गेहूं की अच्छी फसल के लिए मौसम के अनुसार सुझाव

गेहूं की अच्छी फसल के लिए मौसम के अनुसार सुझाव
गेहूं की अच्छी फसल के लिए मौसम के अनुसार सुझाव
गेंहूँ की खेती के लिए वैज्ञानिकों ने आवश्यक सुझाव दिए हैं। जिन अंचलों में पर्याप्त वर्षा हुई है, वहाॅं सिंचाई लंबित रखें, तथा जहाॅं वर्षा नहीं हुई है, वहाॅं समय से 15 से 30 नवम्बर के बीच बोये गये गेहूं की फसल में दूसरी सिंचाई 40-45 दिन बाद करें एवं विलंब 25 दिसम्बर तक बोये गये गेहूॅं में पहली सिंचाई 18 से 20 दिन बाद करें।
उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के सभागार में आयोजित 22वीं बैठक में फसल सतर्कता समूह के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी गई सलाह के अनुसार जिन किसान भाइयों ने टाॅप ड्रेसिंग अभी तक नहीं की है, वो पर्याप्त नमी की दशा में नाइट्रोजन की शेष मात्रा की टाॅप ड्रेसिंग करें। गेंहूँ की बुवाई के 20-30 दिन के मध्य पहली सिंचाई के आस-पास पौधों में जिंक की कमी के लक्षण प्रकट होते हैं, तो पांच कि.ग्रा. जिंक सल्फेट तथा 16 कि.ग्रा. यूरिया को 800 लीटर पानी में घोल कर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। यदि यूरिया की टाॅप ट्रेसिंग कर दी है, तो यूरिया के स्थान पर 2.5 कि.ग्रा. बूझे चूने का पानी 10 लीटर पानी में सायंकल भिगो कर दूसरे दिन पानी निथार कर पानी का प्रयोग करें।
गेंहूँसा एवं जंगली जई आदि सकरी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण के लिए सल्फोसल्फ्यूराॅन 75 प्रतिश डब्लू. पी. की 33 ग्राम (2.5 यूनिट प्रति हेक्टेयर) अथवा मैट्रब्यूजिन 70 प्रतिशत डब्लू. पी. की 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा सल्फोसल्फ्यूराॅन 75 प्रतिशत एवं मेट सल्फोसल्फ्यूराॅन मिथाइल 5 प्रतिशत डब्लू. जी. 40 ग्राम(2.50 यूनिट) बुवाई के 20-25 दिन बाद 500 से 600 लीटर प्रति हेक्टेयर पानी  में घोल बनाकर छिड़काव करें।
आर्द्रता अधिक होने के कारण गेरूई तथा पत्ती धब्बा रोग की सम्भावना है, तो लक्षण दिखाई देने पर नियंत्रण हेतु थायोफिनेट मिथाइल 70 प्रतिशत डब्लू.पी. की 700 ग्रा. अथवा जीरम 80 प्रतिशत डब्लू.पी. की 2.0 किग्रा. अथवा मैंकोजेब 75 डब्लू.पी. की 2.0 किग्रा. प्रति हे. की दर से लगभग 500 ली. पानी में घोलकर छिड़काव करें।
दलहनी फसलोें को कीट रोगों से बचायें

