शिगूफा: बदायूं महोत्सव के खर्चों पर एसटीओ रखेंगे नियन्त्रण

  • चमचों को दिए जायेंगे पुरस्कार
बदायूं महोत्सव से संबंधित बैठक में मौजूद अधिकारीगण
बदायूं महोत्सव से संबंधित बैठक में मौजूद अधिकारीगण

बदायूं महोत्सव में होने वाली लूट की गौतम संदेश की खबरों का कुछ असर हुआ है, तभी आज जिलाधिकारी ने खर्चों पर नियन्त्रण हेतु वरिष्ठ कोषाधिकारी प्रवीण कुमार त्रिपाठी को जिम्मेदारी सौंपी है। बदायूं महोत्सव में पहली बार स्थानीय लोगों की काव्य लेखन प्रतियोगिता आयोजित कराने के भी निर्देश दिए हैं।
कलेक्ट्रेट स्थित सभा कक्ष में बदायूं महोत्सव आयोजन के सम्बन्ध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी ने बदायूं महोत्सव अन्तर्गत जनपद में पहली बार काव्य लेखन प्रतियोगिता कराने के निर्देश देते हुए कहा है कि जो लोग प्रतियोगिता में भाग लेना चाहें वह अपना नाम बदायूं क्लब के सचिव को नोट करा सकते हैं। बदायूं महोत्सव में विकास पुष्प प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा। प्रदर्शनी में स्वयं तैयार किए गए पुष्प पौधों को रखा जा सकता है। बदायूं महोत्सव के तहत साईकिल मैराथन तथा बैडमिंटन प्रतियोगिता भी आयोजित कराई जाएगी। जिलाधिकारी ने अलग-अलग कार्यक्रमों के जिला स्तरीय अधिकारियों की समितियां गठित कर अपने-अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करने के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी ने महोत्सव अवधि में कलेक्ट्रेट से बदायूं क्लब के मार्ग को डेकोरेट कराने के निर्देश देते हुए बदायूं महोत्सव आयोजन हेतु मुख्य विकास अधिकारी उदयराज सिंह को जिम्मेदारी सौंपी है। जिलाधिकारी ने महोत्सव में विकास प्रदर्शनी लगाने हेतु सभी विभागों के अधिकारियों से कहा है कि शासकीय योजनाओं से सम्बंधित प्रदर्शनी महोत्सव में अवश्य लगाएं।
20 तथा 21 फरवरी को स्कूली बच्चों तथा अन्य प्रतिभाओं का ऑडीशन बदायूं क्लब में होगा। ऑडीशन में सफल प्रतिभागियों को ही बदायूं महोत्सव के मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर प्रदान किया जाएगा। बदायूं महोत्सव में विराट कवि सम्मेलन, आल इंडिया मुशायरा, सांस्कृतिक संध्या, सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक गीत, रंगोली प्रतियोगिता, शास्त्रीय संगीत, हेल्दी बेबी शो सहित अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। गत वर्षो की भांति इस वर्ष भी बदायूं महोत्सव की ओर से स्मारिका का प्रकाशन किया जाएगा। इस अवसर पर एसपी सिटी मान सिंह चौहान, अपर जिलाधिकारी प्रशासन मनोज कुमार, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व शीलधर यादव, जिला विकास अधिकारी प्रदीप कुमार सोम अन्य अधिकारीगण व क्लब के सदस्यगण मौजूद रहे।
उल्लेखनीय है कि बदायूं महोत्सव के नाम पर चंद लोग खुद की ब्रांडिंग का काम करते रहे हैं, साथ ही महोत्सव के नाम पर शासन-प्रशासन की मदद का खुला दुरूपयोग भी करते रहे हैं। महोत्सव के नाम पर लाखों रूपये का चंदा एकत्रित किया जाता है, लेकिन उसकी रसीद जारी नहीं की जाती और न ही चंदे में मिला रुपया खाते में जमा किया जाता है। सीधे उगाही कर अधिकाँश रूपये का सीधा खर्च दिखा दिया जाता है, जिसका कोई लेखा-जोखा नहीं रहता, इसलिए लाखों रूपये हड़प लिए जाते हैं, इसके अलावा मंच और वीआईपी गैलरी में अपने चहेतों को ही स्थान दिया जाता है, जिसको लेकर अधिकांश लोगों में आक्रोश रहता है, लेकिन शासन-प्रशासन का खुला सरंक्षण होने के कारण लोग चुप रह जाते हैं, पर इस बार मनमानी और लूट हुई, तो उसका सीधा नुकसान सांसद धर्मेन्द्र यादव को उठाना पड़ सकता है, क्योंकि महोत्सव का आयोजन फरवरी के अंत में होगा, जिसके कुछ समय बाद ही चुनाव होगा और चुनाव में शहर के साथ जिले भर के आम मतदाताओं के जहन में महोत्सव में होने वाली मनमानी और लूट की घटना ताज़ा रहेगी। इसके अलावा एक ख़ास जाति वर्ग का ही बोलबाला रहने के कारण भी अधिकाँश लोग महोत्सव के विरुद्ध ही रहते हैं, साथ ही विश्व भर में बदायूं को ख्याति दिलाने वाले गीतकार शकील बदायूंनी की उपेक्षा के चलते मुस्लिम वर्ग ख़ास तौर पर महोत्सव से दूर रहता है और न ही उसे महोत्सव में सम्मिलित करने का प्रयास किया जाता है।

