सत्ता बदली, व्यवस्था नहीं, कायम है भ्रष्टाचारियों का राज

सीएमओ कार्यालय
बदायूं के जिला अस्पताल के साथ मुख्य चिकित्साधिकारी का कार्यालय भी भ्रष्टाचारियों के कब्जे में है। जिला अस्पताल में धारा 324, 325, 326, 3०7 बनवाना या खत्म कराना बड़ा ही आसान काम माना जाता है, लेकिन खुलासा होने के बाद भी किसी तरह का अंकुश नहीं लगाया जा रहा है, इसी तरह बलात्कार की पीडि़त, अपहृत या प्रेम प्रसंग के चलते घर से फरार हुई लड़कियों का आयु सर्टिफिकेट सीएमओ कार्यालय द्वारा जारी किया जाता है। यहां पटल देखने वाला संबंधित बाबू रुपये देने वाले की मंशा के अनुरूप आयु निश्चित करता है। प्रेम प्रसंग के मामले में बालिग लडक़ी को नाबालिग दर्शा दिया जाये, क्योंकि नाबालिग होने पर लडक़ी की जगह उसके अभिवावकों के बयान माने जाते हैं, साथ ही उसे स्वेच्छा से विवाह करने का अधिकार भी नहीं दिया जा सकता, इसलिए अधिकांश लोग आयु अधिक या कम कराने इस बाबू के पास आ ही जाते हैं। लडक़ी पक्ष रुपये दे दे, तो आरोपी पक्ष पर जघन्य धाराओं का मुकदमा कायम कराने का आधार चुटकियों में दे देता है, वहीं आरोपी पक्ष सेटिंग कर जाये, तो नाबालिग लडक़ी को बालिग करार दे देता है।
बताया जाता है कि यह भ्रष्ट बाबू बीस सालों से भी अधिक समय से एक ही पटल पर जमा है। इसका जनपद बिजनौर के लिए तबादला भी हुआ था, लेकिन शातिर दिमाग बाबू एक यूनियन का पदाधिकारी बन गया, क्योंकि नियमानुसार अध्यक्ष और महासचिव का तबादला नहीं किया जाता है। सवाल यह है कि स्थानीय स्तर पर पटल तो बदला ही जा सकता है, पर सेटिंगबाज और कमाऊ बाबू होने के कारण इस भ्रष्ट को कोई पटल से भी नहीं हटाता। इससे भी बड़े हैरत की बात यह है कि खुलासा होने के बाद भी इस ओर किसी का ध्यान तक नहीं जा रहा है।

विकास विभाग
केन्द्र सरकार की मंशा के तहत मनरेगा के धन से कंप्यूटर, जेनरेटर, कैमरे आदि सामान की खरीददारी हुई थी। अधिकांश सामान स्टीमेट और बिल के विपरीत खरीदा गया, साथ ही बाजार भाव से कई गुना अधिक पेमेंट किया गया। कंप्यूटर की टीएफटी की लंबाई-चौड़ाई आज भी बिल के अनुसार नहीं हैं, जिसका खुलासा और शिकायतें उस समय भी हुईं, पर उच्च स्तरीय मिलीभगत के चलते दोषियों के विरुद्ध जांच तक नहीं हुई।
इसी तरह एक हजार से अधिक कैमरे भी खरीदे गये। योजना के अनुसार कैमरे रोजगार सेवकों को देने थे। विधान सभा चुनाव के दौरान उन कैमरों की जरूरत महसूस हुई तो कैमरों को संज्ञान में लिया गया। मौके पर कैमरे न होने के कारण अधिकारियों द्वारा संज्ञान लेते ही हडक़ंप मच गया। बताया जाता है कि कुछ कैमरे थे भी, उन्हें प्रभावशाली बाबू और अफसर अपने घर ले गये। यह मामला भी दबा हुआ है। कैमरे घोटाले की गहनता से जांच कराई जाये, तो कई लोग सलाखों के पीछे जा सकते हैं।

लुटेरी संस्था
लुटेरों के संगठन के रूप में कुख्यात उत्तर प्रदेश श्रम एवं निर्माण सहकारी संघ के विरुद्ध भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, जबकि इस संस्था का मूल कार्य सरकारी धन को हजम करना ही है। बताया जाता है कि इस संस्था को बसपा शासन में 3० मई 2०1० को तत्कालीन मुख्य सचिव अतुल कुमार ने एक वर्ष कार्य करने की अनुमति प्रदान की थी, लेकिन यह संस्था आज तक कार्य कर रही है, साथ ही तमाम कार्य ऐसे हैं, जो वर्ष 2०1० में ही पूरे करने थे, लेकिन कार्य पूर्ति का समय निकल जाने के बाद भी संस्था के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जा रही है। बदायूं में संस्था द्वारा कराये गये कार्यों की गहनता से जांच कराई जाये, तो अधिकांश कार्य मानक के विरुद्ध ही हैं, लेकिन सेटिंग के दौर में संस्था के विरुद्ध कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं दिख रहा है।

जिला ग्राम्य विकास अभिकरण
जिला ग्राम्य विकास अभिकरण में इतने घपले हैं कि जांच करने के लिए एक विभाग ही बनाना पड़ेगा। बात फिलहाल पीडी के स्टेनो फहीम अहमद रिजवी की है, जो खुद में ही पूरा का पूरा एक विभाग है। इस शख्स पर तमाम गंभीर आरोप लगते रहे हैं और जांच में सिद्ध भी होते रहे हैं, लेकिन इसके विरुद्ध कार्रवाई होना तो दूर की बात, इससे संबंधित पत्रावलियां ही गायब हो जाती हैं।  पिछले दिनों तत्कालीन डीएम एम. देवराज द्वारा एलआईयू द्वारा कराई गयी जांच चर्चा का विषय बनी हुई है। जांच में आरोप हैं कि फहीम महिलाओं से अनैतिक संबंध
रखता है एवं महिलाओं के संबंध अफसरों से भी बनवाता है। पैतृक संपत्ति शून्य होने पर भी करोड़ों का स्वामी है और साथी कर्मचारियों से अभद्र व्यवहार करता है। जांच रिपोर्ट में यहां तक कहा गया है कि फहीम स्वार्थ पूर्ति के लिए कुछ भी कर सकता है। इस जांच रिपोर्ट के बाद देवराज ने फहीम का सीडीओ कार्यालय से संबंद्धीकरण निरस्त कर दिया था, इसके बाद उनका स्थानांतरण हो गया, लेकिन निलंबन के साथ विभागीय जांच भी होनी चाहिए थी, जो आज तक नहीं कराई गयी है। सूत्रों का कहना है कि पिछली तमाम पत्रावलियों की तरह ही यह जांच रिपोर्ट भी गायब करा दी गयी है।

Leave a Reply