पत्नी के मना करने पर पुनः सॉलिसिटर जनरल नहीं बने साल्वे

उच्चतम न्यायालय के वकील हरीश साल्वे।
उच्चतम न्यायालय के वकील हरीश साल्वे।

हरीश साल्वे, जी हाँ, यह नाम आज कल देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। अधिकाँश लोग हरीश साल्वे के बारे में जानना चाहते हैं। हरीश साल्वे उच्चतम न्यायालय में वकील हैं और मूल रूप से मध्य प्रदेश स्थित छिंदवाड़ा के रहने वाले हैं, इनके पिता एन.के.पी. साल्वे मध्य प्रदेश के बैतूल क्षेत्र से दो बार लोकसभा सांसद एवं बी.सी.सी.आई. के अध्यक्ष भी रहे हैं।

हरीश साल्वे को नया नवाब भी कहा जाता है। पिछले कई दशक से दिल्ली में ही रहते हैं, कुलीन पालम मार्ग पर लगभग 800 गज में फैली कोठी में रहते हैं, जिसकी कीमत करीब 100 करोड़ रुपये बताई जाती है। एक घर गोवा में भी है, जहाँ वह सिर्फ छुट्टियां बिताना पसंद करते हैं।
सोली सोराबजी के साथ 1976 में लॉ की प्रेक्टिस शुरू करने वाले हरीश साल्वे आज देश के सबसे मंहगे कहे जाने वाले वकीलों में से एक हैं, वे मुकेश अंबानी से लेकर रतन टाटा तक के लिए उच्चतम न्यायालय में पैरवी कर चुके हैं। टैक्स विवाद में वोडाफोन के लिए लड़ चुके हैं। हरीश साल्वे ने इतालवी सरकार के लिए दो इतालवी मरीनों के पक्ष में भी मुकदमा लड़ा। हरीश साल्वे पियानो बजाना पसंद करते हैं और बेंटले कार रखते हैं, साथ ही पुस्तकों के भी प्रेमी हैं, उनकी निजी लाइब्रेयरी में हजारों पुस्तकें हैं। फैशन कॉन्शियस हैं। लंदन से शॉपिंग करते हैं।

हरीश साल्वे वकील के रूप में एक पेशी की फीस करीब 60 लाख रुपए से लेकर 1 करोड़ रुपए तक लेते हैं। 1999 से 2002 तक वे भारत के सॉलिसिटर जनरल भी रह चुके हैं। उन्होंने दूसरी बार सॉलिसिटर जनरल बनने से सिर्फ इसलिए मना कर दिया कि उनकी पत्नी को पसंद नहीं था, जबकि सॉलिसिटर जनरल बनने के लिए वकील राजनैतिक संबंधों को जरिया बनाते नजर आते हैं। योग्यता और अनुभव के सहारे वे अधिकाँश मुकदमों में विजय हासिल करते हैं, जिससे उन्हें सफल वकील कहा जाता है।

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