बरेली और मुरादाबाद मंडल में भ्रष्ट व लापरवाहों का राज

मुख्य सचिव आलोक रंजन
मुख्य सचिव आलोक रंजन
उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन आगामी 29 सितम्बर, 2014 को मुरादाबाद में मुरादाबाद एवं बरेली के विकास कार्यों की समीक्षा एवं औचक निरीक्षण करेंगे।
श्री रंजन उक्त तिथि में संबंधित मण्डल मुख्यालय में औचक निरीक्षण के उपरान्त जन समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान कराने हेतु आम नागरिकों तथा जन प्रतिनिधियों एवं उद्योग/व्यापार प्रतिनिधियों से भेंट करने के उपरान्त कानून व्यवस्था तथा विकास कार्यों की गहन समीक्षा करेंगे।
मुरादाबाद और बरेली मंडल में भ्रष्टाचार और लापरवाही का आलम यह है कि आम आदमी त्राहि-त्राहि कर रहा है। शहर व कस्बों में महापौर और अध्यक्ष अन्य प्राथमिक आवश्यकताओं की तो बात ही छोड़िये, सफाई तक नहीं करा पा रहे हैं। इंटर लॉकिंग सड़क बनाने में बड़ा गोलमाल किया जा रहा है। बरेली-मुरादाबाद हाइ-वे के निर्माण में भी बड़ा घालमेल हो रहा है। संभल और बदायूं जिले के हालात सबसे अधिक खराब हैं। विधायक निधि, सांसद निधि, डूडा और जिला पंचायत में सिर्फ बंदरबांट का नियम चल रहा है। बदायूं में ठेकेदार इस कदर हावी हैं कि पीडब्ल्यूडी का करोड़ों रुपया ठेकेदार खुलेआम हजम कर रहे हैं। बदायूं-इस्लामनगर-बिजनौर राजमार्ग को काला कर के ठेकेदार रुपया हजम करने के प्रयास में जुटा हुआ है। कानून व्यवस्था का आलम यह है कि अपराधी जब, जहां और जैसे चाह रहे हैं, वैसे घटनाओं को अंजाम को दे रहे हैं। बरेली मंडलायुक्त कार्यालय के यह हालात हैं कि अपर मंडलायुक्त (प्रशासन) के न्यायालय से कई पत्रावलियां ही गायब कर दी गई हैं। तत्कालीन मंडलायुक्त ए.के. सिंह के साथ वर्तमान मंडलायुक्त ने भी पत्रावली खोजने के निर्देश दिए हैं, लेकिन महीनों बाद भी पत्रावली नहीं मिल पा रही हैं, जिससे वादकारी परेशान हैं। पेशगार वसी उल्ला की ऊंची राजनैतिक पकड़ होने के कारण मंडलायुक्त तक कार्रवाई करने से बचते नजर आ रहे हैं, ऐसे वातावरण में मुख्य सचिव आलोक रंजन का दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन वे कितने अधिकारों के साथ दौरे पर आयेंगे, यह देखने की खास बात रहेगी, क्योंकि अधिकारी और ठेकेदार सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से संबंध रखने वाले हैं, जिससे उनके विरुद्ध कार्रवाई करना बड़ा और साहसिक कदम होगा। उधर मुख्य सचिव मुरादाबाद में समीक्षा करेंगे, जिससे बरेली मंडल के अफसर बहुत अधिक चिंतित नजर नहीं आ रहे हैं, क्योंकि अफसर कागजी आंकड़ेबाजी में माहिर हैं ही और कागज देख कर मुख्य सचिव खुश हो ही जायेंगे, लेकिन मुख्य सचिव ने जमीनी विकास के अनुसार निर्णय लिया, तो अधिकाँश अफसरों और कर्मचारियों का नपना तय माना जा रहा है।

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