सोची-समझी साजिश थी दिल्ली रेप घटना: दिल्ली पुलिस

 

सोची-समझी साजिश थी दिल्ली गैंग रेप
सोची-समझी साजिश थी दिल्ली गैंग रेप

-पुलिस ने बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट के दाखिल की चार्जशीट

-एक मात्र चश्मदीद गवाह पहली बार मीडिया के सामने आया

-बलात्कारियों को जिंदा जलाने की सजा देना चाहती थी ‘निर्भया’

-33 पन्नों की चार्जशीट में कुल 1000 से ऊपर पन्ने हैं

-पुलिस के अनुसार यह घटना सोच-समझकर योजना बनाकर अंजाम दी गयी

-राजू के बोन टेस्ट का इंतजार, उसके बाद ही खुलासा होगा कि, वह बालिग़ है या नाबालिग

16 दिसंबर की रात को दिल्ली में हुए सामूहिक बलात्कार की घटना का एकमात्र चश्मदीद गवाह और पीडिता का मित्र आज शुक्रवार को पहली बार मीडिया के सामने आया। उसने एक हिंदी चैनल को दिए अपने इन्टरव्यू में बताया कि, पीडिता चाहती थी कि, उसके गुनाहगारों को फांसी न देकर जिंदा जलाया जाये। उसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर असंतोष भी ज़ाहिर किया। उसने बताया कि जब बस में हम पर हमला हुआ तब पास से तीन पीसीआर गुजरीं, पर किसी ने हमारी मदद नहीं की। अपराधी पीडिता को बस से कुचलना चाहते थे। पीडिता की गंभीर स्तिथि होते हुए भी उसे पास के किसी निजी अस्पताल में भर्ती न कराकर सफदरजंग लाया गया। महिपालपुर से सफदरजंग तक आने में ढाई घंटे लगे। इस दौरान उसका बहुत सा खून बह गया और स्तिथि और नाज़ुक हो गयी। उसने कहा, कि यह मामला यदि मीडिया की हाईलाईट न बनता तो और मामलों की तरह इसे भी दबा दिया जाता।

भारी सामाजिक दबाव के चलते  दिल्ली पुलिस ने फुर्ती दिखाते हुए  गुरूवार सायं 5:40 बजे चार्जशीट दाखिल कर दी। यह चार्जशीट मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सूर्य मालिक ग्रोवर की अदालत में दाखिल की गयी। चार्जशीट में घटना का पूरा ब्यौरा दिया गया है जिससे इसकी भयावहता का अंदाज़ा सहज ही लगाया जा सकता है। पुलिस ने चार्जशीट बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट के दाखिल की है, जो कि एक असामान्य बात है, क्योंकि पीएम रिपोर्ट इस मामले में एक अहम् सबूत थी। ज्ञात हो कि पीडिता की मृत्यु सिंगापुर के एक नामी अस्पताल में हुई थी, जहाँ से पीएम रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। देश भर में हो रहे विरोध-प्रदर्शन ही शायद इस जल्दी का कारण है, कि पुलिस ने सिंगापुर के अस्पताल से रिपोर्ट आने का इंतजार किये बिना ही चार्जशीट दाखिल कर दी। अपनी चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने जिन पांच लोगों को आरोपी बनाया है, वे हैं – राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर। छठे आरोपी राजू का नाम नाबालिग होने के कारण इस चार्जशीट में शामिल नहीं किया गया है।

चार्जशीट 33 पेज की है और एनेक्ज़र मिलाकर कुल पन्ने एक हज़ार से ऊपर हैं।

चार्जशीट में बलात्कार के अलावा धारा 377 (अप्राकृतिक मैथून), धारा 201 (सबूत मिटाने का प्रयास), धारा 307 (हत्या का प्रयास), धारा 365 (अपहरण और बंधक बनाकर रखना), धारा 394 (लूट के दौरान जानबूझ कर चोट पहुँचाना), धारा 395 (डकैती), धारा 396 (डकैती और हत्या), धारा 34 और 120बी (सामूहिक आपराधिक षड्यंत्र) के अंतर्गत आरोप तय किये गए हैं।

धारा 120बी बाद में जोड़ी गयी क्योंकि जांच में पाया गया कि, इस वारदात की पृष्ठभूमि पहले ही बन गयी थी और यह एक सोचा-समझा अपराध था। पुलिस के अनुसार नाबालिग कहे जा रहे राजू ने पीडिता और उसके दोस्त को बस स्टॉप पर खड़े देखा तो उन्हें प्यार से “आओ दीदी, बैठ जाओ, हम आपको छोड़ देंगे” कहकर बस में बैठाया। उन्हें योजना के तहत ही बस में बैठाया गया था। बलात्कार के बाद हत्या की योजना थी, इसीलिए उसके अंगों में रॉड डाली गयी। बेहोश हो चुकी ‘निर्भया’ को दरिन्दे मरा जानकर ही चलती बस से फेंक कर चले गए। पुलिस ने वह बस भी बरामद कर ली है।

फिलहाल छठे आरोपी के बोन टेस्ट्स की रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद तय होगा कि, वह सच में ही नाबालिग है या नहीं। पीडिता के दोस्त के मामा जो खुद एक वकील हैं, हाई कोर्ट में एक याचिका दायर करने की तैयारी में हैं, कि अपराध की प्रकृति और भयावहता को देखते हुए राजू पर भी बालिगों की भांति बलात्कार और हत्या का मुकद्दमा चले।

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