पुलिस की शह पर बच्चों से भीख मंगवाने वाला गिरोह सक्रीय

रोडवेज बस अड्डे पर भीख मांगता लड़का।
रोडवेज बस अड्डे पर भीख मांगता लड़का।

भीख माँगना अनैतिक भी है और अपराध भी। बच्चों से भीख मंगवाना और भी बड़ा अपराध है, लेकिन बरेली पुलिस अपराध नहीं मानती। पुलिस की शह पर बरेली में बच्चों से भीख मंगवाने वाला गिरोह सक्रीय है। इस धंधे से जुड़े लोग मालामाल होते जा रहे हैं, लेकिन भीख मांगने वाले बच्चों को भरपेट खाना तक नसीब नहीं है, साथ ही उनका भविष्य भी बर्बाद हो रहा है।

बरेली में भीड़ वाले स्थानों पर 8 से 12 साल तक के बच्चे भीख मांगते यूं ही नज़र आ जाते हैं। खाली हाथ भीख मांगने पर लोग अब दुत्कारने लगे हैं, सो धंधेबाजों ने नया तरीका भी इजाद कर लिया है, जिससे लोग भीख में कुछ न कुछ दे ही देते हैं। बच्चे हाथ में एक थाली लिए घुमते रहते हैं। थाली में किसी देवी-देवता का चित्र, जलता हुआ दीपक व मिश्री रहती है। बच्चे किसी के भी सामने आ धमकते हैं और अचानक हाथ पर मिश्री के दो-तीन दाने रख देते हैं। लोग कुछ भी सोच-विचार किये बिना दीपक की आरती लेते हुए श्रद्धा भाव से थाली में दो-चार रूपये देकर आगे बढ़ जाते हैं, ऐसे दृश्य बरेली में कचहरी के आसपास, जंक्शन, रोडवेज, नये बस अड्डे के साथ प्रमुख चौराहों और मुख्य बाजार में देखने को आम तौर पर मिल जाते हैं, लेकिन दोष बच्चों का नहीं है, क्योंकि बच्चों से भीख मंगवाई जा रही है। इन बच्चों से भीख मंगवाने के पीछे ताकतवर तन्त्र है, जिसे पुलिस का आशीर्वाद प्राप्त है।

रोडवेज बस अड्डे पर भीख मांगता लड़का।
रोडवेज बस अड्डे पर भीख मांगता लड़का।
भीख मांगने के लिए लड़के से थाली लेने आई लड़की।
भीख मांगने के लिए लड़के से थाली लेने आई लड़की।

भीख मांगने वाले इन छोटे-छोटे बच्चों को यह भी नहीं पता होता कि वह कुछ भी अनैतिक, अपराध या शर्मनाक कृत्य कर रहे हैं। भोले-भाले बच्चे निःसंकोच जुटे रहते हैं। इन बच्चों को थाली में से उठा कर पांच रूपये की आइसक्रीम खाने की भी छूट नहीं होती। चार-पांच बच्चों पर एक आदमी लगातार नज़र रखता है। एक-दो रूपये खर्च कर लेने पर मार पड़ती है, सो दहशत में बच्चे खर्च करने के नाम पर रूपये छूते तक नहीं हैं और पूरी की पूरी कमाई धंधेबाज के जेब में चली जाती है।

रोडवेज बस अड्डे पर भीख मांगती बच्चियां।
रोडवेज बस अड्डे पर भीख मांगती बच्चियां।

धंधेबाजों के चंगुल में बच्चे बड़ी संख्या में हैं, जिनसे क्रमवार भीख मंगवाई जाती है। एक बच्चे से 8 घंटे भीख मंगवाई जाती है। 8 घंटे के बाद दूसरे बच्चे आकर थाली ले लेते हैं और फिर वे भीख मांगने लगते हैं। भीख मांगने का यह धंधा पुलिस के सामने और पुलिस की जानकारी में ही चल रहा है। बरेली में रोडवेज बस अड्डे पर सुबह से दोपहर बाद तक लड़के भीख मांगते हैं और दोपहर बाद उनकी जगह अबोध लड़कियां आ जाती हैं। बस अड्डे पर पुलिस हर वक्त तैनात रहती हैं, जिन्हें गिरोह के लोग हिस्सा देते हैं, जिससे सिपाही बच्चों को भीख मांगने देते हैं।

रोडवेज बस अड्डे पर भीख मांगती बच्चियां।
रोडवेज बस अड्डे पर भीख मांगती बच्चियां।

बरेली कमिश्नरी ही नहीं, बल्कि पुलिस का जोन मुख्यालय भी है। जिला स्तरीय अफसरों के साथ, मंडल और जोन स्तर के अफसरों में से किसी की नज़र इस ओर नहीं है, जिससे गिरोह के लोग फलफूल रहे हैं, वहीं बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है। आश्चर्य की बात तो यह है कि बरेली में नेताओं और समाजसेवियों की भी फ़ौज है, पर उनमें से भी किसी को बच्चों के भविष्य की परवाह नहीं है।

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