्होंने कहा कि सम्बन्धित जिलाधिकारी अपने जनपद के अभिसूचना तंत्र से निरन्तर संवाद बनाकर आवश्यक सूचनाएं प्राप्त कर आवश्यक प्रभावी कार्यवाही प्राथमिकता से सुनिश्चित करायें। वीडियो कान्फ्रेन्सिंग में प्रमुख सचिव, गृह देवाशीष पण्डा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी गण उपस्थित थे।
इसके अलावा मुख्य सचिव आलोक रंजन ने सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधार व बाल कुपोषण में कमी लाने हेतु प्रदेश के समस्त जनपदों में आगामी 01 फरवरी से 30 अप्रैल तक अभियान चलाया जाय। 03 माह तक चलने वाले इस अभियान में 02 वर्ष के बच्चों का टीकाकरण, संस्थागत प्रसव तथा आधुनिक परिवार नियोजन सेवाओं के आच्छादन एवं प्रयोग में वृद्धि लाये जाने के साथ-साथ बाल कुपोषण की कमी हेतु 05 वर्ष से कम बच्चों का वजन तथा लम्बाई की माप एवं कुपोषित बच्चों का उचित संदर्भन एवं प्रबन्धन कराया जाय।
मुख्य सचिव ने यह निर्देश प्रमुख सचिव बाल विकास, पंचायती राज,  नगर विकास एवं महानिदेशक मिशन पोषण सहित समस्त जिलाधिकारियों को परिपत्र भेजकर दिए हैं। उन्होंने कहा कि सघन अभियान की रूपरेखा के अनुसार प्रत्येक स्तर पर जागरूकता, संवेदनशीलता व तैयारियों के निर्देश वीडियोकान्फ्रेन्सिंग के माध्यम से आज योजना भवन में जिलाधिकारियों एवं संबंधित अधिकारियों को दिये हैं। उन्होंने कहा कि अभियान की चरणबद्ध तैयारी व क्रियान्वयन सुनिश्चित कराने हेतु सम्बन्धित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की प्रत्येक जनपद में तीन चरणों में बैठकों का आयोजन अवश्य किया जाय। प्रथम चरण में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तर पर बैठक का आयोजन किया जायेगा। उक्त बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी, समस्त उपजिलाधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के समस्त अन्य जनपद स्तरीय अधिकारियों सहित प्रभारी चिकित्साधिकारी/अधीक्षक, कार्यक्रम अधिकारी (समेकित बाल विकास परियोजना), जिला पंचायतीराज अधिकारी, खण्ड विकास अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबन्धक, एन0एच0एम0 सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं संगठनों के द्वारा प्रतिभाग किया जायेगा। द्वितीय चरण में उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में ब्लाॅक स्तरीय बैठकों का आयोजन किया जायेगा। उक्त बैठक में प्रमुख रूप से प्रभारी चिकित्साधिकारी, अधीक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, बाल विकास परियोजना अधिकारी, खण्ड विकास अधिकारी एवं सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), मुख्य सेविकाओं द्वारा प्रतिभाग किया जायेगा। प्रत्येक बैठक में स्वास्थ्य विभाग का जनपद स्तरीय अधिकारी खण्ड कार्यक्रम अधिकारी, एन0एच0एम0/स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी अवश्य उपस्थित रहेंगे। तृतीय चरण में ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में प्रत्येक ग्राम सभा में बैठक का आयोजन किया जायेगा। इस बैठक में मुख्य रूप से ग्राम पंचायत के सदस्य, ए0एन0एम0, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्री द्वारा प्रतिभाग किया जायेगा। प्रत्येक बैठक के लिए ब्लाॅक स्तरीय व जनपद स्तरीय अधिकारियों को नोडल अधिकारियों के रूप में नामित किया जायेगा।  उन्होंने निर्देश दिए हैं कि तीनों चरणों की बैठकों आयोजन प्रत्येक दशा में आगामी 15 फरवरी तक अवश्य करा लिया जाय। बैठकों हेतु पावर प्वाइन्ट प्रस्तुतिकरण एवं सामग्री उत्तर प्रदेश तकनीकी सहयोग इकाई द्वारा तैयार कर समस्त जनपदों को प्रेषित की जायेगी।
श्री रंजन ने कहा कि स्वास्थ्य पोषण दिवस के अन्तर्गत समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य व पोषण सम्बन्धी सेवाएं प्रदान की जायेंगी। उन्होंने कहा कि अभी तक स्वास्थ्य पोषण दिवस केवल ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित होते थे परन्तु अब शहरी क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य पोषण दिवस कार्यक्रमों का आयोजन कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य पोषण दिवस का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कराने हेतु नियमित टीकाकरण आच्छादन में वृद्धि, संस्थागत प्रसव में वृद्धि, परिवार नियोजन आच्छादन में वृद्धि, पोषण स्तर में सुधार कराया जाय। उन्होंने कहा कि अभियान हेतु प्रचार-प्रसार सामग्री तैयार कराकर अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित कराया जाय। उन्होंने कहा कि कैम्पों के माध्यम से आशा प्रोत्साहन राशि का भुगतान सुनिश्चित कराया जाय।
