सैफई का बवाल थमने से पहले बदायूं महोत्सव की घोषणा

 

 

  • मनमानी और लूट के चलते सांसद धर्मेन्द्र यादव को हो सकता है नुकसान
बदायूं महोत्सव को लेकर बैठक में मौजूद डीएम चन्द्रप्रकाश त्रिपाठी और सीडीओ उदयराज सिंह
बदायूं महोत्सव को लेकर बैठक में मौजूद डीएम चन्द्रप्रकाश त्रिपाठी और सीडीओ उदयराज सिंह

सैफई महोत्सव को लेकर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश भर में हंगामा मचा हुआ है, जिसके थमने का इंतजार करने की जगह बदायूं महोत्सव के आयोजन की घोषणा और तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। मनमानी और लूट का जरिया बन चुके बदायूं महोत्सव में इस बार भी वही सब हुआ, तो चुनावी साल में सांसद धर्मेन्द्र यादव को नुकसान हो सकता है।

उल्लेखनीय है कि बदायूं महोत्सव के नाम पर चंद लोग खुद की ब्रांडिंग का काम करते रहे हैं, साथ ही महोत्सव के नाम पर शासन-प्रशासन की मदद का खुला दुरूपयोग भी करते रहे हैं। महोत्सव के नाम पर लाखों रूपये का चंदा एकत्रित किया जाता है, लेकिन उसकी रसीद जारी नहीं की जाती और न ही चंदे में मिला रुपया खाते में जमा किया जाता है। सीधे उगाही कर अधिकाँश रूपये का सीधा खर्च दिखा दिया जाता है, जिसका कोई लेखा-जोखा नहीं रहता, इसलिए लाखों रूपये हड़प लिए जाते हैं, इसके अलावा मंच और वीआईपी गैलरी में अपने चहेतों को ही स्थान दिया जाता है, जिसको लेकर अधिकांश लोगों में आक्रोश रहता है, लेकिन शासन-प्रशासन का खुला सरंक्षण होने के कारण लोग चुप रह जाते हैं, पर इस बार मनमानी और लूट हुई, तो उसका सीधा नुकसान सांसद धर्मेन्द्र यादव को उठाना पड़ सकता है, क्योंकि महोत्सव का आयोजन फरवरी के अंत में होगा, जिसके कुछ समय बाद ही चुनाव होगा और चुनाव में शहर के साथ जिले भर के आम मतदाताओं के जहन में महोत्सव में होने वाली मनमानी और लूट की घटना ताज़ा रहेगी। इसके अलावा एक ख़ास जाति वर्ग का ही बोलबाला रहने के कारण भी अधिकाँश लोग महोत्सव के विरुद्ध ही रहते हैं, साथ ही विश्व भर में बदायूं को ख्याति दिलाने वाले गीतकार शकील बदायूंनी की उपेक्षा के चलते मुस्लिम वर्ग ख़ास तौर पर महोत्सव से दूर रहता है और न ही उसे महोत्सव में सम्मिलित करने का प्रयास किया जाता है।

महोत्सव में मनमानी और लूट होने का प्रमाण यह है कि महोत्सव का आयोजन पिछली बसपा सरकार में नहीं किया गया, जबकि जो लोग अब आयोजित करते हैं, यही तब थे, लेकिन तब लूट न करने की स्थिति थी, जिससे किसी को महोत्सव आयोजित करने का ख्याल तक नहीं आया। सपा सरकार आने पर पिछले वर्ष महोत्सव का जिन्न फिर बाहर निकल आया, तो निवर्तमान डीएम जीएस प्रियदर्शी ने विभिन्न कार्यक्रमों को लेकर तीन सदस्यीय कमेटियां गठित कर दीं और प्रत्येक कमेटी का अध्यक्ष सरकारी अफसर को बनाया, जिससे मनमानी और लूट पर अंकुश लग सकता था, लेकिन महोत्सव आयोजित होने से पहले ही उनका बुलन्दशहर तबादला हो गया और उनकी जगह आये वर्तमान डीएम चन्द्रप्रकाश त्रिपाठी ने निवर्तमान डीएम की फ़ाइल तक खोल कर नहीं देखी, साथ ही बिना कोई नियम बनाये प्राइवेट लोगों को मनमानी और लूट की खुली छूट दे दी, जिससे शासन-प्रशासन की जमकर फजीहत हुई। जिले भर के लोगों ने खुल कर विरोध भी किया, लेकिन महोत्सव पर खर्च हुए धन के बारे में आज तक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, इस सबके बावजूद उन्हीं लोगों के हाथों में डीएम ने पुनः जिम्मेदारी दे दी है, जिससे इस बार भी मनमानी और लूट की पूरी संभावना है, जिसका नुकसान सांसद धर्मेन्द्र यादव को ही उठाना पड़ेगा, इसलिए समय रहते उन्हें हस्तक्षेप कर महोत्सव के आयोजन की व्यवस्था में सरकारी दखल बढ़ाना चाहिए और धन की आमद व खर्च को लेकर पारदर्शिता रखने के भी निर्देश देने चाहिए।

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