लूट का बसपाई तरीका सपाई अफसरों को भी भाया

  •  जिलाधिकारी को विकास भवन पर खुद ही रखनी होगी नजर
संजय आर्य
संजय आर्य

बदायूं के अफसरों को लूट को बसपाई तरीका रास आ गया है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुए अभी ठीक से दो माह भी नहीं बीते हैं, लेकिन अधिकारियों ने सरकारी धन की लूट की पूरी तैयारी कर ली है। अपर जिला विकास समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित फ्री वोरिंग की स्कीम के तहत लगने वाले वोरिंग का ठेका बरेली के एक पंचायत उद्योग दे दिया गया है, जो चर्चा का विषय बना हुआ है। बसपा शासन में इसी तरह सरकारी धन को लूटने का तरीका इजाद किया गया था। अपने चहेतों को अफसरों ने ठेके देकर पचास प्रतिशत रुपया हजम किया था, जिससे लाभार्थी पूरे पांच साल आसमान की ओर निहारते रहे और अतंत: आस ही छोड़ दी। वैसे ही तैयारी सपा शासन में भी शुरू कर दी गयी है, क्योंकि कार्यदायी संस्थायें बदायूं में भी हैं, लेकिन सेटिंग के खेल के चलते अफसरों के बरेली का पंचायत उद्योग पसंद आया। सरकारी योजनाओं में शुरू हो चुकी मनमानी को लेकर कहा जा रहा है कि विकास भवन पर जिलाधिकारी को स्वयं ही नजर रखनी होगी।

  • बसपाईयों को हटाये बिना नहीं रुकेगा भ्रष्टाचार

बसपा के पांच साल के शासन में बदायूं में बाबुओं की प्रतिदिन जेब भरने की आदत पड़ गयी है, जिसे खत्म करना आवश्यक है। उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन तो हो गया, लेकिन बाबू जहां के तहां जमे हुए हैं, जो अफसर ईमानदार आ जाये, तो उसे कुछ ही दिनों में बेईमान बनने पर मजबूर कर देते हैं। विकास भवन स्थिति कार्यालय मूख्य विकास अधिकारी के अधीन कार्य करते हैं, लेकिन मुख्य विकास अधिकारी के कार्यालय में बसपाई बाबू आज भी डटे हुए हैं, जो सभी अधिकारियों व कर्मचारियों पर रौब गांठते रहते हैं। संजय आर्य और मोहन लाल विकास विभाग के वरिष्ठ लिपिक हैं। संजय आर्य के संबद्धीकरण को तो और भी लंबा समय हो चुका है, जबकि इन्हें चक्रानुसार ब्लाक मुख्यालयों पर भी तैनात करना चाहिए, लेकिन सेटिंग के चलते संजय आर्य का तबादला कोई नहीं करता, वहीं ऊंची राजनैतिक पहुंच के चलते सीडीओ के स्टेनो के रूप में मूल पद पर तैनात सुरेन्द्र गौतम सहायक कर्मचारी के रूप में काम देखने को मजबूर हैं।

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