मुख्य सचिव ने कहा कि अभियान का अनुश्रवण एवं समीक्षा तीन स्तरों- राज्य स्तर एवं जनपद स्तर पर पाक्षिक तथा ब्लाक स्तर पर साप्ताहिक की जायेगी। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान लक्ष्यों के सापेक्ष सर्वाधिक उपलब्धि प्राप्त करने वाले प्रथम तीन जनपदों को क्रमशः 1 लाख रूपये, 50 हजार रूपये व 25 हजार रूपये का पारितोषिक एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किया जायेगा। उन्होंने कहा कि अभियान के माध्यम से मातृ-शिशु मृत्यु दर व बाल कुपोषण में त्वरित कमी लाने के लिए विभिन्न विभागों द्वारा समन्वित प्रयास किया जाय।
सचिव, मुख्यमंत्री आमोद कुमार ने  भी सम्बन्धित अधिकारियों से वीडियो कान्फ्रेन्सिंग के माध्यम से कहा कि प्रदेश में मातृ शिशु स्वास्थ्य सुधार एवं बाल कुपोषण में कमी लाने हेतु शासन द्वारा निर्गत शासनादेशों का गम्भीरता पूर्वक अध्यययन कर प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित कराया जाये। उन्होंने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष 2015-16 मां एवं बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाना है। प्रमुख सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अरविन्द कुमार एवं मिशन निदेशक कामरान रिजवी, अधिशासी निदेशक उ0प्र0 तकनीकी सहयोग इकाई विकास गोठवाल ने भी आवश्यक जानकारी सम्बन्धित अधिकारियों को प्रदान की।
अन्य बैठक में मुख्य सचिव आलोक रंजन ने न्यायालयों में लम्बित वादों में प्रति शपथ-पत्र समय से दाखिल न किये जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि समय से प्रति शपथ-पत्र दाखिल न करने वाले सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों को चिन्हित कर अवगत कराया जाय। उन्होंने कहा कि सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी प्रति माह बैठक कर लम्बित रिट याचिकाओं में शपथ-पत्र दाखिल किये जाने के साथ-साथ आवश्यकतानुसार अन्य आवश्यक कार्यवाही की नियमित समीक्षा करें।
मुख्य सचिव आज शास्त्री भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष के सभागार में न्यायालयों में लम्बित वादों के सम्बन्ध में  बैठक कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाय कि अनावश्यक रूप से किसी भी व्यक्ति को विवश न किया जाये, ताकि उसे मजबूरन न्यायालय की शरण लेना पड़े। उन्होंने कहा कि ऐसे लम्बित वादों की समीक्षा कर नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही हेतु सक्षम स्तर से अनुमोदन प्राप्त कर न्यायालय को अवगत कराया जाय ताकि किसी भी व्यक्ति का शोषण न होने पाये। उन्होंने कहा कि विभागों में नामित नोडल अधिकारियों को एस0एम0एस0 से अथवा ई-मेल के माध्यम से लम्बित वादों की आवश्यकतानुसार जानकारी समय-समय पर न्याय विभाग द्वारा अवश्य उपलब्ध कराई जाये। उन्होंने कहा कि सम्बन्धित विभाग नामित नोडल अधिकारियों के स्थानान्तरण अथवा बदले जाने की स्थिति में उनके नवीनतम मोबाइल नम्बर एवं ई-मेल आई0डी0 न्याय विभाग को अवश्य उपलब्ध करा दें, ताकि उन्हें वांछित सूचना समय से प्राप्त होती रहे। बैठक में प्रमुख सचिव, न्याय अनिरूद्ध सिंह सहित सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।
एक अन्य बैठक में मुख्य सचिव आलोक रंजन ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं का निर्धारित अवधि में अनुपालन सुनिश्चित कराया जाये। उन्होंने कहा कि घोषणाओं से सम्बन्धित कार्यों की प्रगति की समीक्षा नियमित रूप से कर अवगत कराना होगा। उन्होंने कहा कि अब वह स्वयं अपने स्तर पर प्रत्येक माह घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा करेंगे।
मुख्य सचिव आज लखनऊ स्थित शास्त्री भवन के सभागार में मुख्यमंत्री द्वारा आजमगढ़ एवं महोबा जनपद में की गई घोषणाओं की प्रगति की विभागवार समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अब सम्बन्धित विभागों के प्रमुख सचिवों को घोषणाओं से सम्बन्धित प्रगति की समीक्षा हेतु माइलस्टोन निर्धारित कर अवगत कराना होगा। उन्होंने कहा कि यह प्रत्येक दशा में सुनिश्चित किया जाय कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं का समय से अनुपालन सुनिश्चित हो जाये, ताकि आम नागरिक यथा-शीघ्र लाभान्वित हो सकें। बैठक में प्रमुख सचिव, लोक निर्माण के0 एस0 अटोरिया सहित सम्बन्धित विभागों के प्रमुख सचिव एवं सचिव तथा वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

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