मुकदमा दर्ज होने के बाद जर्मनी भाग गया बालेन्दु, पूर्णेंदु और यशेंदु का गैंग

जर्मन पत्नियों के साथ बालेन्दु और यशेंदु।

सोशल साइट्स पर कुछ समय पहले बालेन्दु, पूर्णेंदु और यशेंदु नाम के भाईयों का एक गैंग अचानक से सक्रिय हुआ, जो रात-दिन न सिर्फ देवी-देवताओं और ईश्वर की निंदा करता था, बल्कि विश्व हिन्दू परिषद, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय जनता पार्टी के साथ नरेंद्र मोदी और अमित शाह व भाजपा के शीर्ष नेताओं के विरुद्ध घृणित बातें करता था। तीनों भाईयों का यह गैंग कश्मीर मुद्दे पर भारत के विरोध में खड़ा होता था, जिससे इन्हें वामपंथियों का समर्थन मिलने लगा, तो इस गैंग की गतिविधियाँ बढ़ने लगीं, इसके आय के स्रोत भी अचानक से बढ़ने लगे।

चेहरे से राक्षसी अनुभूति कराने वाले बालेन्दु, पूर्णेंदु और यशेंदु का दुस्साहस इस हद तक बढ़ गया कि जिला मथुरा के वृन्दावन क्षेत्र में अटल्ला चुंगी के निकट परिक्रमा मार्ग पर स्थित अपने कथित आश्रम पर 14-15 अक्टूबर 2016 को नास्तिक सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा कर दी, इनके झांसे में कुछेक भले लोग भी फंस गये, जो वहां जाने का आह्वान करने लगे, इस गैंग के दुस्साहस की कहानी स्थानीय लोगों को पता चली, तो वृन्दावन के सभ्रांत हिन्दू-मुस्लिम एकजुट होकर इस गैंग का विरोध करने लगे, कई संगठन भी इस गैंग के विरोध में आ गये, कुछेक आक्रोशित लोगों ने इस गैंग के कथित आश्रम पर हमला भी बोला।

वृन्दावन के शांति प्रिय हिन्दू-मुस्लिम ने बालेंदू, यशेंदू और पूर्णेंदू के विरुद्ध धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने, सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने, शांति भंग करने के आरोप में धारा- 295 आईपीसी और सोशल साइट पर आपत्तिजनक फोटो पोस्ट करने के आरोप में 67 आईटी एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज करा दिया। मुकदमा दर्ज होते ही पूरा गैंग भूमिगत हो गया और अवसर मिलते ही जर्मनी भाग गया, उसके बाद इस गैंग की गतिविधियाँ शून्य नजर आ रही हैं।

सूत्रों का कहना है कि बालेंदू, यशेंदू और पूर्णेंदू का गैंग पत्नी-बच्चों सहित जर्मनी भाग गया है और विवादित कथित आश्रम की रखवाली इनका बूढ़ा बाप कर रहा है, वहां भी होने वाले धंधे चौपट हो गये हैं। उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद लोगों को लगने लगा है कि इस गैंग पर शिकंजा कसा जायेगा।

इन तीनों भाईयों के अतीत के बारे में बताया जाता है कि यह प्रख्यात प्रवचनकर्ता बालकराम शरण की औलादें हैं, उनका हजारों लोग विशिष्ट सम्मान करते थे, उन्होंने इन तीनों बेटों को भी प्रवचन सिखाने का प्रयास किया, लेकिन यह नहीं कर पाए, साथ ही इनकी गतिविधियाँ व चाल-चलन भी संदिग्ध थे, जिससे सनातनी भक्त इनसे दूरी बनाते चले गये, इसी चिढ़ में यह तीनों ईश्वर और आस्तिकों के पीछे पड़ गये और इतने आगे निकल गये कि देश के विरोध में भी खड़े होने लगे, तीनों भाई अय्याश बताये जाते हैं, इनमें से दो भाईयों ने जर्मन लड़कियाँ झांसे में ले लीं और उन्हें पत्नी बताने लगे, उनके चेहरे से स्वयं की ब्रांडिग करने लगे, उनके सहारे देशी-विदेशियों को प्रभावित करने लगे। बालेन्दु तो गुफा में रह कर ईश्वर से साक्षात्कार करने का भी दावा करता है, वहीं स्वयं को नास्तिक भी बताता है। फ्री में गरीब बच्चों के लिए स्कूल चलाने का दावा करता है, वहीं उसी स्कूल के लिए दुनिया भर के लोगों से चंदा मांगता है। स्वयं को संत नहीं कहता, लेकिन वस्त्र संतों की तरह ही पहनता है। कथित आश्रम में ही अम्मा जी नाम से रेस्टोरेंट भी चलाता था और स्वयं को बड़ा रसोईया भी सिद्ध करता था, स्वयं को योग का विद्वान् भी बताता है, लेकिन अब इस गैंग की पोल खुल गई है, जिससे यहाँ कमाई के रास्ते भी बंद हो गये हैं, तभी कानून की आंख में धूल झोंक कर पूरा गैंग जर्मनी भाग गया, पर कभी न कभी तो कानून के हाथ इस गैंग के गिरेवान तक पहुंच ही जायेंगे।

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