दलहनी फसलों की खेती के लिए चना में उकठा का प्रकोप दिखाई देने पर ग्रसित पौधों को उखाड़कर जला दें। मटर एवं मसूर में बुकनी रोग के नियंत्रण हेतु घुलनशील गन्धक 80 प्रतिशत 2 कि.ग्रा. अथवा ट्राइडेमार्फ 80 प्रतिशत ई.सी. 500 मिली. प्रति हे. लगभग  500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के सभागार में आयोजित 22वीं बैठक के फसल सतर्कता समूह के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी गई सलाह के अनुसार मटर में अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा एवं तुलासिता रोग के नियंत्रण हेतु मैंकोजेब 75 डब्लू.पी. की 2 कि.ग्रा. अथवा जिनेब 75 प्रतिशत डब्लू.पी. की 2 कि.ग्रा. अथवा काॅपर आक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लू.पी. की 3 कि.ग्रा. मात्रा प्रति हे. लगभग 500-600 ली. पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। मटर में फली बेधक कीट एवं सेमीलूपर कीट का प्रकोप होने पर नियंत्रण हेतु बैसिलस थूरिनजिएन्सिस (बी.टी.) की कस्र्टकी प्रजाति 1.0 कि.ग्रा. अथवा फेनवैलरेट 20 प्रतिशत ई.सी. 1 ली. अथवा मोनोक्रोटोफास 36 प्रतिशत एस.एल. 1 ली. जैविक/रासायनिक कीटनाशको का बुरकाव अथवा 500-600 ली. में पानी में घोलकर प्रति हे. छिड़काव करना चाहिए।
अरहर में पत्ती लपेटक कीट की रोकथाम हेतु मोनोक्रोटोफाॅस 36 ई.सी. 800 मिली. प्रति हे. की दर से घोल तैयारकर छिड़काव करें। अरहर की फली मक्खी के नियंत्रण हेतु फूल आने के बाद मोनोक्रोटोफाॅस 36 ई.सी. अथवा डाइमेथोएट 30 ई.सी. एक लीटर प्रति हे. की दर से प्रभावित फसल पर छिड़काव करें।
हरित क्रांति के अन्तर्गत किसानों को कृषि यन्त्रों पर व्यापक अनुदान
उत्तर प्रदेश में कृषि विभाग द्वारा वर्ष 2014-15 में चावल तथा गेहूँ की उत्पादकता में वृद्धि के लिए हरित क्रांति योजना 13 जनपदों इलाहाबाद, कौशाम्बी, वाराणसी, चन्दौली, सोनभद्र, संतरविदास नगर, महराजगंज, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, फैजाबाद, अम्बेडकर नगर एवं गोण्डा में संचालित की जा रही है। प्रदर्शनों पर शतप्रतिशत कुल 7500 रू0 तथा कृषि यन्त्रों पर कीमत के पचास प्रतिशत विभाग द्वारा सुनिश्चित अनुदान देय है।
कृषि निदेशालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार योजना का मुख्य उद्देश्य गेहूँ, चावल के उत्पादकता में वृद्धि के लिए किसानों को मृदा में सुधार, सिंचाई जल के कुशल उपयोग, कृषि यंत्रीकरण, ऊसर क्षेत्र में जिप्सम के प्रयोग तथा खेती की लागत को कम करने के लिए उन्नत कृषि पद्धति को बढ़ावा दिया जा रहा है। योजना के संचालन से उत्साहजनक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं।
हरित क्रांति योजना के माध्यम से किसानों को उपहार, उथले, मध्यम गहराई वाले क्षेत्रों में संकर धान के प्रदर्शन हेतु प्रति हे0 प्रदर्शन हेतु 7500 रू0 उपलब्ध कराये जा रहे हैं। पम्प सेट की खरीद पर 10,000 रू0, जीरोटिल, सीडड्रिल एवं पैडी थे्रसर प्रति खरीद पर 15,000 रू0 देय है, ड्रमसीडर पर 1500 रू0, मैनुअल स्प्रेयर की खरीद पर 600 रू0 एवं पावर नैप स्प्रेयर पर 3000 रू0 देय है।
योजना के माध्यम में स्थल विशेष क्रियाकलाप के लिए सामान्य वितरण, एस.सी.पी. के लिए भी 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है। सहकारिता द्वारा निर्मित गोदामों पर कम्यूनिटी फार्म स्टोरेज बिल्डिंग के लिए शतप्रतिशत 20.79 लाख रू0 अनुदान देय है।
निजी भूमि पर वृक्षों के अवैध कटान पर कार्यवाही
प्रदेश के प्रमुख सचिव वन वी0एन0 गर्ग ने बताया कि वन विभाग द्वारा निजी भूमि पर प्रतिबंधित प्रजातियों के वृक्षों के कटान पर भी प्रभावी नियंत्रण का प्रयास किया जा रहा है। वर्ष 2014-15 में माह नवम्बर, 2014 तक निजी भूमि पर प्रतिबंधित प्रजातियों के अवैध पातन में लिप्त 3620 अभियुक्तों के विरूद्ध कार्यवाही कर 233.22 लाख रु0 का प्रतिकर वसूल किया गया है। इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2013-14 में निजी भूमि पर प्रतिबंधित प्रजातियों के अवैध पातन में लिप्त 4140 अभियुक्तों के विरूद्ध कार्यवाही कर रु0 386.45 लाख का प्रतिकर वसूला गया। वित्तीय वर्ष 2012-13 में निजी भूमि पर प्रतिबंधित प्रजातियों के अवैध पातन में लिप्त 4104 अभियुक्तों के विरूद्ध कार्यवाही कर रु0 365.90 लाख का प्रतिकर वसूला गया। उन्होंने बताया कि विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वृक्षों के अवैध कटान पर रोक लगाए, तथा जिस क्षेत्र में अवैध कटान प्राप्त होगा, वहां के अधिकारी दण्डित होगें।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2014-15 में राजस्व लक्ष्य रु0 352.53 करोड़ के सापेक्ष माह नवम्बर तक रु0 257.35 करोड़ राजस्व प्राप्त किया गया। यह नवम्बर 14 तक के लक्ष्य का 94.5 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2013-14 के लक्ष्य रु0 353.93 करोड़ के सापेक्ष रु0 355.08 करोड़ राजस्व प्राप्त किया गया। यह लक्ष्य का 100.03 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि चालू वर्ष में राजस्व से शतप्रतिशत वसूली के निर्देश दिये गये हैं।

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