वरुण गाँधी के दीदार को बेताब नज़र आई जनता

  • वरुण गांधी के कार्यक्रम में भाजपा की गुटबंदी उभर कर सामने आई
  • वरुण गाँधी के आसपास भी नहीं दिखे संगठन के पदाधिकारी
  • गुटबंदी का यही हाल रहा, तो भाजपा के लिए दूर ही साबित होगी दिल्ली
हवन में सामग्री डालते सांसद वरुण गांधी, साथ पूर्व विधायक रामसेवक सिंह पटेल व पूर्व विधायक धर्मेन्द्र कश्यप।
हवन में सामग्री डालते सांसद वरुण गांधी, साथ पूर्व विधायक रामसेवक सिंह पटेल व पूर्व विधायक धर्मेन्द्र कश्यप।

गाँधी परिवार का अपना क्रेज है। राहुल गांधी हों या वरुण गाँधी, जनता इस परिवार के हर सदस्य को विशेष समझती है, इसीलिए उन्हें देखने/सुनने और उनसे मिलने को उमड़ पड़ती है। आज वरुण गाँधी के बदायूं आगमन पर ऐसा ही कुछ नज़ारा देखने को मिला। उधर जनता वरुण गाँधी को देखने को उतावली थी, वहीँ भाजपा का एक गुट उस राह से भी नहीं गुजरा, जिस राह से वरुण गाँधी का काफिला गुजर रहा था, जिससे कई तरह की चर्चायें आज पूरे दिन राजनीति के वातावरण में छाई रहीं।

बदायूं के एक मात्र कट्टरपंथी नेता पूर्व विधायक रामसेवक सिंह पटेल ने जवाहरपुरी में विशाल होटल का निर्माण किया है, जिसके शुभारंभ पर हुए हवन-पूजन में सम्मलित होने के लिए भाजपा के फायर ब्रांड नेता सांसद वरुण गाँधी को आमंत्रित किया गया था। वरुण गाँधी मुरादाबाद मार्ग से बदायूं की सीमा में घुसे, तभी ओरछी स्थित चौराहे पर पूर्व विधायक रामसेवक सिंह पटेल के नेतृत्व में हजारों की भीड़ ने उनका वहीं जोरदार स्वागत किया और फिर वहां से वह रोड शो करते हुए बदायूं शहर में पहुंचे। कार्यक्रम के अनुसार उन्हें बदायूं में एक बजे पहुंचना था, लेकिन काफिले ने इतना बड़ा रूप ले लिया कि शाम चार बजे बदायूं पहुंचे। पूर्व विधायक के होटल के गेट पर भी उनका बैंड-बाजों पर थिरकते युवाओं ने पुनः जोरदार स्वागत किया। वरुण जैसे ही गाड़ी से बाहर निकले, वैसे ही युवाओं का रैला उनकी ओर उमड़ पड़ा। कोई हाथ मिलाना चाहता था, तो कोई साथ में तस्वीर कैद करने का प्रयास कर रहा था। भीड़ के चलते उनकी सुरक्षा व्यवस्था भी चौपट हो गई। उनके गार्ड भीड़ में इधर-उधर हो गये और भीड़ के सहारे ही वह नव-निर्मित होटल के अंदर तक पहुँच गये। यहाँ हवन-पूजन के बाद प्रेसवार्ता का कार्यक्रम भी रखा गया, लेकिन वरुण पत्रकारों के पास आये और सभी का अभिवादन कर चले गये। उन्होंने किसी भी तरह की गुटबंदी में न पड़ने के कारण प्रेसवार्ता नहीं की। सुबह से वरुण गाँधी की अगुवानी में लगे पत्रकारों को वार्ता न करना बहुत अखरा, जिसके लिए बाद में रामसेवक सिंह पटेल ने क्षमा भी मांगी।

खैर, इस सब के बीच सब से बड़ी चर्चा की बात यह रही कि वरुण के आसपास संगठन के लोग दिखाई नहीं दिए। पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि वरुण गाँधी के कार्यक्रम की पार्टी की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई है, इसलिए वह कार्यक्रम में नहीं जा सकते, वहीं सूत्रों का कहना है कि अधिकाँश जिलों की तरह बदायूं में भी भाजपा के दो-तीन गुट हैं। एक गुट रामसेवक सिंह पटेल को नहीं पचा पा रहा है। यह गुट रामसेवक सिंह को भाजपा में न लेने का भी अंतिम समय तक प्रयास करता रहा। रामसेवक सिंह की बदायूं में ही वरुण गाँधी की विशाल रैली आयोजित करा कर, उसी रैली में खुद के भाजपा में शामिल होने की घोषणा कराने का इरादा था, लेकिन अंत समय में वरुण का कार्यक्रम निरस्त हो गया, इसलिए रामसेवक सिंह को प्रदेश मुख्यालय में जाकर सदस्यता ग्रहण करनी पड़ी। सूत्रों का कहना है कि हवन-पूजन के बहाने वरुण गाँधी को बुला कर रामसेवक सिंह पटेल ने आज शक्ति प्रदर्शन ही किया है, जिसका भाजपा में बड़ा प्रभाव होगा और असर कुछ दिन बाद दिखेगा, लेकिन इतना निश्चित है कि इस तरह की गुटबंदी बनी रही, तो आने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा के हाथ कुछ नहीं लगने वाला, इसलिए समय रहते शीर्ष नेतृत्व को इस सब पर कड़ाई से अंकुश लगाना ही होगा।

स्वागत से अभिभूत व भीड़ से घिरे सांसद वरुण गांधी
स्वागत से अभिभूत व भीड़ से घिरे सांसद वरुण गांधी

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