प्रसाद की तरह बांट दिया फ्री वोरिंग लगाने का ठेका

 

सपा का भ्रष्टाचार मुक्त विकास कार्य कराने का दावा फेल

दस वोरिंग शाहजहांपुर के पंचायत उद्योग को भी दिये

सेटिंग के चलते सीडीओ कार्यालय से नहीं हटे बसपाई बाबू

 

खुलासा होने के बाद भी मुख्य विकास अधिकारी ने बरेली के पंचायत उद्योग को दिये गये कार्य को निरस्त नहीं किया है और न ही बसपाई बाबुओं को हटाया है, जिससे भ्रष्टाचार मुक्त विकास कार्य कराने के सपा सरकार के दावे पर प्रश्र चिन्ह लगा हुआ है। उल्लेखनीय है कि गौतम संदेश ने पिछले अंक में खुलासा किया था कि सरकारी योजना के तहत लगने वाले फ्री वोरिंग का ठेका बरेली के पंचायत उद्योग को दिया गया है, इसमें एक और नई बात यह पता चली है कि कुल बीस वोरिंग में दस बरेली के पंचायत उद्योग को और दस शाहजहांपुर के पंचायत उद्योग को दिये गये हैं। यहां सवाल यह उठता है कि अधिकारियों को अगर बदायंू की संस्थाओं के मुकाबले बरेली के पंचायत उद्योग की कार्यप्रणाली बेहतर दिखी, तो उन्हें पूरा काम उसे देना चाहिए था या शाहजहांपुर को देना चाहिए, लेकिन दस-दस वोरिंग बांटने से और भी कई सवाल सामने खड़े नजर आ रहे हैं, जबकि बदायूं में लघु सिंचाई विभाग वोरिंग करने में सक्षम है, इसलिए बरेली और शाजहांपुर के पंचायत उद्योगों को ठेका देने का रहस्य किसी की समझ में नहीं आ रहा है। इससे भी बड़े आश्चर्य की बात यह है कि गौतम संदेश द्वारा खुलासा करने के बाद भी वरिष्ठ उच्चाधिकारी मामले में कार्रवाई कराने को तैयार नहीं दिख रहे हैं, जबकि बरेली और शाहजहांपुर की संस्था को दिये गये कार्य निरस्त कर बदायूं की ही किसी कार्यदायी संस्था को दिला देने चाहिए थे। उधर गौतम संदेश ने यह भी खुलासा किया था कि सीडीओ कार्यालय में बसपाई बाबुओं का कब्जा है। विकास विभाग के वरिष्ठ लिपिक संजय आर्य डेढ़ दशक से भी अधिक समय से संबद्ध चल रहे हैं, जबकि विकास विभाग में कर्मचारियों की कमी है। चुनाव के दौरान ब्लाक मुख्यालयों से कर्मचारियों को संबद्ध कर चुनाव का काम चलाया गया, लेकिन संजय आर्य को सेटिंग के चलते नहीं हटाया जा रहा है, इसी तरह मोहन लाल भी सीडीओ कार्यालय से संबद्ध हैं और यह भी विकास विभाग के ही हैं। सीडीओ के पास स्टैनो के रूप में सुरेन्द्र गौतम हैं, लेकिन सेटिंग के चलते संजय आर्य स्टैनो का मूल कार्य देख रहे हैं। संजय आर्य ने सुरेन्द्र गौतम को टाईपिस्ट बना रखा है। सीडीओ के साथ संजय आर्य ही दौरे पर जाते हैं और लौट कर आने के बाद स्टैनो सुरेन्द्र गौतम से पत्र बनवाते हैं, क्योंकि संजय आर्य को शार्ट हैंड और कंप्यूटर का ज्ञान है ही नहीं, वहीं सीडीओ के चहेते होने के कारण संजय के निर्देश मानने को सुरेन्द्र मौखिक रूप से बाध्य हैं, सो मौन धारण कर उनके आदेश माने जा रहे हैं, जबकि पिछले दिनों शासन ने स्पष्ट आदेश दिये थे कि सुरेन्द्र गौतम से स्टैनो का काम ही लिया जाये।

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