राहत पहुंचाने के लिए गंभीरता से काम किया: मुख्य सचिव

 
 
  • स्थानीय प्रशासन को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि ठण्ड से बचाव के लिए हर सम्भव कदम उठाए जाएं
 
  • दंगा प्रभावित लोगों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराने के अलावा मृतक लोगों के आश्रितों को नौकरी तथा घायलों को पेंशन आदि की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई
 
  • राहत शिविरों के माध्यम से लोगों को ठहरने, चिकित्सा, खाद्य सामग्री एवं दैनिक उपयोग की जरुरी समस्त सुविधायें दी गईं
मुख्य सचिव जावेद उस्मानी
मुख्य सचिव जावेद उस्मानी
उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने आज लखनऊ में बताया कि जनपद मुजफ्फरनगर एवं इसके आसपास के जनपदों में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचानें के लिए राज्य सरकार ने गम्भीरता से काम किया है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण घटना के फलस्वरूप मृत व्यक्तियों के परिजनों को सरकारी नौकरी के साथ-साथ अन्य प्रकार की आर्थिक मदद उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि शिविरों में रह गए लोगों को ठण्ड से बचाने के लिए पूरे प्रबन्ध किए गए हैं। स्थानीय प्रशासन को स्पष्ट तौर पर हिदायत दी गई है कि ठण्ड से बचाव के लिए हर सम्भव कदम उठाए जाएं।
श्री उस्मानी आज यहां शास्त्री भवन स्थित मीडिया सेण्टर में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने दंगा प्रभावित लोगों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराने के अलावा मृतक लोगों के आश्रितों को नौकरी तथा घायलों को पेंशन आदि की सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले मे दिनांक 27 अगस्त, 2013 को हुई एक दुखद घटना के बाद विगत 7 सितम्बर, 2013 को अचानक भड़की साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन व प्रदेश सरकार द्वारा तत्परता से प्रयास किये गये। मुजफ्फरनगर के तीन थाना क्षेत्रों में कफ्र्यू लगाया गया। शासन द्वारा तत्काल सेना की सहायता ली गयी तथा भारी संख्या में केन्द्रीय अद्र्वसैनिक बलों की तैनाती कर अगले दिन 8 सितम्बर, 2013 तक स्थिति पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया। दिनांक 9 सितम्बर, 2013 के उपरान्त छिटपुट घटनाओं को छोड़कर साम्प्रदायिक हिंसा की कोई घटना घटित नही हुई।
इन साम्प्रदायिक घटनाओं में लिप्त अपराधिक तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही करते हुए अब तक कुल 319 अभियुक्तों की गिरफ्तारी की जा चुकी हैं। कानून व्यवस्था बनाये रखने हेतु धारा 107/116 (3) सीआरपीसी के अन्तर्गत कुल 7410 व्यक्तियों को मुचलके पर पाबन्द किया गया। घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए 3 हजार से अधिक लोगों को धारा 151 दा0प्र0स0 के अन्तर्गत निरुद्ध किया गया। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत 11 व्यक्तियों के विरुद्ध निरोधात्मक कार्यवाही की गयी और सुरक्षा की दृष्टि से शस्त्र लाइसेंसो का निरस्तीकरण व शस्त्र जब्त करने की कार्यवाही की गयी। साम्प्रदायिक घटनाओं से संबंधित पंजीकृत अभियोगों की विवेचना के लिए विशेष विवेचना सेल का गठन किया गया जिसमें विशेष दक्ष पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