महोत्सव में मनमानी और लूट होने का प्रमाण यह है कि महोत्सव का आयोजन पिछली बसपा सरकार में नहीं किया गया, जबकि जो लोग अब आयोजित करते हैं, यही तब थे, लेकिन तब लूट न करने की स्थिति थी, जिससे किसी को महोत्सव आयोजित करने का ख्याल तक नहीं आया। सपा सरकार आने पर पिछले वर्ष महोत्सव का जिन्न फिर बाहर निकल आया, तो निवर्तमान डीएम जीएस प्रियदर्शी ने विभिन्न कार्यक्रमों को लेकर तीन सदस्यीय कमेटियां गठित कर दीं और प्रत्येक कमेटी का अध्यक्ष सरकारी अफसर को बनाया, जिससे मनमानी और लूट पर अंकुश लग सकता था, लेकिन महोत्सव आयोजित होने से पहले ही उनका बुलन्दशहर तबादला हो गया और उनकी जगह आये वर्तमान डीएम चन्द्रप्रकाश त्रिपाठी ने निवर्तमान डीएम की फ़ाइल तक खोल कर नहीं देखी, साथ ही बिना कोई नियम बनाये प्राइवेट लोगों को मनमानी और लूट की खुली छूट दे दी, जिससे शासन-प्रशासन की जमकर फजीहत हुई। जिले भर के लोगों ने खुल कर विरोध भी किया, जिससे इस बार पारदर्शिता बरतने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन क्लब के पदाधिकारी जिस तरह से हावी हैं, उसे देखते हुए फिलहाल नहीं लग रहा कि डीएम का खर्चों पर नियन्त्रण हेतु वरिष्ठ कोषाधिकारी प्रवीण कुमार त्रिपाठी को जिम्मेदारी देने यह आदेश प्रभावी होगा।       

उधर सूत्रों का कहना है कि क्लब की कमेटी ने पुरस्कार देने के लिए नाम तय कर लिए हैं, जिनमें एक नाम गैर जनपद के ऐसे व्यक्ति का भी बताया जा रहा है, जिसका बदायूं के इतिहास में कोई योगदान नहीं है, पर जातिवाद, चमचागीरी और अन्य तमाम स्वार्थों की पूर्ति को ध्यान में रखते हुए ऐसे व्यक्ति को बदायूं श्री से सम्मानित करने का निर्णय हो चूका है, जिसको लेकर आने वाले समय में बवाल होने की पूरी संभावना जताई जा सकती है।

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