यासीन उस्मानी को लालबत्ती नहीं मिली, पर झटका कायम

यासीन उस्मानी
यासीन उस्मानी

यासीन उस्मानी को लालबत्ती भले ही न मिल पाई, लेकिन उनकी हनक-सनक में कोई कमी नहीं है। उनके पास कोई संवैधानिक दायित्व नहीं है, लेकिन जिला प्रशासन ने उन्हें सरकारी ड्राइवर मुहैया कराया है। कर्मचारियों की भारी कमी और अन्य तमाम अव्यवस्थाओं के बावजूद उन्हें व्यक्तिगत तौर पर नियम विरुद्ध ड्राइवर दिया गया है।

बदायूं निवासी यासीन उस्मानी समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी रहे हैं, मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड के सदस्य हैं और उर्दू अकेडमी के चेयरमेन रहे हैं। प्रदेश में सपा सरकार आने के बाद एक बार फिर उन्हें दर्जा मंत्री देने की खबर आई थी, लेकिन अगले ही दिन खबर निराधार साबित हुई, जिससे उनकी काफी फजीहत हुई थी। लोगों को लगा कि उनकी धमक कम हो गई है, लेकिन ऐसा नहीं है। उनकी हनक-सनक आज भी कायम है।

जिला प्रशासन ने यासीन उस्मानी को नियम विरुद्ध ड्राइवर मुहैया कराया है। बताया जाता है कि सफाई कर्मचारियों में कई ऐसे कर्मचारी हैं, जो गाड़ी चलाना जानते हैं, ऐसे कर्मचारियों को विभिन्न अफसरों के साथ संबद्ध कर दिया गया है। माजिद अली नाम का एक सफाई कर्मचारी सूचना कार्यालय से संबद्ध था, जिसे प्रभारी जिला पंचायत राज अधिकारी राजेश यादव ने यासीन उस्मानी के साथ संबद्ध कर दिया है, साथ ही एक अन्य सफाई कर्मचारी लालाराम को सूचना कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। माजिद अली ने यासीन उस्मानी की गाड़ी चलाना शुरू कर दी है, जबकि बेहद आवश्यक कार्य करने वाले सूचना कार्यालय में अभी तक लालाराम ने ज्वाइन नहीं किया है।

खैर, सवाल यह है कि सफाई कर्मचारियों को संबद्ध क्यूं किया जा रहा है, जबकि गाँवों के हालात दयनीय हैं, वहां सफाई नहीं हो रही है, इसके अलावा स्पष्ट नियम है कि सफाई कर्मचारियों को किसी अवस्था में संबद्ध नहीं किया जा सकता, पर सैकड़ों सफाई कर्मचारी अफसरों और विधायकों के साथ संबद्ध हैं, इसीलिए ग्रामीणों की शिकायतें रददी की टोकरी में डाल दी जाती हैं।

सांसद और डीएम के आवासों पर संबद्ध हैं सफाई कर्मी

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