घटना की गम्भीरता को देखते हुए शासन द्वारा पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हेतु सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति श्री विष्णु सहाय की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग गठित किया गया। मुजफ्फरनगर व सीमावर्ती जनपदों मेरठ, बागपत, सहारनपुर एवं शामली में उपर्युक्त साम्प्रदायिक तनाव व हिंसा की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में कुल 65 व्यक्तियों की मृत्यु हुई थी, तथा कुल 85 व्यक्ति घायल हुये थे।
राज्य सरकार द्वारा साम्प्रदायिक हिंसा में मृत व्यक्तियों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देते हुए कुल 6 करोड़ 35 लाख रुपये की धनराशि वितरित की गयी। मृत 58 व्यक्तियों के आश्रितों को शासन द्वारा नौकरी दी गयी। प्रधानमंत्री राहत कोष से 60 मृतकों के आश्रितों को 2-2 लाख रुपये की दर से एवं मृतक पत्रकार के आश्रित को 10 लाख रुपये सहित कुल 1 करोड़ 30 लाख रुपये की धनराशि दी गयी है।
राज्य सरकार द्वारा गम्भीर रुप से घायलों को 50-50 हजार रुपये देते हुये अब तक कुल 34 व्यक्तियों को 17 लाख रुपये की धनराशि दी गयी। साधारण रुप से घायल कुल 51 व्यक्तियों को 20-20 हजार रुपये की दर से 10 लाख 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गयी। हिंसक घटनाओं में 74 घायलों को रानी लक्ष्मी बाई पेंशन योजना के तहत 400 रुपये प्रतिमाह की दर से सितम्बर, 2013 से पेंशन स्वीकृत की गयी। प्रधानमंत्री राहत कोष से भी गम्भीर रुप से घायलों को 50 हजार रुपये प्रति व्यक्ति की दर से आर्थिक सहायता दी गयी है।
जिन व्यक्तियों की चल-अचल सम्पत्ति का नुकसान हुआ उन्हें भी शासन द्वारा राहत प्रदान की गयी। अचल सम्पत्ति को हुई क्षति के लिए रुपये 50 हजार तक की क्षति के लिए रुपये 50 हजार की राहत, 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की क्षति के लिए रुपये 1 लाख की राहत तथा इससे अधिक हुई क्षति हेतु वास्तविक आगणन के अनुसार सहायता दी गयी। इसी प्रकार चल सम्पत्ति हेतु रुपये 25 हजार की क्षति तक रुपये 25 हजार की राहत तथा रुपये 25 हजार से 50 हजार तक की क्षति के लिए रुपये 50 हजार की राहत तथा इससे अधिक की क्षति हेतु वास्तविक आगणित दर से सहायता राशि वितरित की गयी। इस प्रकार कुल 1054 व्यक्तियों को 6 करोड़ 84 लाख रुपये से अधिक की धनराशि दी गयी है। इसके अतिरिक्त मुजफ्फरनगर के कृषकों के ट्रैक्टर ट्रालियों तथा गन्ने की फसल को हुई क्षति के लिए 56 लाख 30 हजार रुपये से अधिक की सहायता भी दी गयी है।
साम्प्रदायिक घटनाओं से भयाक्रान्त हो अपने घरों से पलायन कर गये लगभग 51 हजार लोगों ने 58 राहत शिविरों में शरण ली। राहत शिविरों के माध्यम से प्रशासन द्वारा लोगों को ठहरनें, चिकित्सा, खाद्य सामग्री एवं दैनिक उपयोग की जरुरी समस्त सुविधायें उपलब्ध करायी गयी। मुजफ्फरनगर के 41 शिविरों में 27198, शामली के 17 शिविरों में 23757 व्यक्तियों ने शरण ली थी।
तात्कालिक आवश्यकता को देखते हुए सभी शिविरों में खाद्य सामग्री जैसे आटा, दाल, चावल, नमक, खाद्य तेल तथा अन्य जरुरी दैनिक वस्तुयें जैसे दूध आलू, चीनी, साबुन, मसाला आदि उपलब्ध करायी गयी। जन सामान्य के सहयोग से इन वस्तुओं से बना बनाया खाना सभी कैम्पों में निरन्तर उपलब्ध कराया गया। इन सभी व्यवस्थाओं पर दोनो जनपदों में लगभग 3 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि व्यय की गयी।
