आबिद रजा की तुलना में फेल पालिकाध्यक्ष सिद्ध हो चुकी हैं फात्मा रजा

आबिद रजा और फात्मा रजा

नगर निकायों के चुनाव को लेकर राजनैतिक गतिविधियाँ बढ़ने लगी हैं। दलों और मतदाताओं के बीच संभावित प्रत्याशी पैठ बनाने का प्रयास करने लगे हैं। लंबे समय से जो अध्यक्ष एसी रूम में मगरमच्छों की तरह पड़े आनंद ले रहे थे, वे भी भीषण गर्मी को दरकिनार कर जनता के बीच दिखने लगे हैं। जनहित से जुड़े बयान भी जारी करने लगे हैं, जिससे मतदाताओं के बीच उनका बदला व्यवहार भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

बदायूं नगर पालिका परिषद के चुनाव को लेकर भी गतिविधियाँ चरम पर पहुंच चुकी हैं, जिससे अध्यक्ष फात्मा रजा के कार्यकाल की भी चर्चा की जा रही है, उनके कार्यकाल की तुलना उनके शौहर आबिद रजा से ही की जाये, तो आबिद रजा के अध्यक्ष वाले कार्यकाल को जनता आज भी सौ में से 80 से ज्यादा नंबर देती है। हालांकि आबिद रजा पर भी आरोप लगाने वालों की कमी नहीं है, फिर भी आबिद रजा को सफल अध्यक्ष कहा जाता है, तभी आबिद रजा से तुलना करते हुए फात्मा रजा को तटस्थ लोग 10 नंबर देने को भी तैयार नहीं हैं। आबिद रजा न सिर्फ प्रतिदिन कार्यालय में नियम से बैठते थे, बल्कि उनके कार्यकाल में सड़क, पेयजल, सफाई और पथ प्रकाश व्यवस्था इतनी शानदार रही कि हर वर्ग के लोगों ने उन्हें पुरस्कार स्वरूप विधायक चुन दिया। समाजवादी पार्टी की सरकार में पालिकाध्यक्ष का चुनाव हुआ, जिसमें उनकी बीवी फात्मा रजा सपा से प्रत्याशी बनाई गईं, तो लोगों को उन पर विश्वास नहीं हुआ कि वे आबिद रजा जैसी चाक-चौबंद व्यवस्थायें रख पायेंगी, सो भाजपा के ओमप्रकाश मथुरिया विजयी हुए, वे विपरीत समय में अध्यक्ष बने, उन पर कई तरह के दबाव रहे, जिससे हृदय आघात के चलते चल बसे, जिसके बाद हुए उपचुनाव में पुनः फात्मा रजा प्रत्याशी बनीं, तो जनता को लगा कि शौहर विधायक हैं, सपा की सरकार है, फात्मा रजा को ही अध्यक्ष चुन दिया जाये, तो अभूतपूर्व विकास कार्य हो सकते हैं। फात्मा रजा रिकॉर्ड मतों से चुनाव जीतीं, लेकिन वे मतदाताओं की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरीं।

उल्टे-सीधे बयानों को लेकर जरूर चर्चा में रही हैं, सराहना करने के लिए उनकी झोली पूरी तरह खाली है। शहर के हालात भयावह हैं। सफाई की बात करें, तो मुख्य मार्गों और मुख्य चौराहों तक की स्थिति खराब है, कूड़ेदान खरीद में बड़ा गोलमाल किया गया है। पथ प्रकाश के नाम पर कमीशनखोरी वाली लाइटें लगाई गई हैं। पेयजल का संकट लगातार बना रहा है। बेहद कीमती यात्री शैड लगवाये गये, जो एक वर्ष से पहले ही बर्बाद हो गये। कई जगह सड़क गड्ढों में खोजने पर भी नहीं मिलेगी। समाज का हर तबका परेशान नजर आ रहा है, ऐसा कार्यकाल गुजरने के बावजूद फात्मा रजा सपा से पुनः टिकट मांग रही हैं। सपा टिकट देगी, या नहीं और चुनाव में उनकी क्या स्थिति रहेगी?, इसके लिए समय का ही इंतजार करना पड़ेगा, हाल-फिलहाल वे फेल अध्यक्ष मानी जा रही हैं।

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