सुप्रीम कोर्ट से माया खुश और सपा सुप्रीमो से जनता खुश

बहुजन समाज पार्टी भले ही राष्ट्रीय दल हो, लेकिन जड़ें उत्तर प्रदेश में ही हैं। उत्तर प्रदेश में सत्ता में रहती, तो देश के अन्य भागों में भी हरियाली दिखाई देती रहती, पर पिछले विधान सभा चुनाव में बसपा को करारी हार का सामना करना पड़ा, वहीं धुर-विरोधी सपा को प्रचंड बहुमत मिलने के कारण दोहरा आघात लगा, जिससे कार्यकर्ता उबर नहीं पा रहे थे। इस दोहरे आघात के चलते ही मायावती के साथ समस्त कार्यकर्ताओं के चेहरे से खुशी गायब हो गयी थी, जो अब लौट आई है। मायावती और उनके समर्थक व्यक्तिगत कारणों से खुश हैं, लेकिन सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के प्रयासों के चलते उत्तर प्रदेश की समस्त जनता के चेहरे खिल गये हैं। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के प्रयासों का ही परिणाम है कि केन्द्र सरकार ने उत्तर प्रदेश को आर्थिक मदद दे दी है, जिससे प्रदेश का चहुंमुखी विकास हो सकेगा।

बसपा सुप्रीमो मायावती

सत्ता जाने के बाद कयास लगाये जा रहे थे कि बसपा सुप्रीमो मायावती राजनीतिक दृष्टि से हाशिये पर जा सकती हैं, साथ ही भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में घिर सकती हैं, जिससे बसपा के कार्यकर्ता भी मायूस नजर आ रहे थे, लेकिन पिछले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से मायावती को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एफआईआर खारिज करने के आदेश के चलते मायावती को नई ऊर्जा मिल गयी है, वहीं कार्यकर्ताओं में भी जोश का संचार हो गया है।

क्या था मामला? आय से अधिक संपत्ति के मामले में 1995 में सीबीआई ने जांच शुरू की थी। उनके विरुद्ध सितंबर 2००3 में आपराधिक मामला दर्ज किया गया, जिसके विरोध में मायावती ने अदालत में गुहार लगाते हुए कहा कि सीबीआई विरोधियों और राजनीतिक शक्तियों के इशारे पर उनके खिलाफ जांच कर रही है।

सीबीआई ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने कहा था कि उसके पास मायावती के खिलाफ पुख्ता सुबूत हैं। सीबीआई ने कई बार तर्क दिया कि 2००3 में मायावती के पास एक करोड़ रुपये की कुल संपत्ति थी, जो वर्ष 2००7 में 5० करोड़ रुपये से अधिक हो गयी।

मायावती ने क्या कहा? मायावती ने सुप्रीम कोर्ट में सफाई देते हुए कहा था कि उनके पास आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति नहीं है, साथ ही, जो है, वह कार्यकताओं के पैसे और चंदे से जमा की गयी है।

कोर्ट ने क्या कहा? मायावती के विरुद्ध दर्ज एफआईआर को यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया कि एफआईआर दर्ज करने की जरूरत नहीं थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मायावती के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को नहीं कहा। कोर्ट ने यह भी कहा कि सीबीआई की दलील गैरवाजिब है, साथ ही सीबीआई ने पूर्व निर्देश को समझने में गलती की है।

आदेश के बाद मायावती ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद मायावती ने प्रेस से बात करते हुए कहा कि वह इस फैसले का स्वागत करती हैं और सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देती हैं। मायावती ने बसपा की जीत बताया और कहा कि बसपा कार्यकर्ताओं ने बड़े धैर्य के साथ इस दिन का इंतजार किया।

इधर राष्ट्रपति पद के यूपीए के प्रत्याशी प्रणव मुखर्जी को समर्थन देने की घोषणा करने पर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की कड़ी आलोचना हुई। किसी ने

सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव

स्वार्थी कहा, तो किसी ने अवसरवादी, लेकिन अब साफ हो गया है कि उन्होंने समर्थन देने का निर्णय उत्तर प्रदेश और जनता की भलाई को ध्यान में रख ही लिया। केन्द्र से मिले धन से प्रदेश का चहुंमुखी विकास होगा, जिसकी कल्पना से प्रदेश की जनता खुश नजर आ रही है। प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केन्द्र सरकार को 38 पत्र लिख कर 93, 3०2.75 करोड़ रुपये की मांग की थी। केन्द्र सरकार से धन की मांग पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी करती रहीं, लेकिन केन्द्र ने प्रदेश को धन नहीं दिया। फिलहाल मिला धन सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की कूटनीतिक चाल का ही परिणाम है, वरना केन्द्र सरकार प्रदेश को आर्थिक मदद के नाम पर खोटा सिक्का भी नहीं देती। प्रदेश को मिले धन से इलाहाबाद में लगने वाले महाकुंभ का आयोजन और बेहतर तरीके से हो सकता है। बाढ़, सुरक्षा, सिंचाई, पेयजल की आशा के अनुरूप व्यवस्था हो सकेगी एवं प्रदेश के छात्रों को बड़ा लाभ होगा। इसके अलावा बुंदेलखंड व पूर्वांचल में सडक़ों के जाल के साथ अन्य कई तरह की प्रभावी योजनायें चलाई जायेंगी। प्रदेश हित में लिये गये सपा सुप्रीमो के निर्णय का असर दिखने के कारण प्रदेश की जनता बेहद खुश है। अब अखिलेश यादव के सामने और भी बड़ी चुनौती है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही होने पर ही प्रदेश के भ्रष्ट अफसर, बाबू और ठेकेदार मिल कर धन को हजम कर सकते हैं। यह धन पात्रों तक नहीं पहुंचा या विकास कार्य की जगह बंदरबांट हो गया, तो सपा सुप्रीमो की मेहनत का कोई लाभ नहीं होगा, इसलिए विकास कार्यों पर मुख्यमंत्री को स्वयं कड़ी नजर रखनी होगी।

Leave a Reply