शिविरों में रहने वाली महिलाओं एवं बच्चों के प्रसाधन हेतु चलित शौचालय की भी व्यवस्था की गयी। परिवारों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शिविरों के आस-पास समुचित सफाई व्यवस्था बनायी रखी गयी तथा संक्रामक रोगों की रोकथाम हेतु चूना, कीटनाशक दवाईयों आदि का छिड़काव कराया गया। शिविर में रहने वालों की आवश्यकता को देखते हुए स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था भी की गयी जिसमें स्थायी ट्यूबवेल तथा इण्डिया मार्का-2 हैण्डपम्प लगाये गये। इन राहत शिविरों के निकट वाटर टैंकरर्स की व्यवस्था की गयी व स्वच्छ पेयजल हेतु क्लोरीन की टेबलेट भी बांटी गयी।
जो शिविर पक्के भवनों में स्थापित नही थे उन शिविरों में मौसम को देखते हुए दरी, टेंट, चादर आदि भी उपलब्ध कराये गये। शिविरों में खाना बनाने के लिए लकड़ी, गैस सिलेण्डर की व्यवस्था भी करायी गयी। खाना खाने के लिए स्टील की प्लेट, ग्लासेस व अन्य बर्तन भी दिये गये। इसके अतिरिक्त इन परिवारों को तौलिया, मिल्क पाउडर, बिस्किट पैकेट, महिलाओं व बच्चों के लिए कपड़े, मिट्टी का तेल आदि भी उपलब्ध कराया गया। जलाने की लकड़ी वन विभाग द्वारा उपलब्ध करायी गयी। इन व्यवस्थाओं हेतु 1 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि व्यय की गयी।
शिविरों में निवास कर रहे व्यक्तियों के चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराये जाने हेतु पुरुष एवं महिला चिकित्सकों के साथ पैरामेडिकल स्टाफ की ड्यूटी लगाकर स्वास्थ्य परीक्षण निरन्तर कराया गया। इन शिविरों में 44 हजार से भी अधिक लोगों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। जनपद में उपलब्ध एम्बुलेंसो को शिविरवार सम्बद्ध किया गया तथा आवश्यकतानुसार गम्भीर रुप से बीमार व्यक्तियों को जिला अस्पताल अथवा मेरठ व दिल्ली के उच्चस्तरीय चिकित्सा केन्द्रों पर उपचार हेतु भेजने की व्यवस्था की गयी। दंगे के कारण 21 गम्भीर रुप से घायल लोगों को भी विशेषज्ञ उपचार हेतु इन उच्चस्तरीय चिकित्सा केन्द्र पर भेजा गया। इन उच्चस्तरीय केन्द्रों पर आने वाले व्ययभार को राज्य सरकार द्वारा वहन किया गया। महिला चिकित्सकों व महिला स्वास्थ्य कार्यकत्रियों को महिलाओं एवं गर्भवती महिलाओं के चिकित्सीय देखरेख के लिए नियुक्त किया गया। ऐसी महिलाओं एवं 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों को अंागनबाडी कार्यकर्ताओं के माध्यम से पौष्टिक आहार वितरित कराया गया। इसके अतिरिक्त कैम्पों में रह रहे 1600 से अधिक बच्चों का टीकाकरण भी कराया गया।
विस्थापित परिवारों के गांव में पीछे छूट गये पशुओं के लिए चारा आदि की व्यवस्था भी सुनिश्चित करायी गयी। पशुधन विभाग के माध्यम से ऐसे गांव व पशुओं को चिन्हिांकित करते हुए लगभग 550 कुंटल से अधिक चारा वितरित कराया गया तथा पशु चिकित्सकों के माध्यम से 250 पशुओं का उपचार भी कराया गया।
राहत शिविरों में निवास कर रहे व्यक्तियों को प्रभावशाली एवं गणमान्य व्यक्तियों तथा जन प्रतिनिधियों के सहयोग से उनमें विश्वास व सुरक्षा की भावना पैदा करते हुए उनके गांव व घर वापस जाने हेतु अथक प्रयास किये गये। इन प्रयासों एवं शासन द्वारा उपलब्ध करायी गयी सहायता एवं की गयी क्षतिपूर्ति के फलस्वरुप आज मुजफ्फरनगर में 1 शिविर में 1910 तथा शामली जिले के 4 शिविरों में 2873, कुल 4783 व्यक्तियों को छोडकर शेष को उनके निवास स्थानों पर पुनर्वासित किया जा चुका है। दंगे प्रभावित गांव में लौट रहे लोगों के सुरक्षा एवं आत्मविश्वास बनाये रखने के लिए पुलिस पिकेट एवं पेट्रोलिंग की विशेष व्यवस्था की गयी है।
