सीडीओ का आदेश अधीनस्थ पीडी ने तत्काल ही पलटा

हरेन्द्र सिंह यादव
हरेन्द्र सिंह यादव

बदायूं के जिला ग्राम्य विकास अभिकरण में परियोजना निदेशक के पद पर तैनात रामरक्ष पाल यादव की मनमानी करने की सनक लगातार बढ़ती जा रही है। आलम यह है कि उन्होंने आज मुख्य विकास अधिकारी के आदेश को दस मिनट बाद ही पलट दिया, जिसकी विकास भवन में व्यापक स्तर पर चर्चा हो रही है।

गौरतलब है कि रामरक्ष पाल यादव को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव का बेहद खास कहा जाता है, इसीलिए उनका अधीनस्थ कर्मियों के साथ व्यवहार बेहद घटिया स्तर का रहता है। सूत्रों का कहना है कि वह अधिकतर कर्मियों को बेवजह गालियाँ देते रहते हैं, इतना ही नहीं विधायकों और सांसद के बारे में भी ऐसी-ऐसी टिप्पणियाँ करते रहते हैं, जिसके बारे में कोई भी बताने से डरता है, साथ ही सत्ता शीर्ष से संबंध होने के कारण ही निजी व सरकारी गाढ़ी पर नीली बत्ती लगा कर चलते हैं और शीर्ष अफसरों के आदेशों को भी बिल्कुल तरजीह नहीं देते।

बताया जाता है कि जिला ग्राम्य विकास अभिकरण में कनिष्ठ लिपिक के पद पर तैनात हरेन्द्र सिंह यादव बुधवार को सेवानिवृत हो रहे हैं, जिससे आज उन्हें समस्त कार्यभारों से मुक्त किया गया। मुख्य विकास अधिकारी उदय राज सिंह ने शाम को लगभग साढ़े तीन बजे आदेश दिया कि शेखूपुर विधान सभा क्षेत्र और एमएलसी की निधि की देख-रेख का कार्य राजीव भारती और बिसौली विधान सभा क्षेत्र की निधि की देख-रेख का कार्य अनिल गुप्ता को सौंप दिया जाये। मुख्य विकास अधिकारी के इस आदेश का पालन होता, उससे पहले पीडी रामरक्ष पाल यादव ने भी एक आदेश जारी कर दिया कि बिसौली विधान सभा क्षेत्र की निधि की देख-रेख राजीव भारती ही करेंगे, जबकि सीडीओ के आदेश को पलटने का अधिकार पीडी को नहीं होता, जिससे पूरा प्रकरण समूचे विकास भवन में चर्चा का विषय बना हुआ है। यहाँ यह भी दें कि पीडी की मनमानी की शिकायत शासन स्तर पर भी हो चुकी है, लेकिन उच्च स्तरीय राजनैतिक पहुंच होने के कारण शिकायतों को दबा दिया गया है।

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