दंगा प्रभावित ग्रामों के विश्लेषण में यह भी पाया गया कि जनपद मुजफ्फरनगर के गांव फुगाना, कुटवा, कुटवी, काकडा, मोहम्मदपुर रायसिंह और मुंडभर तथा जनपद शामली के गांव लिसाड़, लाक और बहावड़ी के लोग इन ग्रामों में घटित हिंसात्मक घटनाओं से इतने भयाक्रांत थे कि वह अपने गांव वापस लौटने को किसी भी दशा में तैयार नही थे। उनके वापस न जाने के इस निर्णय के औचित्य को दिनांक 7 व 8 सितम्बर, 2013 को घटित घटनाओं के आलोक में सही पाते हुये राज्य सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया कि इन परिवारों को एक मुश्त धनराशि देते हुए अपनी स्वतंत्र इच्छा से किसी भी स्थान पर बसने के लिए सहायता दी जाय। इस प्रकार इन 9 गांवों के 1534 परिवारों के 8500 से अधिक सदस्यों को अपनी इच्छा से चयनित स्थानों पर बसने हेतु राज्य सरकार द्वारा 5-5 लाख रुपये प्रत्येक परिवार की दर से कुल 76.70 करोड़ रुपये की धनराशि वितरित की गयी। आर्थिक सहायता पाने वाले अधिकांश परिवार राहत शिविर छोडकर अन्यत्र पुनस्र्थापित होने के लिए चले गये है।
शासन द्वारा साम्प्रदायिक घटनाओं से प्रभावित परिवारों को मदद प्रदान करने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास करते हुए उन्हें हर सम्भव राहत दी गयी है। सरकार द्वारा पूरी गम्भीरता से बहुत बड़े पैमाने पर पीडि़त परिवारों को राहत व पुर्नवासन का कार्य किया गया है। सरकार इस कार्य में कोई भी कोर कसर न उठा रखने के लिए दृढ़संकल्पित है। इस समय 5 राहत शिविर अवशेष हैं। जनपद मुजफ्फरनगर के ग्राम लोई एवं जनपद शामली के मदरसा तैमूरशाह मलकपुर, बरनावी तथा ईदगाह कांधला में राहत शिविर स्थित है। लोई तथा मलकपुर के राहत शिविर सरकारी भूमि पर स्थित हैं। इस प्रकार इन शिविरों में वर्तमान में निवास कर रहे कुल लगभग 4783 लोगों के लिए आज भी प्रशासन द्वारा पूर्ण निष्ठा के साथ स्थानीय लोगों के सकारात्मक सहयोग के साथ राहत कार्य जारी है। उत्तर प्रदेश राज्य के राहत कार्यो की जानकारी निरन्तर रुप से उच्चतम न्यायालय को दी जाती रही है।
इन 5 शिविरों में कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें अपने पुनर्वासन हेतु अपने ग्राम के अलावा किसी नये स्थान का चयन करना बाकी है। किन्ही-किन्ही परिवारों में आर्थिक सहायता को लेकर परस्पर मनमुटाव एवं आन्तरिक विवाद होने की जानकारी प्रकाश में आयी है तथा इस कारणवश परिवार ने राहत शिविर नही छोडे हैं। कुछ लोग ऐसे क्षेत्रों से भी है जहाॅ कोई घटना घटित नही हुई।
मीडिया व अन्य माध्यमों से इस प्रकार की जानकारी प्राप्त हुई थी कि कुछ व्यक्तियों व बच्चों की शिविरों में मृत्यु की दुखद घटनायें हुई है तथा सर्दी से बचाव व चिकित्सा आदि के इंतजाम पर्याप्त नही बताये गये है। यद्यपि शासन व प्रशासन द्वारा दंगा प्रभावित व्यक्तियों को राहत व पुनर्वासन उपलब्ध कराने हेतु भरपूर प्रयास किया गया था, फिर भी मीडिया रिपोर्ट को दृष्टिगत रखते हुए इन तथ्यों की गहन छानबीन व कैम्पों में रहने वाले व्यक्तियों को ठंड से बचाव व चिकित्सा आदि जैसी बुनियादी सुविधायें सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से शासन द्वारा मेरठ के मण्डलायुक्त की अध्यक्षता में तात्कालिक प्रभाव से एक उच्चस्तरीय समिति का गठन विगत 13 दिसम्बर 2013 को किया गया है। जनपद शामली एवं मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारियों एवं मुख्य चिकित्साधिकारियों को इस समिति का सदस्य बनाया गया है। इस उच्चस्तरीय समिति द्वारा 13 दिसम्बर, 2013 से ही कार्यवाही निर्धारित बिन्दुओं पर प्रारम्भ कर दी गयी है। समिति द्वारा तथ्यात्मक जांच एवं अध्ययन रिपोर्ट तैयार कर आख्या शासन को उपलब्ध कराने के लिये कार्यवाही की जा रही है।

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